समय

समय

चाँदनी बिष्ट
सुराग, उत्तराखंड

क्यों ना चलो नया सवेरे के साथ,
नया अपना समय लिखे,
नये पंखों के साथ उड़ान भरे,
नया ख्वाब बुने एक नया जहां बनाएं,
जिस समय को बिगाड़ कर अब तक मैं सोई थी,
चलो क्यों ना उसे एक नए सवेरे से उठाकर बेहतर बनाएं,
चलो अपने परिवार के लिए कुछ करने की सोचें
और इस समय को बदलने की सोचें,
हाँ अब हम भी समय के साथ कुछ करने की सोचें।।

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