01 अप्रैल – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
काल धर्म नहिं ब्यापहिं ताही ।
रघुपति चरन प्रीति अति जाही।।
नट कृत बिकट कपट खगराया।
नट सेवकहि न ब्यापइ माया ।।
( उत्तरकांड 103/4)
राम राम 🙏🙏
काकभुसुंडि जी गरूड़ महाराज को कलियुग के बारे में बताते हुए कहते हैं कि जिसका श्री राम चरणों में अत्यंत प्रेम है उसे युगधर्म नहीं व्यापते हैं । जादू दिखाने वाले का कपट चरित्र देखने वालों के लिए तो विकट होता है परंतु जादूगर के सेवक पर असर नहीं करता है ।
जो भी श्री राम चरणों का प्रेमी हो जाता है उसे युग विशेष की बुराइयाँ प्रभावित नहीं कर पाती हैं कारण वह समदर्शी श्री राम जी से प्रभावित होता है । अस्तु! कलियुग सहित युग विशेष से अप्रभावित रहने के लिए श्री राम चरणों में अपना समर्पण करे और निर्भय हो जाएं । इसके लिये सतत भजन करते रहिए….. श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम । सीताराम जय सीताराम, सीताराम जय सीताराम। जय सियाराम जय जय सियाराम, जानकीवल्लभ राजाराम ।।
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31 मार्च- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
चित्रकूट रघुनंदनु छाए ।
समाचार सुनि सुनि मुनि आए।।
सिय सौमित्रि राम छबि देखहिं ।
साधन सकल सफल करि लेखहिं
( अयोध्याकाण्ड 133/3-4)
राम राम 🙏🙏
वन प्रवास के दौरान श्री राम जी चित्रकूट में निवास कर रहें हैं , यह समाचार सुनकर बहुत से मुनि लोग श्री राम जी से मिलने आते हैं , श्री राम जी उन्हें प्रणाम करते हैं । मुनि लोग श्री राम लक्ष्मण व श्री सीता जी की छवि को निहारते हैं और अपने सारे साधनों को सफल हुआ मानते हैं ।
हम आप को यदि श्री राम जी की भक्ति मिल जाएँ या हमें श्री राम दर्शन हो जाए तो अब तक के अपने सारे प्रयत्नों को सफल हुआ मानना चाहिए । इसके लिये श्री राम जी के भक्ति में लगना होगा, और निरन्तर नाम भजन करना होगा….. श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम। सीताराम जय सीताराम, सीताराम जय सीताराम । जय सियाराम जय जय सियाराम, जय सियाराम जय जय सियाराम । जानकीवल्लभ राजाराम ।।
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संकलन तरूण जी लखनऊ

