प्रदेश के संरक्षित स्मारकों के संरक्षण पर खर्च होंगे 15 करोड़ रुपये, झांसी से ललितपुर तक ऐतिहासिक धरोहरों का होगा व्यापक अनुरक्षण

प्रदेश के संरक्षित स्मारकों के संरक्षण पर खर्च होंगे 15 करोड़ रुपये, झांसी से ललितपुर तक ऐतिहासिक धरोहरों का होगा व्यापक अनुरक्षण

लखनऊ, (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित एवं सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य पुरातत्व निदेशालय के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट प्रावधान के तहत राज्य संरक्षित स्मारकों में व्यापक अनुरक्षण कार्य कराए जाने के लिए 15 करोड़ 5 लाख 31 हजार रुपये की धनराशि प्रस्तावित एवं अवमुक्त की गई है। इस धनराशि से होने वाले सिविल कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह धनराशि प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित महत्वपूर्ण संरक्षित स्मारकों के संरक्षण, मरम्मत, सफाई और पुनरुद्धार पर खर्च की जाएगी। इसके तहत झांसी, लखनऊ, शामली, फिरोजाबाद और ललितपुर स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के स्मारकों में व्यापक अनुरक्षण कार्य कराए जाएंगे।उन्होंने बताया कि झांसी स्थित ठाकुरद्वारा की गढ़ी के सिविल कार्य के लिए करीब 498.96 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है। इस धनराशि से स्मारक परिसर में वनस्पति उन्मूलन, दीवारों, छत और छज्जों पर लगे पत्थरों की रासायनिक सफाई कराई जाएगी। इसके साथ ही दीवारों पर बनी पेंटिंग की रासायनिक सफाई और संरक्षण कार्य तथा जर्जर दीवारों के प्लास्टर के रखरखाव का कार्य भी कराया जाएगा।पर्यटन मंत्री के अनुसार लखनऊ स्थित बड़ा शिवाला, सिद्धनाथ मंदिर सैठा में भी वनस्पति उन्मूलन और प्लास्टर के रखरखाव से संबंधित कार्य कराए जाएंगे। वहीं शामली के प्राचीन गुंबद बंतीखेड़ा में भी संरक्षण कार्य कराया जाएगा, जिससे स्मारक की मूल संरचना को सुरक्षित रखा जा सके।फिरोजाबाद स्थित चंद्रवाड़ का किला भी संरक्षण योजना में शामिल है। यहां स्मारक के पत्थरों की रासायनिक सफाई और दीवारों पर जर्जर ईंट-पत्थर के संरक्षण का कार्य कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त ललितपुर के रणछोड़ मंदिर और लक्ष्मणगढ़ मंदिर में भी आवश्यक सिविल कार्य कराए जाएंगे। झांसी स्थित डिमरौनी की गढ़ी का अनुरक्षण कार्य भी प्रस्तावित योजना के तहत कराया जाएगा।जयवीर सिंह ने बताया कि ललितपुर स्थित मर्दन सिंह का किला के संरक्षण के लिए करीब 145.57 लाख रुपये की लागत से विभिन्न कार्य कराए जाएंगे। इसमें स्मारक परिसर में वनस्पति उन्मूलन, दीवारों, छत और छज्जों में लगे पत्थरों की रासायनिक सफाई, दीवारों पर बनी पेंटिंग की रासायनिक सफाई तथा जर्जर ईंट-पत्थरों के संरक्षण एवं पुनरुद्धार से संबंधित कार्य शामिल हैं।

पर्यटन मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के ये स्मारक केवल ऐतिहासिक इमारतें नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थापत्य कला के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। इन स्मारकों में प्रदेश के लंबे इतिहास, धार्मिक परंपराओं और स्थापत्य विरासत की झलक मिलती है। इसलिए इनका संरक्षण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण से आने वाली पीढ़ियों को अपनी गौरवशाली विरासत को समझने और देखने का अवसर मिलेगा। सरकार का उद्देश्य इन धरोहरों को उनकी मूल विशेषताओं के साथ सुरक्षित रखते हुए उन्हें पर्यटन की दृष्टि से भी अधिक उपयोगी बनाना है, ताकि प्रदेश में आने वाले पर्यटकों को उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जा सके।

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