मानदेय और अनुदान की मांग को लेकर वित्तविहीन शिक्षकों का प्रदर्शन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन

मानदेय और अनुदान की मांग को लेकर वित्तविहीन शिक्षकों का प्रदर्शन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन

जौनपुर,24 जुलाई । यूपी के जौनपुर में उत्तर प्रदेश के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारी शुक्रवार को डॉ राजेंद्र प्रताप सिंह प्रदेश अध्यक्ष वित्त विहीन शिक्षक महासभा के नेतृत्व कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट इंद्र नंदन सिंह को सौंपकर लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान की मांग किया।
धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि वे पिछले कई दशकों से बिना किसी नियमित वेतन के शिक्षक शैक्षणिक सेवाएं दे रहे हैं। उनका आरोप है कि 15 अक्टूबर 1986 के अध्यादेश में वित्तविहीन व्यवस्था को केवल दो वर्ष के लिए प्रयोगात्मक रूप से लागू करने का प्रावधान था, लेकिन यह व्यवस्था आज तक जारी है। इससे हजारों शिक्षक और कर्मचारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने बताया कि वर्ष 2016-17 में प्रदेश सरकार ने जीविकोपार्जन के लिए मासिक मानदेय देने हेतु 200 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। हालांकि, 12 सितंबर 2016 के शासनादेश के माध्यम से लागू की गई वितरण नीति के कारण इसका लाभ अपेक्षित रूप से नहीं मिल सका।
शिक्षकों का कहना है कि शासन स्तर पर कई बार प्रत्यावेदन देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में याचिका संख्या 21635/2021 (जियारत हुसैन एवं अन्य बनाम राज्य सरकार एवं अन्य) दायर की गई, जिस पर 19 जुलाई 2023 को आदेश भी पारित हो चुका है, लेकिन अब तक उसका प्रभावी अनुपालन नहीं कराया गया।
वित्तविहीन शिक्षक एवं कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में जीविकोपार्जन के लिए तत्काल मासिक मानदेय लागू करना, 1986 के अध्यादेश की भावना के अनुरूप वित्तविहीन विद्यालयों को पुनः सरकारी अनुदान सूची में शामिल करना तथा इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921 की धारा 16(च) एवं 16(छ) के तहत सेवा शर्तों का निर्धारण सुनिश्चित करना शामिल है। इसके साथ ही उन्होंने चिकित्सा, सामाजिक सुरक्षा और अन्य वैधानिक सुविधाएं भी नियमित शिक्षकों के समान उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।

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