16 जुलाई- श्रीरामचरितमान की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
पूरब कल्प एक प्रभु,
जुग कलिजुग मल मूल ।
नर अरु नारि अधर्मरत
सकल निगम प्रतिकूल ।।
( उत्तरकांड, दो. 96)
जय सियाराम भक्तों🙏🙏
काकभुसुंडि द्वारा अपने मोह की कथा सुनाने के बाद गरुड़ जी द्वारा यह पूछने पर कि यह कौए का शरीर व श्री राम भक्ति आपको कैसे मिली, काकभुसुंडि जी कहते हैं कि पहले के कल्पों में कलियुग था जो पापो से युक्त था ,स्त्री पुरुष सब अधर्म में लगे हुए तथा वेद विरोधी थे ।
आत्मीय जनों! आज भी कलियुग है, कमोबेश सभी पापकर्म में लगे हुए हैं, कोई वेद, शास्त्र आदि के बातों को नहीं मानता है। ऐसे में जो धर्म पालन में लगा हुआ है वही सुखी है, श्री राम जी साक्षात धर्म हैं, अतः श्री राम भक्ति में लगें व सर्वविध सुखी हो जाएँ । इसके लिए केवल एक ही सबसे सरल साधन है श्री सीताराम नाम का भजन सतत करते रहना…. अस्तु श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम । सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जानकीवल्लभ राजाराम जय रघुनंदन जय सियाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

