नशामुक्त युवा ही बनाएंगे विकसित भारत, विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं पर भी उठाए सवाल: आनंदीबेन पटेल
जौनपुर ,27 जुलाई । यूपी वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह में सोमवार को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण का संकल्प दिलाते हुए कहा कि डिग्री केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति दायित्व निभाने का अवसर है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर नवाचार, अनुसंधान और सामाजिक सरोकारों से जुड़ने का आह्वान किया। साथ ही विश्वविद्यालय के छात्रावासों, मेस और अन्य व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी खुलकर नाराजगी जताई।
समारोह में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी, एनसीसी के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर गौरव गौतम, कुलपति प्रो. वंदना सिंह सहित विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने राज्यपाल का स्वागत किया। इस अवसर पर 83 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक तथा 339 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक ज्ञान का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि आज बेटियां शिक्षा, विज्ञान, चिकित्सा, प्रशासन, न्यायपालिका और शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक दायित्वों को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।
राज्यपाल ने युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से आगाह करते हुए कहा कि नशे की प्रवृत्ति समाज और परिवार दोनों के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ, अनुशासित और संवेदनशील युवा ही वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार कर सकते हैं। अपने परिवार का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले चार दशकों से उनके घर में चाय नहीं बनती और अतिथियों का स्वागत नींबू पानी से किया जाता है।
विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने छात्रावासों में मेस के भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, वाशिंग मशीन और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कुलपति को निर्देश दिया कि भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाए और छात्रों को सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए। कारगिल विजय दिवस पर विश्वविद्यालय में कार्यक्रम आयोजित न होने पर भी उन्होंने असंतोष व्यक्त किया।
राज्यपाल ने डिजिलॉकर व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इससे डिग्री और अंकपत्रों में होने वाली त्रुटियों तथा भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगा है। उन्होंने बताया कि गुजरात में शिक्षा मंत्री रहते हुए फर्जी डिग्रियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर हजारों फर्जी प्रमाणपत्र निरस्त कराए गए थे।
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार भी उतने ही आवश्यक हैं। उन्होंने स्वर्ण पदक विजेताओं, विशेषकर बेटियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं और महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। वहीं, मेजर गौरव गौतम ने विद्यार्थियों से अनुशासन, ईमानदारी, स्वस्थ जीवनशैली और तकनीक के सकारात्मक उपयोग के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

