सृष्टि फाउंडेशन’ द्वारा आयोजित ग़ज़ल संध्या में शिव ज्योत्सना राजौरिया ने अपने सुरों के जादू से दर्शकों को भावविभोर किया
‘सृष्टि फ़ाउण्डेशन’ द्वारा आयोजित ग़ज़ल संध्या में प्रज्ञा शर्मा, निधि चौधरी, असलम हसन द्वारा लिखित ग़ज़लों को अपने स्वर में ज्योत्सना शिव राजौरिया ने किया
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मुंबई: महाराष्ट्र ब्यूरो चीफ
सृष्टि फाउंडेशन द्वारा सांस्कृतिक मंत्रालय के सहयोग से नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA), मुंबई में आयोजित भावपूर्ण सांस्कृतिक संध्या “रंग-ए-ग़ज़ल” कला और साहित्य का एक अनूठा संगम बनकर सामने आई। यह संध्या उन सभी के लिए एक दुर्लभ अनुभूति रही जो भारतीय काव्य परंपरा की ग़ज़ल विधा से भावनात्मक जुड़ाव रखते हैं।
ग़ज़ल गायिका डॉ. ज्योत्सना रजोरिया और शिव रजोरिया ने अपने सुरों के जादू से सभागार में उपस्थित प्रत्येक श्रोता को मंत्रमुग्ध कर दिया। इनके कॉम्पोजिशन नवीनता से भरे थे। सबसे विशेष बात ये थी कि इनका संगीत, ग़ज़लों पे हावी होने के स्थान पर ग़ज़लों को और ख़ूबसूरती से बयान कर रहा था। श्रोताओं ने हर ग़ज़ल को गहराई से महसूस किया और सभागार तालियों की गूंज से गुंजायमान हो उठा।
इस शाम की विशेषता यह रही कि प्रस्तुत ग़ज़लें भारतीय प्रशासनिक सेवा और साहित्य जगत की प्रतिष्ठित शख्सियतों — आईएएस निधि चौधरी, आईआरएस असलम हसन और डॉ. प्रज्ञा शर्मा द्वारा लिखी गई थीं। इन ग़ज़लों में समाज, संवेदनाएँ, जीवन के द्वंद्व और इंसानी रिश्तों की गहराइयाँ अभिव्यक्त से इतर भी बहुत कुछ ऐसा था जिसने दर्शकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।
इस मौके पर आईएएस निधि चौधरी के ग़ज़ल संग्रह “छल करता पैमाना” का लोकार्पण भी किया गया। इस संग्रह का परिचय प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. प्रज्ञा शर्मा ने बड़े ही भावपूर्ण ढंग से दिया। उन्होंने कहा, “निधि जी की लेखनी सशक्त, संवेदनशील और समकालीन है – जो नारी दृष्टिकोण से जीवन की पेचीदगियों को बेहद सरलता और प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती है।”
कार्यक्रम में अनेक विशिष्ट अतिथियों ने उपस्थिति दर्ज कराई। समाजसेवा, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान के लिए गणपत कोठारी, राया सिन्हा, डॉ. एम. एल. सराफ तथा रचना भीमराजका को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारतीय समाज में रचनात्मक योगदान की सराहना का प्रतीक था।
कलात्मक प्रस्तुतियों के उपरांत ग़ज़ल कलाकारों को सम्मानित करने हेतु न्यायिक और प्रशासनिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियाँ — जज श्री हरीश कौशिक, इनकम टैक्स कमिश्नर श्री लियाक़त, तथा वरिष्ठ मुशायरा संचालक अफ़सर दक्कनी मंच पर उपस्थित हुए।
डॉ. ज्योत्सना रजोरिया का स्वागत आईएएस निधि चौधरी द्वारा किया गया, वहीं शिवा रजोरिया का अभिवादन कस्टम कमिश्नर असलम हसन द्वारा हुआ। यह आत्मीयता इस बात का प्रतीक थी कि प्रशासनिक अधिकारी केवल कर्तव्यनिष्ठ नहीं, बल्कि कला-संवेदनाओं के प्रति भी समान रूप से समर्पित हैं।
सृष्टि फाउंडेशन के अध्यक्ष विपिन गुप्ता ने इस अवसर पर कहा, “हमारा उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं है, बल्कि समाज को संस्कृति, साहित्य और कला से जोड़ने की जिम्मेदारी निभाना भी है। ‘रंग-ए-ग़ज़ल’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सशक्त सांस्कृतिक संवाद है, जो पीढ़ियों को जोड़ने का माध्यम बन सकता है।” उन्होंने आगे यह भी बताया कि फाउंडेशन भविष्य में भी इस प्रकार के साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय विरासत से जोड़ने का प्रयास करता रहेगा।
नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट का कलात्मक वातावरण, सुरों की मिठास, ग़ज़लों की संवेदना और साहित्य की गहराई — ये सभी मिलकर “रंग-ए-ग़ज़ल” को एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बना गए। यह आयोजन इस बात का प्रमाण था कि जब कला, साहित्य और समाज एक मंच पर आते हैं, तो आत्मा तक पहुँचने वाला संवाद रचा जा सकता है।

