100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जिलाधिकारी श्री सैमुअल पॉल एन. के द्वारा शुक्रवार देर सायं कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद में 24 मार्च से संचालित 100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान कार्यक्रम की समीक्षा की गई।
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि जनपद के कुल 848 हाई रिस्क ग्राम पंचायतों के सापेक्ष कुल 313 हाई रिस्क ग्राम पंचायतों में अभी तक आयुष्मान आरोग्य शिविर लगाकर टीबी स्क्रीनिंग का कार्य किया गया है। जिलाधिकारी ने समस्त केंद्र प्रभारियों को इस अभियान का व्यापक प्रचार प्रसार करवाते हुए मा0 जनप्रतिनिधिगण की भी सहभागिता सुनिश्चित किये जाने हेतु समन्वय के निर्देश दिए।
उन्होंने जनपद को प्राप्त कुल 4 हैंड हेल्ड एक्सरे मशीन का अधिकतम प्रयोग करते हुए हाई रिस्क ग्राम पंचायतों के 60 वर्ष से ऊपर के लोगों, जिन्हें मधुमेह है,जो धूम्रपान एवं शराब का सेवन करते हो,सभी कुपोषित एवं टीबी रोगियों के संपर्क में रहने वाले लोंगो को प्राथमिकता के आधार पर एक्स रे जांच करके टीबी रोग की स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने सभी प्रकार की गतिविधियों को सोशल मीडिया पर शेयर किये जाने के निर्देश दिए जिससे व्यापक स्तर पर लोगों को इसके संबंध में जागरूक किया जा सके।
समीक्षा बैठक में 100 दिवसीय अभियान के प्रगति का प्रस्तुतिकरण कार्यक्रम के जिला समन्वयक सलिल कुमार यादव के द्वारा किया गया।
बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ गंगा राम गौतम, समस्त अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी के साथ अन्य सहयोगी विभागों के जनपदीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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जौनपुर 13 जून, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-02
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सघन पल्स पोलियो अभियान हेतु जिला टास्क फोर्स की बैठक सम्पन्न
28 जून से प्रारम्भ होगा सघन पल्स पोलियो अभियान, जनपद के 6 लाख से अधिक बच्चों को पिलाई जाएगी पोलियो रोधी खुराक
जिलाधिकारी श्री सैमुअल पॉल एन. की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार देर सायं सघन पल्स पोलियो अभियान-2026 के सफल एवं प्रभावी संचालन हेतु जिला टास्क फोर्स की बैठक सम्पन्न हुई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अवगत कराया कि जनपद में सघन पल्स पोलियो अभियान का शुभारम्भ 28 जून 2026 (रविवार) को बूथ गतिविधियों के साथ किया जाएगा। अभियान के प्रथम दिवस जनपद के समस्त पोलियो बूथों पर शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो रोधी खुराक पिलाई जाएगी। इसके उपरांत 29 जून से 03 जुलाई तक आशा, आंगनबाड़ी एवं एएनएम कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर भ्रमण कर छूटे हुए बच्चों को दवा पिलाई जाएगी तथा 05 जुलाई को बी-टीम गतिविधि संचालित की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि अभियान के सफल संचालन हेतु जनपद में कुल 1,866 पोलियो बूथ, 1,242 घर-घर भ्रमण टीमें, 105 ट्रांजिट टीमें तथा 52 विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, प्रमुख चौराहों एवं ईंट-भट्टों जैसे संवेदनशील स्थलों पर विशेष रूप से कार्य करेंगी। अभियान के अंतर्गत 6,06,187 बच्चों को पोलियो रोधी खुराक पिलाने तथा 7,65,825 घरों का भ्रमण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जिलाधिकारी ने कहा कि पल्स पोलियो अभियान जनस्वास्थ्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम है तथा इसके क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देशित किया कि जनपद का कोई भी शून्य से पांच वर्ष तक का बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहने पाए तथा अभियान की नियमित निगरानी, प्रभावी पर्यवेक्षण एवं शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने पंचायत राज विभाग, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, खाद्य एवं रसद विभाग, ग्राम प्रधानों एवं अन्य संबंधित विभागों को अभियान में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अभियान को प्रभावी बनाने के लिए ब्लॉक स्तर पर समस्त स्वास्थ्य कर्मियों को चिकित्साधिकारियों की देखरेख में बिंदुवार एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किए जाने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि सभी आशा, आंगनबाड़ी एवं एएनएम कार्यकर्ता ब्लॉकवार ट्रेनिंग कराई जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों के संबंध में चिकित्सकीय दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी ने बैठक में अनुपस्थित रहने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदलापुर एवं बक्शा के एमओआईसी का एक दिन का वेतन बाधित करने तथा स्पष्टीकरण जारी करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारियों एवं चिकित्सा अधीक्षकों की टीम गठित करते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में अपंजीकृत एवं अवैध चिकित्सालयों के विरुद्ध सघन जांच अभियान चलाकर आवश्यक विधिक एवं दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने निर्देशित किया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित जन-जागरूकता अभियान एनसीसी कैम्पों, शैक्षणिक संस्थानों, क्षेत्रीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तथा सोशल मीडिया, एवं पेपम्लेट आदि के माध्यम से व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, समस्त अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधीक्षकगण तथा विभिन्न विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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जौनपुर 13 जून, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-03
“खेत बचाओ अभियान” के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें किसान
कृषि विभाग द्वारा “खेत बचाओ अभियान” एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत शनिवार को जनपद ग्राम नसीरूद्दीनपुर, मीरपुर, अब्बोपुर बड़ागांव विशुनपुर लेबरुआ एवं अमरौना में किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैव-उर्वरकों के उपयोग तथा सतत कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना था।
डा. रमेश चंद्र यादव उप परियोजना निदेशक (आत्मा) कृषि प्रसार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि “मिट्टी केवल एक भौतिक माध्यम ही नहीं, बल्कि एक जीवित माध्यम है” जिसकी उर्वरा शक्ति बनाए रखना भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने फसल विविधीकरण, खरीफ फसलों की उन्नति शील तकनीकों, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया।
डा.राजीव सिंह केवीके बक्शा ने मृदा में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की भूमिका और जैव-उत्पादों के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन उत्पादों के प्रयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है तथा खेती की लागत कम होती है।
डा. रूपेश सिंह केवीके बक्शा ने मृदा परीक्षण आधारित संतुलित पोषण प्रबंधन और जैव-उर्वरकों के वैज्ञानिक प्रयोग का प्रदर्शन किया।
डा. हरिओम वर्मा केवीके बक्शा ने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि मिट्टी एक जीवित तंत्र है, जिसे स्वस्थ रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
डा. सुरेन्द्र सोनकर (केवीके, बक्शा) ने हरी खाद, मृदा परीक्षण और आवश्यकता आधारित संतुलित उर्वरक उपयोग के लाभों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को जैव-उर्वरक एवं जैव-नियंत्रक उत्पाद बायोडर्मा (ट्राइकोडर्मा) वितरित किए गए। साथ ही किसानों को निम्न विषयों पर तकनीकी साहित्य भी प्रदान किया गया।
डा. गजेन्द्र सिंह ने संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, डा. दिनेश कुमार ने सूक्ष्मजीव आधारित जैव-उर्वरक ट्राइकोडर्मा के उपयोग, इंजीनियर वरुण कुमार ने मृदा नमूना लेने की वैज्ञानिक विधि की विस्तृत जानकारी दी। संवाद सत्र में किसानों ने मृदा उर्वरता, फसल पोषण एवं जैव-उर्वरकों से जुड़ी समस्याओं पर विशेषज्ञों से चर्चा कर समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम में ग्राम प्रधान सहित सैकड़ों किसानों ने सहभागिता की।
किसानों ने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा जैविक खादों,जैव-उर्वरकों को अपनाकर सतत एवं लाभकारी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।

