श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

21 नवंबर – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

राम नाम सिव सुमिरन लागे ।
जानेउ सतीं जगतपति जागे।।
जाइ संभु पद बंदनु कीन्हा ।
सनमुख संकर आसनु दीन्हा ।।
( बालकांड 59/2)
राम राम 🙏🙏माता सीता जी का रूप धारण करने के कारण भगवान शिव जी ने सती को त्याग दिया है, सती सहित वे कैलाश आकर समाधि में चले जाते हैं । सत्तासी हज़ार वर्ष बीतने पर शिव जी समाधि से बाहर आते हैं और श्री राम नाम का स्मरण करने लगते हैं । सती जी जान गईं कि जगदीश जग गये हैं । वे भगवान शिव जी को प्रणाम करती हैं, भगवान शिव जी ने उन्हें सामने बैठने के लिए आसन दिया है ।
बंधुवर ! भगवान शिव जी की तरह हम आप भी श्री राम नाम सुमिरन करके श्री सीताराम जी की भक्ति प्राप्त कर जीवन में जागृति लाएं। अतः बिना समय गंवाए श्री राम नाम भजन में लग जाएं, सब ठीक हो जाएगा । अस्तु…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
20 नवंबर- श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏

हंसबंसु दसरथु जनकु
राम लखन से भाइ ।
जननी तूँ जननी भई
बिधि सन कछु न बसाइ ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो. 161)
राम राम जी 🙏🙏
श्री दशरथ जी के परलोक गमन पर महर्षि वशिष्ठ जी ने दूत भेजकर श्री भरत जी को बुलवाया है , श्री भरत जी के आने पर माता कैकइ उन्हें सब कुछ बताती है । श्री भरत जी कहते हैं कि पापिनी ! तूने कुल का नाश कर दिया । मुझे सूर्यवंश, दशरथ जैसे पिता और श्री राम, लक्ष्मण से भाई मिले, पर हे जननी ! तू मुझे जन्म देने वाली माता हुई, ऐसे में क्या करूँ, विधाता पर कुछ भी वश नहीं चलता है ।
आत्मीय जन ! जिस पर वश न चले तो उसे स्वीकार करने में ही सुख है। श्री राम जी परब्रम्ह परमेश्वर हैं , उन्हें स्वीकार कर उनकी करनी को अपनाकर हम आप सुखी हो सकते हैं । अस्तु….श्रीराम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

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