(बेलफास्ट)पांचवें मैच में आयरलैंड की 6 विकेट से हार, अफगानिस्तान ने 4-0 से जीती वनडे सीरीज
बेलफास्ट ,16 अगस्त ,। अफगानिस्तान ने आयरलैंड के खिलाफ शनिवार को सिविल सर्विस क्रिकेट क्लब में खेले गए मुकाबले में 6 विकेट से जीत हासिल की। इसी के साथ मेहमान टीम ने पांच मुकाबलों की सीरीज 4-0 से अपने नाम कर ली। टॉस गंवाकर बल्लेबाजी के लिए उतरी आयरलैंड की टीम ने 50 ओवरों के खेल में 7 विकेट खोकर 298 रन बनाए। इस टीम को एंड्रयू बालबर्नी (13) के रूप में पहला झटका लगा, जो कप्तान पॉल स्टर्लिंग के साथ पहले विकेट के लिए 34 रन ही जुटा सके। इसके बाद टीम ने खाते में 5 और रन जुड़ने के बाद ही कप्तान स्टर्लिंग (20) का विकेट भी खो दिया। यहां से केड कारमाइकल ने हैरी टेक्टर के साथ तीसरे विकेट के लिए 40 रन जुटाए। केड 22 रन बनाकर आउट हुए।
टेक्टर ने कर्टिस कैंपर के साथ पांचवें विकेट के लिए 55 रन जुटाए। टेक्टर 80 गेंदों में 4 चौकों के साथ 53 रन बनाकर आउट हुए, जहां से कैंपर ने मोर्चा संभाला। उन्होंने जॉर्ज डॉकरेल के साथ छठे विकेट के लिए 57 गेंदों में 72 रन की साझेदारी की, जबकि जॉर्ज नील के साथ सातवें विकेट के लिए 64 रन जुटाए। कैंपर 84 गेंदों में 4 छक्कों और 7 चौकों के साथ 96 रन बनाकर आउट हुए, जबकि डॉकरेल ने 31 रन जुटाए।
जॉर्डन ने नाबाद 23 रन की पारी खेली। मेहमान खेमे से अजमतुल्लाह ओमरजई ने सर्वाधिक 3 विकेट हासिल किए, जबकि एमएम गजनफर ने 2 विकेट निकाले। मोहम्मद सलीम और नंगेलिया खरोती ने 1-1 विकेट हासिल किया। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 48.5 ओवरों में मुकाबला अपने नाम कर लिया।
इस टीम ने 22 के स्कोर तक इब्राहिम जादरान (5) और रहमानुल्लाह गुरबाज (14) के विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद कप्तान रहमत शाह ने सेदिकुल्लाह अटल के साथ तीसरे विकेट के लिए 201 रन की साझेदारी करते हुए टीम को जीत की पटरी पर ला दिया। अटल 112 गेंदों में 3 छक्कों और 7 चौकों के साथ 98 रन बनाकर पवेलियन लौटे। यहां से रहमत शाह ने अजमतुल्लाह ओमरजई के साथ 56 जुटाए, जबकि हशमतुल्लाह शाहिदी के साथ पांचवें विकेट के लिए 23 रन की अटूट साझेदारी करते हुए टीम को जीत दिलाई।
कप्तान रहमत शाह 133 गेंदों में 2 छक्कों और 13 चौकों के साथ 143 रन बनाकर नाबाद रहे, जबकि ओमरजई 14 गेंदों में 24 रन बनाकर आउट हुए। मेजबान खेमे से लियाम मैकार्थी ने सर्वाधिक 3 विकेट हासिल किए। जय मूदड़ा ने 1 विकेट अपने नाम किया।
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(नई दिल्ली)लक्ष्य सेन : कॉमनवेल्थ में जीता स्वर्ण, ओलंपिक में भी देश को पदक की उम्मीद
नई दिल्ली ,16 अगस्त ,। भारत में बैडमिंटन बहुत ही तेजी से उभरता और लोकप्रिय होता खेल है। भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों ने अपने दमदार प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हासिल सफलता से वैश्विक स्तर पर अपना लोहा मनवाया है। विश्व पटल पर तेजी से उभरे जिन भारतीय खिलाड़ियों का नाम प्रमुखता से लिया है, उनमें लक्ष्य सेन प्रमुख हैं। वह एकल वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। लक्ष्य सेन का जन्म 16 अगस्त 2001 को अल्मोड़ा, उत्तराखंड में हुआ था।
बैडमिंटन सेन को विरासत में मिला है। इस खेल में वह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं। बैडमिंटन में बेहतर करियर के लिए लक्ष्य 10 साल की उम्र में बेंगलुरु चले गए। उन्होंने विमल कुमार से बैडमिंटन की ट्रेनिंग ली है। प्रकाश पाडुकोण उनके मेंटर रहे हैं। 2014 में, उन्होंने स्विस जूनियर इंटरनेशनल जीता। फिर फरवरी 2017 में वे बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड जूनियर रैंकिंग में नंबर एक जूनियर एकल खिलाड़ी बन गए। सेन 2018 एशियन जूनियर चैंपियनशिप में चैंपियन बने, उन्होंने फाइनल में टॉप सीडेड वर्ल्ड जूनियर नंबर 1 कुनलावुत विटिडसार्न को 21-19, 21-18 से हराया।
लक्ष्य ने यूथ ओलंपिक 2018 में मिश्रित टीम के साथ स्वर्ण पदक जीता था। जूनियर स्तर पर दमदार प्रदर्शन के सिलसिले को सेन ने सीनियर स्तर पर भी जारी रखा। उन्होंने 2021 विश्व चैंपियनशिप में एकल में कांस्य, थॉमस कप 2022 में पुरुष टीम के साथ स्वर्ण और थॉमस कप 2026 में पुरुष टीम के साथ कांस्य पदक जीता था। लक्ष्य ने 2022 में बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष एकल में स्वर्ण पदक और मिश्रित टीम के साथ रजत पदक जीता था।
एशियन गेम्स 2022 में रजत पदक, एशिया मिश्रित टीम चैंपियनशिप में मिश्रित टीम के साथ कांस्य पदक, एशिया टीम चैंपियनशिप 2020 में कांस्य पदक उनके नाम दर्ज है। लक्ष्य सेन को 30 नवंबर, 2022 को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। लक्ष्य महज 25 साल के हैं। पेरिस ओलंपिक में वह एकल में चौथे स्थान पर रहे थे। खेल के प्रति उनकी मेहनत और समर्पण को देखते हुए बैडमिंटन में उनसे ओलंपिक पदक की उम्मीद है।
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(नई दिल्ली)वर्ल्ड कप हमारे लिए अहम, उम्मीद है जीतेंगे : हरमनप्रीत सिंह
नई दिल्ली ,16 अगस्त ,। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप खिताब के लिए देश के 51 साल के इंतजार को खत्म करने की बात कही है। हरमनप्रीत ने जियोस्टार पर कहा, वर्ल्ड कप हम सभी के लिए बहुत मायने रखता है क्योंकि इस वर्ल्ड कप के बाद, आपको कभी नहीं पता होता कि क्या हो सकता है। टीम में कई सीनियर खिलाड़ी भी हैं, इसलिए हमारे लिए यह एक शानदार मौका है। हमने जितनी मेहनत की है और जिस तरह से ट्रेनिंग की है, हमें विश्वास है कि हम यह जरूर कर सकते हैं। यही हमारा एकमात्र लक्ष्य है, अपना बेस्ट देना और पदक जीतना। बेशक, टोक्यो और पेरिस में लगातार पदक जीतना हमारे लिए प्रेरक रहा है। हरमनप्रीत ने कहा कि इस प्रतियोगिता में हम अंडरडॉग के तौर पर उतरेंगे, लेकिन यह हमारे पक्ष में हो सकता है। उम्मीदों का बोझ उठाने के बजाय, टीम इस टूर्नामेंट को वर्ल्ड स्टेज पर अपनी काबिलियत दिखाने के मौके के तौर पर देख रही है। उम्मीद है कि हम ट्रॉफी घर लाएंगे। यह सफर मुश्किल होगा, लेकिन हम तैयार हैं।
उन्होंने कहा, टीम एक-दूसरे पर भरोसा करती है और हमारी सोच सकारात्मक है। कौन स्कोर करता है या कौन डिफेंड करता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, जब तक हम एक टीम के तौर पर जीतते हैं। हम पूरी जान लगा देंगे।
कप्तान ने कहा कि हमारा मकसद ट्रॉफी उठाना है, हमारा डिफेंस हमारी नींव है। एक अनुशासित डिफेंसिव ढांचा भारत को दूसरी तरफ ज्यादा मौके बनाने देगा। हमने उस एरिया में बहुत अच्छी प्रैक्टिस की है।
भारत ने अपनी तैयारियों के दौरान अलग-अलग डिफेंसिव तरीकों पर बहुत काम किया है, जिसमें टीम फुल प्रेस, हाफ-कोर्ट प्रेस और लो प्रेस वाली स्थितियों के लिए ट्रेनिंग कर रही है। हरमनप्रीत ने कहा कि टीम ने उन सिस्टम के अंदर अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए भी काफी समय दिया है।
हरमनप्रीत का मानना है कि एक व्यवस्थित डिफेंस टीम को विरोधी टीम पर बार-बार दबाव बनाने और विरोधी सर्कल के अंदर स्कोरिंग के मौके बनाने का प्लेटफॉर्म मिल सकता है। क्योंकि जब आप अच्छा डिफेंस करते हैं, तो विरोधी टीम के जोन में घुसने के हालात बनेंगे। 50-50 मौकों को कैसे बदलना है, दबाव में अच्छी तरह से रिसीव कैसे करना है, और नतीजा कैसे निकालना है, चाहे वह गोल पर शॉट हो या पेनल्टी कॉर्नर मिलना हो, ये चीजें बहुत जरूरी होंगी।
भारत ने 1975 में अपनी जीत के बाद से पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप नहीं जीता है, और हरमनप्रीत का मानना है कि मौजूदा टीम के पास टाइटल के लिए चुनौती देने का अनुभव और आत्मविश्वास दोनों हैं।
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(ओहायो)वीनस विलियम्स सिनसिनाटी ओपन के पहले राउंड में हारीं, लगातार 13वां एकल मैच गंवाया
ओहायो ,16 अगस्त ,। सात बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन वीनस विलियम्स का एकल में हारने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को सिनसिनाटी ओपन के पहले राउंड में वीनस को कोलंबियाई क्वालीफायर एमिलियाना अरांगो से 6-2, 6-2 से हार का सामना करना पड़ा। 46 साल की अमेरिकी खिलाड़ी को डब्ल्यूटीए 1000 इवेंट के लिए वाइल्डकार्ड एंट्री दी गई थी, लेकिन वह अभी भी एकल मैच न जीतने का अपना सिलसिला खत्म नहीं कर पाईं। उनका हार का सिलसिला जुलाई 2025 से जारी है। 25 साल की क्वालीफायर अरांगो ने लिंडनर टेनिस सेंटर के ग्रैंडस्टैंड कोर्ट पर विलियम्स को एक घंटे और पांच मिनट में हरा दिया।
विलियम्स की दोपहर की शुरुआत मुश्किल तरीके से हुई क्योंकि पहले गेम में उनकी सर्व टूट गई थी, और उन्हें एक ऐसे खिलाड़ी के खिलाफ मैच में वापस आने में परेशानी हुई जो लगातार दबाव बना रहा था।
अरांगो ने अपने पांच में से चार ब्रेक-पॉइंट चांस को बदला और अपनी पहली सर्व के बाद 71 प्रतिशत पॉइंट्स हासिल किए, जबकि विलियम्स अपने एक ब्रेक के मौके को भूना नहीं पाईं और अपनी पहली सर्व के सिर्फ 41 प्रतिशत पॉइंट्स ही जीत पाईं।
अरांगो के मुताबिक, शुरुआत में बढ़त बनाने से उनका नर्वसनेस शांत हुआ और वह मुकाबले पर नियंत्रण रख पाईं।
अरांगो ने कहा, मेरा नर्वसनेस थोड़ा कम हुआ, शायद थोड़ी सांस लेने की जगह मिली। मुझे लगता है कि मैंने बस उस पर टिके रहने का अच्छा काम किया, उसे जितना हो सके खेलने के लिए मजबूर करने की कोशिश की।
कोलंबियन को दूसरे राउंड में डिफेंडिंग चैंपियन और टॉप सीड इगा स्वियाटेक से खेलना होगा।
विलियम्स के लिए, यह हार एकल में मुश्किल प्रदर्शन का नतीजा थी, उनकी सबसे हालिया जीत पिछले साल के वाशिंगटन टूर्नामेंट में हुई थी जब उन्होंने पेटन स्टर्न्स को हराया था।
टूर्नामेंट में 11वीं बार हिस्सा ले रही विलियम्स ने कहा कि वह असल में हर समय स्थिति पर पूरी तरह से नियंत्रण में थीं, लेकिन बदकिस्मती से वह इसे उस तरह से पूरा नहीं कर पाईं जैसा वह चाहती थीं। अच्छी बात यह है कि मैं शॉट्स को नियंत्रित कर रही हूं। मुझे बस उस आखिरी हिस्से में थोड़ी निरंतरता लानी होगी।
विलियम्स अभी भी सिनसिनाटी में रहेंगी, क्योंकि उन्हें अपनी बहन सेरेना विलियम्स के साथ मुकाबला करने का एक और मौका मिलेगा। दोनों को डबल्स इवेंट के लिए वाइल्डकार्ड दिया गया है।
दोनों बहनों ने 2022 यूएस ओपन में डबल्स में अपना आखिरी मैच एक साथ खेला था। दोनों इस साल विंबलडन में फिर से एक साथ डबल्स में खेलने वाली थीं, लेकिन सेरेना को चोट की वजह से हटना पड़ा।
सिनसिनाटी में उनका कैंपेन मार्टा कोस्त्युक और पेटन स्टर्न्स के खिलाफ मैचों से शुरू होगा। डबल्स इवेंट रविवार से शुरू होंगे।
सेरेना के साथ खेलने पर वीनस ने कहा, मैं उत्साहित हूं और उम्मीद करती हूं कि हम दोनों फ्रेश, तैयार और पूरी तरह तैयार होकर इसमें उतर सकें। मैं इसके लिए तैयारी करूंगी।
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(नई दिल्ली)डेट फंड्स क्या होते हैं, इनमें कैसे होता है निवेश? जानिए इनके फायदे और किन जोखिमों का रखना चाहिए ध्यान
नई दिल्ली ,16 अगस्त ,। म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों के बीच इक्विटी फंड काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन हर निवेशक ज्यादा जोखिम लेकर शेयर बाजार में पैसा लगाना नहीं चाहता, ऐसे निवेशकों के लिए डेट फंड्स एक बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। अगर आप भी डेट फंड्स के बारे में विस्तार से समझना चाहते हैं कि ये क्या हैं, इनमें निवेश कैसे होता है और इनके फायदे-नुकसान क्या हैं, तो चलिए हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, डेट फंड म्यूचुअल फंड की ऐसी श्रेणी हैं, जो मुख्य रूप से बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियों, ट्रेजरी बिल, कॉरपोरेट डेट और अन्य निश्चित आय वाले साधनों में निवेश करते हैं, जिनका उद्देश्य निवेशकों के पैसे को अपेक्षाकृत स्थिर आय वाले साधनों में लगाकर रिटर्न हासिल करना होता है।
डेट फंड को आसान भाषा में समझें तो ये ऐसे म्यूचुअल फंड हैं, जिनमें आपका पैसा कंपनियों या सरकार द्वारा जारी किए गए डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाता है। जब कोई कंपनी या सरकार बॉन्ड जारी करके पैसा जुटाती है, तो निवेशक को उस रकम पर ब्याज मिलता है। डेट फंड इसी तरह के कई साधनों में निवेश करके एक पोर्टफोलियो तैयार करते हैं।
डेट फंड की अलग-अलग श्रेणियां होती हैं। इनमें लिक्विड फंड, ओवरनाइट फंड, अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड, शॉर्ट ड्यूरेशन फंड, मीडियम ड्यूरेशन फंड, कॉरपोरेट बॉन्ड फंड और गिल्ट फंड जैसी कैटेगरी शामिल हैं। हर कैटेगरी की अवधि, जोखिम और रिटर्न की संभावना अलग हो सकती है।
डेट फंड में निवेश करना म्यूचुअल फंड की अन्य योजनाओं की तरह ही आसान है। निवेशक किसी म्यूचुअल फंड कंपनी, म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म या निवेश ऐप के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार डेट फंड चुन सकता है। निवेश करने से पहले फंड की कैटेगरी, पोर्टफोलियो में शामिल प्रतिभूतियां, क्रेडिट क्वालिटी, औसत अवधि, खर्च अनुपात और जोखिम स्तर को समझना जरूरी है।
निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार एकमुश्त निवेश या एसआईपी के जरिए भी डेट फंड में पैसा लगा सकता है। हालांकि, डेट फंड चुनते समय केवल पिछले रिटर्न को देखकर फैसला करना सही नहीं है। निवेश का उद्देश्य और वह पैसा कितने समय के लिए निवेश करना है, इसके आधार पर फंड का चुनाव करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर डेट फंड को पूरी तरह सुरक्षित निवेश मान लिया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। डेट फंड में जोखिम इक्विटी फंड की तुलना में अलग प्रकार का होता है। इसमें मुख्य रूप से क्रेडिट रिस्क और ब्याज दर का जोखिम महत्वपूर्ण होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, क्रेडिट रिस्क तब होता है जब फंड जिस कंपनी के बॉन्ड में निवेश करता है, उसकी वित्तीय स्थिति खराब हो जाए या वह ब्याज अथवा मूलधन चुकाने में समस्या का सामना करे। वहीं ब्याज दर बढ़ने पर लंबी अवधि वाले बॉन्ड की कीमत प्रभावित हो सकती है। इसलिए ब्याज दरों में बदलाव का असर डेट फंड के रिटर्न पर भी पड़ सकता है।
वहीं, डेट फंड के फायदे की बात करें तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक को अपने पोर्टफोलियो में स्थिर आय वाले साधनों का एक्सपोजर मिलता है। इक्विटी फंड की तुलना में इनमें आमतौर पर बाजार की तेज उतार-चढ़ाव वाली स्थितियों का असर कम होता है। इसी वजह से कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी के साथ डेट फंड का इस्तेमाल विविधीकरण के लिए करते हैं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डेट फंड उन निवेशकों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं जिनका निवेश लक्ष्य कुछ महीनों से लेकर कुछ वर्षों तक का है और जो अपने पैसे को सीधे किसी एक बॉन्ड या फिक्स्ड डिपॉजिट में लगाने के बजाय विभिन्न डेट इंस्ट्रूमेंट्स में फैलाना चाहते हैं। फंड मैनेजर अलग-अलग प्रतिभूतियों में निवेश करके जोखिम को फैलाने की कोशिश करता है।
यह कहना सही नहीं होगा कि डेट फंड हमेशा एफडी से ज्यादा रिटर्न देते हैं। बैंक एफडी में ब्याज दर पहले से तय होती है, जबकि डेट फंड का रिटर्न बाजार की परिस्थितियों, ब्याज दरों और फंड के पोर्टफोलियो पर निर्भर करता है। इसलिए डेट फंड में मिलने वाला रिटर्न निश्चित नहीं होता।
यही कारण है कि डेट फंड को गारंटीड रिटर्न वाला उत्पाद समझकर निवेश नहीं करना चाहिए। निवेश करने से पहले यह देखना जरूरी है कि संबंधित फंड किस तरह की प्रतिभूतियों में पैसा लगा रहा है और उसका जोखिम स्तर क्या है।
डेट फंड का एक महत्वपूर्ण नुकसान यह है कि इनमें रिटर्न की गारंटी नहीं होती। ब्याज दरों में बदलाव, बॉन्ड की क्रेडिट क्वालिटी में गिरावट या बाजार की परिस्थितियों के कारण फंड का एनएवी बढ़ या घट सकता है। कुछ डेट फंड में कम अवधि के बावजूद जोखिम हो सकता है, जबकि लंबी अवधि वाले डेट फंड ब्याज दरों में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
इसके अलावा, डेट फंड में निवेश करने पर फंड मैनेजमेंट और अन्य खर्चों का असर भी रिटर्न पर पड़ता है। इसलिए किसी भी फंड का चयन करते समय केवल उसका पिछला प्रदर्शन देखना पर्याप्त नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे निवेशक जो अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी की तुलना में अपेक्षाकृत कम उतार-चढ़ाव वाले निवेश को शामिल करना चाहते हैं, उनके लिए डेट फंड एक विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, सही फंड का चुनाव निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार होना चाहिए। छोटी अवधि के लक्ष्य के लिए अलग तरह के डेट फंड और लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए अलग कैटेगरी उपयुक्त हो सकती है।
डेट फंड में पैसा लगाने से पहले क्रेडिट क्वालिटी, ब्याज दर का जोखिम, फंड की अवधि, पोर्टफोलियो में शामिल बॉन्ड, खर्च अनुपात और फंड की कैटेगरी को जरूर समझें। यह भी ध्यान रखें कि डेट फंड बैंक एफडी की तरह निश्चित रिटर्न या मूलधन की गारंटी नहीं देते।
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(नई दिल्ली)दुनिया में मंदी की आहट, लाल सागर में भारी संकट, फिर भी भारत ने कर दिया कमाल, एक्सपोर्ट डेटा ने सबको चौंकाया
नई दिल्ली ,16 अगस्त ,। दुनिया के कई हिस्सों, खासकर पश्चिम एशिया में इस वक्त गहरा तनाव है। लाल सागर से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य तक माल ढुलाई को लेकर हाहाकार मचा हुआ है और ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। लगातार बढ़ते माल भाड़े और वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बीच दुनिया मानकर चल रही थी कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को तगड़ा झटका लगेगा। लेकिन इन तमाम विपरीत परिस्थितियों को धता बताते हुए भारत ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने दुनियाभर के आर्थिक जानकारों को हैरान कर दिया है। जुलाई महीने के जो ताजा एक्सपोर्ट (निर्यात) और इंपोर्ट (आयात) के आंकड़े सामने आए हैं, वे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि भयंकर अनिश्चितता के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था और यहां के सामानों ने दुनियाभर के बाजारों में अपनी जबरदस्त धाक जमा ली है।
इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों ने गाड़े झंडे
कॉमर्स मिनिस्ट्री की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस भयंकर लॉजिस्टिक संकट के बावजूद जुलाई महीने में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट (मूर्त वस्तुओं का निर्यात) रिकॉर्ड 44.24 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 19.63 फीसदी ज्यादा है। मुख्य रूप से इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स के सामानों की भारी मांग के कारण ही भारत यह छलांग लगा पाया है। फेडरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स के अध्यक्ष एससी राल्हन के अनुसार, मुश्किल समय में यह रिकॉर्ड दिखाता है कि भारतीय व्यवसायों में किसी भी संकट से निपटने की गजब की क्षमता है। दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम एशिया, जहां से सबसे ज्यादा संकट की खबरें आ रही हैं, वहां भी भारत के निर्यात में लगभग 8.62 फीसदी का शानदार उछाल दर्ज किया गया है।
आयात भी 9 महीने के टॉप पर, व्यापार घाटे में आया उछाल
निर्यात के साथ-साथ भारत के आयात में भी भारी तेजी देखने को मिली है। फर्टिलाइजर, पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स और कोयले जैसी जरूरी चीजों की घरेलू मांग बढ़ने के चलते जुलाई में कुल आयात 76.22 बिलियन डॉलर हो गया, जो पिछले नौ महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। चूंकि निर्यात के मुकाबले आयात कहीं ज्यादा रफ्तार से बढ़ा है, इसलिए देश का व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) भी पिछले साल के 27.88 बिलियन डॉलर से बढ़कर 31.98 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। हालांकि, कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि व्यापार के प्रतिशत के तौर पर यह घाटा पिछले साल के 27.3 फीसदी से घटकर अब 26.5 फीसदी रह गया है।
सोने-चांदी की चाल और नाथू ला दर्रे से फिर शुरू हुआ व्यापार
कीमती धातुओं के मोर्चे पर सरकार के उस फैसले का असर साफ़ दिखा, जिसमें मई में कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया था। जुलाई में चांदी का आयात 66.1 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 171.68 मिलियन डॉलर पर सिमट गया, जबकि सोने का आयात 4.77 फीसदी बढ़कर 4.16 बिलियन डॉलर रहा। इन आंकड़ों से यह भी साफ हुआ है कि अमेरिका फिलहाल भारत के सामानों का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, जबकि चीन से भारत सबसे ज्यादा माल आयात कर रहा है। इसके साथ ही, व्यापारिक मोर्चे पर एक और बड़ी खुशखबरी यह है कि 1 अगस्त 2026 से सिक्किम के नाथू ला रूट के जरिए सीमा व्यापार छह साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से शुरू हो गया है, जिससे आने वाले समय में आर्थिक संबंधों और क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड को और अधिक मजबूती मिलेगी।
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(नई दिल्ली)रक्षा क्षेत्र में सुधारों का असर, भारत का रक्षा उत्पादन और निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
नई दिल्ली ,16 अगस्त ,। रक्षा क्षेत्र में पिछले एक दशक में किए गए व्यापक सुधारों के चलते भारत सैन्य उपकरणों के उत्पादन और निर्यात के मामले में मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय शक्ति के रूप में उभरा है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सरकार की ओर से जारी फैक्टशीट के अनुसार, देश का रक्षा उत्पादन 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो 2013-14 में महज 4,746 करोड़ रुपये था।
2025-26 में रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 24 प्रतिशत योगदान दिया।
भारत के रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। रक्षा निर्यात 2013-14 में 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये हो गया। भारतीय सैन्य उपकरणों को अब 80 से अधिक देशों में बाजार मिल रहा है।
2025-26 में कुल रक्षा निर्यात में निजी क्षेत्र का योगदान 17,353 करोड़ रुपये यानी 45.16 प्रतिशत रहा, जबकि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने 21,071 करोड़ रुपये यानी 54.84 प्रतिशत का योगदान दिया।
केंद्र सरकार ने 2029 तक सालाना 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करने का लक्ष्य तय किया है।
रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के लिए आवंटन भी बढ़ाया गया है। यह राशि 2014-15 में 13,716.14 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 29,100.25 करोड़ रुपये हो गई है, जो 112 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
वर्ष 2022-23 से रक्षा रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक संस्थानों के लिए खोला गया है, ताकि नवाचार को बढ़ावा देने के साथ रक्षा उत्पादन को आधुनिक बनाया जा सके।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की 24 प्रयोगशालाओं में उपलब्ध परीक्षण सुविधाओं को डिफेंस टेस्टिंग पोर्टल (डीटीपी) के जरिए उद्योग के लिए सुलभ बनाया गया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से घरेलू निर्माता, स्टार्टअप और उद्योग सरकारी परीक्षण सुविधाओं का सशुल्क उपयोग करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
भारत की सर्वोच्च रक्षा खरीद संस्था रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) भी स्वदेशी खरीद के जरिए ‘आत्मनिर्भर भारतÓ को बढ़ावा दे रही है। परिषद ने 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक की डीआरडीओ द्वारा डिजाइन और भारतीय उद्योग द्वारा निर्मित रक्षा प्रणालियों के लिए एओएन को मंजूरी दी है।
स्वदेशी रक्षा खरीद के तहत 97 तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमानों की करीब 62,000 करोड़ रुपये की खरीद और 156 एलसीएच ‘प्रचंडÓ हेलीकॉप्टरों की करीब 62,700 करोड़ रुपये की खरीद को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से देश की घरेलू एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षमता को मजबूती मिल रही है।
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 ने स्वदेशी खरीद और घरेलू विनिर्माण को मजबूत किया। इसके साथ ही भारतीय कंपनियों के लिए रक्षा क्षेत्र में डिजाइन, विकास और उत्पादन के अवसर बढ़ाए गए।
इससे पहले रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) 2016 के जरिए रक्षा खरीद व्यवस्था को सरल बनाया गया और ‘मेक इन इंडियाÓ को आगे बढ़ाया गया। इसने रक्षा खरीद से जुड़े बाद के सुधारों की नींव तैयार की।
सरकार के अनुसार, रक्षा खरीद मैनुअल (डीपीएम) 2025 ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की राजस्व खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया। इसके तहत मंजूरियों को तेज किया गया, स्वदेशी परियोजनाओं के लिए दंड प्रावधानों में राहत दी गई और दीर्घकालिक ऑर्डर का आश्वासन दिया गया।
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(मुंबई)सेबी ने ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म्स को गिफ्ट सिटी आईएफएससी के उत्पाद पेश करने की अनुमति दी
मुंबई ,16 अगस्त ,। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सोबी) ने शुक्रवार को ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स (ओबीपीपी) द्वारा पेश किए जा सकने वाले उत्पादों का दायरा बढ़ा दिया। अब ये प्लेटफॉर्म गिफ्ट सिटी में इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (आईएफएससीए) द्वारा विनियमित प्रतिभूतियां और निवेश उत्पाद भी पेश कर सकेंग

