सावन के पहले सोमवार पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, त्रिलोचन महादेव में 20 हजार श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक

सावन के पहले सोमवार पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, त्रिलोचन महादेव में 20 हजार श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक

जौनपुर, 3 अगस्त। सावन माह के पहले सोमवार को जौनपुर जिले के प्रमुख शिवालयों में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भोर से ही श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन-पूजन के लिए मंदिरों में पहुंचने लगे। गौरी शंकर धाम (सुजानगंज), त्रिलोचन महादेव, सारनाथ महादेव, गोमतेश्वर महादेव सहित जिले के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिर परिसर दिनभर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंजते रहे।
पौराणिक त्रिलोचन महादेव धाम में लगभग 20 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा त्रिलोचन महादेव के दर्शन कर जलाभिषेक किया। देर रात हुई बारिश और दिनभर रुक-रुक कर होती बूंदाबांदी भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी। बड़ी संख्या में कांवड़िए और शिवभक्त गंगाजल लेकर मंदिर पहुंचे और विधि-विधान से भगवान शिव का अभिषेक किया।
त्रिलोचन महादेव सहित जिले के अन्य शिवालयों के पट श्रद्धालुओं के लिए भोर में चार बजे खोल दिए गए, जबकि त्रिलोचन महादेव मंदिर में जलाभिषेक का क्रम सुबह तीन बजे से ही शुरू हो गया था। मंदिर प्रशासन ने दर्शन, पूजन और जलाभिषेक की व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए।
मार्कंडेय महादेव धाम कैथी से गंगाजल लेकर पहुंचे कांवड़ियों के जत्थे मंदिर परिसर स्थित धर्मशालाओं, विद्यालय प्रांगण और सरोवर की सीढ़ियों पर विश्राम करते दिखाई दिए। त्रिलोचन महादेव मंदिर के पुजारी सोनू गिरी ने बताया कि सावन माह को देखते हुए दर्शन-पूजन और जलाभिषेक की सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई थीं।
मंदिर प्रबंधक मुरलीधर गिरी ने बताया कि त्रिलोचन महादेव मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता है। मान्यता के अनुसार भगवान शिव स्वयं शिवलिंग के रूप में यहां भूमि से प्रकट हुए थे। इस प्राचीन मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है। लोकश्रुति है कि जिस स्थान पर शिवलिंग प्रकट हुआ था, वहां प्रतिदिन एक गाय स्वयं आकर अपना दूध अर्पित करती थी। ग्रामीणों द्वारा खुदाई करने पर शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसके बाद यहां मंदिर की स्थापना हुई। यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना माना जाता है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने बैरिकेडिंग, सुरक्षा बलों की तैनाती तथा दर्शन व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए, जिससे श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण ढंग से जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की।

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