पहाड़ की बेटी के सपने
रुचि
गाँव – सन, उत्तराखंड
गाँव की मिट्टी से उठी एक आस हूँ मैं,
पहाड़ जैसा इरादे अटल हैं मेरे,
सपने बड़े हैं और इरादे पक्के हैं मेरे,
बचपन बीता है मेरा संघर्षों में,
कभी फटी किताबों में तो कभी कलम न होने में,
पर आँखों में था कामयाब होने का ख्वाब मेरा,
कुछ कर गुजरने का जुनून पक्का है मेरा,
बारहवीं में हूँ आज, कलम है हथियार मेरा,
किताबें मेरी दोस्त और परिवार सपना मेरा,
गांव की मिट्टी ने सिखाया है लड़ना,
गिरकर भी हर बार है मुझे उठना,
एक दिन कामयाब मैं भी होंगी,
गाँव का नाम मुझसे भी रोशन होगा,
कह दूँगी दुनिया से हँसकर तब मैं भी,
पहाड़ की बेटियां भी किसी से कम नहीं होतीं।।
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