12 फरवरी – श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏
नाथ भगति अति सुखदायिनी ।
देहु कृपा करि अनपायनी ।।
सुनि प्रभु परम सरल कपि बानी
एवमस्तु तब कहेउ भवानी ।।
( सुंदरकांड 33/1)
राम राम 🙏🙏
हनुमान जी सीताजी का पता लगाकर वापस आ गये हैं तथा सीता जी के बारे में सब बताते हैं । राम जी ने हनुमान जी से पूछा कि इतनी बड़ी लंका को आपने कैसे जलाया । हनुमान जी कहते हैं कि सब आपका प्रताप है , इसमें मेरा कुछ भी प्रभाव नहीं हैं । फिर हनुमान जी ने राम जी से अत्यंत सुख देने वाली भक्ति माँगी है । हनुमान जी के सरल बचनों को सुनकर राम जी ने “ ऐसा ही हो “ कह दिया ।
सुख भक्ति में है , अन्य तो सुख देने के साधन मात्र हैं जबकि भक्ति साध्य है । भगवान को सरलता भाती है , जो सरल है राम जी उसके समीप हैं , उसकी बात सुनते व मानते हैं ।अस्तु सरल व सरस होने का प्रयास करें । अथ ! जय राम ,जय राम ,जय जय राम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी, लखनऊ

