16 सितंबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
भेद हमार लेन सठ आवा ।
राखिअ बाँधि मोहि अस भावा
सखा नीति तुम्ह नीकि बिचारी ।
मम पन सरनागत भयहारी ।।
( सुंदरकांड 42/4)
राम राम🙏🙏विभीषण श्री राम जी की शरण में आए हैं , कपि जन आकर सुग्रीव को बताते हैं । सुग्रीव श्री राम जी को बताते हैं । श्री राम जी सुग्रीव से पूछते हैं कि क्या किया जाए । सुग्रीव कहते हैं कि यह मूर्ख हमारा भेद लेने आया है, इसे बाँध कर रखा जाए । श्री राम जी कहते हैं कि मित्र! कहते तो ठीक हो परंतु मेरा प्रण तो शरणागत के भय को हर लेना है।
आत्मीय जन ! जगत बाँधता है जबकि जगदीश छुड़ाता है । संसारी हर जगह बाधने की बात करता है जबकि जगदीश मुक्त करता है । अतः जगत के भय से मुक्ति चाहते हैं तो श्री राम शरण लें। अथ….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

