19 अक्टूबर-श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
नाथ कृपा करि पूँछेहु जैसें ।
मानहु कहा क्रोध तजि तैसें ।।
मिला जाइ जब अनुज तुम्हारा
जातहिं राम तिलक तेहि सारा ।।
( सुंदरकांड 53/1)
राम राम जी🙏🙏
विभीषण के श्री राम जी के शरण में जाने पर रावण ने अपना दूत यह कह कर भेजा था कि जाकर पता करो कि विभीषण की क्या गति हुई । श्री राम जी के स्वभाव को देखकर दूत लौट आया है । रावण ने सबके बारे में पूछा है, वह कहता है कि जैसे आपने पूछा है वैसे ही क्रोध छोड़कर मेरी बात पर विश्वास कीजिए । आपका भाई जाकर जब श्री राम जी से मिलता है तभी श्री राम जी ने उसका लंका के राजा के रूप में तिलक कर दिया ।
बंधुवर ! विभीषण के मिलते ही जैसे श्री राम जी ने उनका तिलक कर दिया था उसी तरह यदि हम आप भी एक बार श्री राम जी की शरण ले लें तो श्री राम जी की कृपा तिलक पाना निश्चित है। अतः संसार के माया को छोड़ श्री सीताराम जी की कृपा तिलक पानी है तो निरन्तर श्री सीताराम नाम का भजन करें। अथ…… श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

