10 दिसंबर.श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
घन घमंड नभ गरजत मोरा।
प्रिया हीन डरपत मन मोरा ।
दामिनि दमक रह न गृह माहीं।
खल कै प्रीति जथा थिर नाहीं।।
( किष्किंधाकांड 13/1)
जय सियाराम 🙏🙏
सुग्रीव को राजा बनाकर श्री राम जी वर्षा ऋतु में प्रवर्षण पर्वत पर वास कर रहे हैं। वे भैया लक्ष्मण से कहते हैं कि आकाश में बादल उमड़ घुमड़ कर गर्जना कर रहें हैं, सीता के बिना मेरा मन डर रहा है । बिजली चमक कर बादलों में ठहरती नहीं है जैसे दुष्ट का प्रेम स्थिर नहीं रहता है ।
बंधुवर! दुष्ट का प्रेम स्थिर नहीं रहता है जबकि श्री राम जी का प्रेम स्थिर व पक्का रहता है, आप उनसे प्रेम करके तो देखें । जितना आप श्री राम जी को प्रेम करेंगे उसका दूना श्री राम जी आपसे करेंगे। अतएव संसार के स्वार्थी एवं कृतघ्न लोगों से नहीं श्री राम जी प्रेम करें व सदा श्री राम जी का प्रेम पाते रहें। अथ….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

