11 सितंबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
कहब सँदेसु भरत के आएँ ।
नीति न तजिअ राजपदु पाएँ ।।
पालेहु प्रजहि करम मन बानी ।
सेएहु मातु सकल सम जानी ।।
( अयोध्याकाण्ड 151/2)
जय श्रीराम🙏🙏
श्री राम जी को वन में छोड़ सुमंत्र जी वापस अयोध्या लौट आए हैं । श्री दशरथ जी आते ही सुमंत्र जी से पूछते हैं कि राम कहाँ हैं । सुमंत्र जी उन्हें समझाते हैं और श्री राम जी का संदेश सुनाते हैं । वे कहते हैं कि श्री राम ने कहा है कि श्री भरत के आने पर श्री भरत से कहना कि राजपद मिलने पर भी नीति न छोड़ देना , प्रजा का पालन मन वचन व कर्म से करना, सब माताओं को समान जानकर उनकी सेवा करना ।
आत्मीय जन ! राजपद मिलने पर वही नीति नहीं छोड़ता है जिसके पास श्री राम पद भी है अन्यथा वह अनीति में लग जाता है । श्री भरत जी के पास श्री राम पद है, श्री राम पद समता व सेवा में लगाता है । अतः कोई पद पाने से पहले श्री राम पद ग्रहण करने का प्रयास करें। अस्तु…. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩

