श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

20 अगस्त- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

हित हमार सियपति सेवकाईं ।
सो हरि लीन्ह मातु कुटिलाईं ।।
मैं अनुमानि दीख मन माहीं ।
आन उपायँ मोर हित नाहीं ।।
( अयोध्याकाण्ड 177/1)
राम राम 🙏🙏
श्री दशरथ जी के परलोक गमन पर श्री भरत जी ननिहाल से बुलाए जाते हैं , गुरुदेव वशिष्ठ जी उन्हें अयोध्या का राज सम्हालनें को कहते हैं । इस पर श्री भरत जी कहते हैं कि मेरा हित तो श्री राम जी की सेवा करने में है परंतु माँ की कुटिलता ने उसे मुझसे छीन लिया है । मैंने अपने मन में विचार कर देख लिया कि दूसरे किसी उपाय से मेरा हित होने वाला नही है ।
आत्मीय जन ! श्री राम सेवा में अपना हित समाहित है , जिसे भी यह भाव आ गया उसका कल्याण हो गया । हम सबको तो अपने मन की ही कुटिलता श्री राम सेवा में लगने नहीं देती है । अतएव अपना हित पहचानें, कुटिलता छोड़ सरलता से श्री राम सेवा में लगकर अपना कल्याण कर लें । अथ…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

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