राजनीतिक दबाव में शस्त्र लाइसेंस जारी करने का आरोप, महेन्द्र श्रीवास्तव ने खोला मोर्चा

राजनीतिक दबाव में शस्त्र लाइसेंस जारी करने का आरोप, महेन्द्र श्रीवास्तव ने खोला मोर्चा
बस्ती। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी सूचना का अधिकार विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्वांचल प्रभारी महेन्द्र श्रीवास्तव ने शस्त्र लाइसेंस जारी किए जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि राजनीतिक दबाव और प्रभाव में नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से शस्त्र लाइसेंस निर्गत किए जा रहे हैं। मामले को लेकर उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के तहत जिलाधिकारी बस्ती से विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी है।जिलाधिकारी को दिए गए आवेदन में कांग्रेस नेता महेन्द्र श्रीवास्तव ने वर्ष 2021 से अब तक जिले में जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों की कुल संख्या और वर्तमान समय में विचाराधीन शस्त्र लाइसेंस आवेदनों की जानकारी मांगी है। इसके अलावा उन्होंने ऐसे शस्त्र लाइसेंस धारकों की संख्या भी पूछी है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है और उनके वारिसों के पक्ष में शस्त्र लाइसेंस जारी किए जाने के कितने प्रकरण लंबित हैं।आरटीआई आवेदन में विभागीय जांच के दौरान अपात्र अथवा आपराधिक मामलों से जुड़े पाए गए लोगों के कितने शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए गए, इसकी भी जानकारी मांगी गई है। साथ ही यदि सरकार की ओर से नए शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर रोक लगाई गई है तो संबंधित आदेश की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
कांग्रेस नेता महेन्द्र श्रीवास्तव का कहना है कि शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन बेहद जरूरी है। उनका आरोप है कि यदि राजनीतिक प्रभाव के चलते पात्रता और निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार कर लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं तो यह गंभीर विषय है। इसी को लेकर उन्होंने आरटीआई के माध्यम से सरकारी रिकॉर्ड सामने लाने की पहल की है।उन्होंने प्रशासन से निर्धारित समयावधि में मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। श्रीवास्तव ने कहा कि आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में नियमों के पालन और पारदर्शिता की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।हालांकि, राजनीतिक दबाव में लाइसेंस जारी किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। आरटीआई से प्राप्त आधिकारिक अभिलेख सामने आने के बाद ही इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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