23 अक्टूबर-श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
प्रिय लागिहि अति सबहि मम,
भनिति राम जस संग।
दारु बिचारु कि करइ कोउ,
बंदिअ मलय प्रसंग ।।
( बालकांड, दो. 10)
जय सियाराम 🙏🙏
पूज्यपाद गोस्वामी श्री तुलसी दास जी अपनी रचना के आरंभ में कहते हैं कि श्री राम यश के संग मेरी यह कविता सभी को अति प्रिय लगेगी, जैसे मलय पर्वत के संग से काष्ठ भी वंदनीय हो जाता है और काठ का कोई विचार नही करता है ।
आत्मीय जन ! श्री राम यश के साथ जो भी ब्यक्ति या वस्तु जुड़ जाती है वह वंदनीय हो जाती है कारण उसमें श्री राम यश प्रवेश कर उसे पावन व स्तुति योग्य बना देता है। अतः अपनी लघुता कि चिंता न करें बस श्री राम जी का साथ कर लें, और अपनी बिगड़ी सुधार लें। अथ……श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम संकलन तरुण जी लखनऊ
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