(नई दिल्ली)साइबर-फिजिकल सिस्टम बना रहे तकनीक आधारित भविष्य की नींव

(नई दिल्ली)साइबर-फिजिकल सिस्टम बना रहे तकनीक आधारित भविष्य की नींव
राष्ट्रीय मिशन के तहत देश में 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र स्थापित; 1,136 स्टार्टअप को मिला प्रोत्साहन, 2.46 लाख से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षण
नई दिल्ली, ,31 अगस्त ,(आरएनएस)। डिजिटल और भौतिक दुनिया के बीच तालमेल स्थापित करने वाली साइबर-फिजिकल सिस्टम (सीपीएस) तकनीक भारत के तकनीकी भविष्य को नई दिशा दे रही है। सेंसर, सॉफ्टवेयर और संचार नेटवर्क के माध्यम से सीपीएस मशीनों को अपने आसपास के वातावरण को समझने, सूचनाओं का विश्लेषण करने और परिस्थितियों के अनुसार तुरंत प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाता है। चालक रहित वाहन, स्मार्ट कारखाने, आधुनिक चिकित्सा उपकरण, स्मार्ट भवन और रोबोटिक उपकरण इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
भारत ‘इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशनÓ (एनएम-आईसीपीएस) के माध्यम से इस क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा लागू इस मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2018 में मंजूरी दी थी। इसके लिए नौ वर्षों में 3,660 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
अनुसंधान से उत्पाद विकास तक पर जोर
एनएम-आईसीपीएस अकादमिक संस्थानों, उद्योग, सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को एक साझा मंच पर लाकर वैज्ञानिक अनुसंधान को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और औद्योगिक जरूरतों से जोड़ता है। मिशन के तहत अनुसंधान एवं विकास, अनुवादात्मक अनुसंधान, उत्पाद विकास और स्टार्टअप के पोषण से लेकर प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण तक की पूरी प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मिशन के अंतर्गत देशभर में विश्वस्तरीय अंतर्विषयक उत्कृष्टता केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। ये केंद्र उन्नत अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, विशेषज्ञता निर्माण और नीतिगत सुझाव उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
देशभर में 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र
एनएम-आईसीपीएस के तहत सरकार ने प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र (टीआईएच) स्थापित किए हैं। ये केंद्र चार प्रमुख क्षेत्रों में काम कर रहे हैं—प्रौद्योगिकी विकास, मानव संसाधन एवं कौशल विकास, नवाचार एवं उद्यमिता तथा स्टार्टअप विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग।
ये केंद्र अनुसंधान को वास्तविक उत्पादों में बदलने, प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप को बढ़ावा देने और सरकारी मंत्रालयों के साथ मिलकर राष्ट्रीय चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान विकसित करने पर काम कर रहे हैं।
चार प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अनुसंधान पार्क स्थापित
प्रौद्योगिकियों को प्रयोगशाला से वास्तविक उपयोग और बाजार तक पहुंचाने के उद्देश्य से वर्ष 2025 में चार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्रों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अनुसंधान पार्क (टीटीआरपी) के रूप में चुना गया।
ये पार्क आईआईटी कानपुर, भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और आईआईटी इंदौर में स्थापित किए गए हैं। आईआईटी कानपुर का केंद्र साइबर सुरक्षा, भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु रोबोटिक्स एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद खनन प्रौद्योगिकी तथा आईआईटी इंदौर डिजिटल स्वास्थ्य देखभाल पर केंद्रित है।
1,146 प्रौद्योगिकियों को सक्षम बनाने में सफलता
अगस्त 2026 तक एनएम-आईसीपीएस के माध्यम से 1,146 प्रौद्योगिकियों को सक्षम बनाने तथा बौद्धिक संपदा निर्माण और लाइसेंसिंग में सहायता दी गई है। इसके अलावा कृषि, स्वास्थ्य देखभाल, खनन, साइबर सुरक्षा, उन्नत संचार और स्थिति निर्धारण जैसे क्षेत्रों में 1,329 प्रौद्योगिकी उत्पादों के विकास में योगदान दिया गया है।
मानव संसाधन और कौशल विकास को भी मिशन में प्रमुख स्थान दिया गया है। अब तक 5,824 फेलोशिप प्रदान की जा चुकी हैं, जिनका लाभ स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी और परास्नातक शोधार्थियों को मिला है। वहीं, 2.46 लाख से अधिक पेशेवरों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया है।
1,136 स्टार्टअप और स्पिन-ऑफ को मिला समर्थन
अनुसंधान आधारित नवाचार को व्यावसायिक उपयोग में बदलने के लिए मिशन ने 1,136 स्टार्टअप और स्पिन-ऑफ को इनक्यूबेट किया है। इनके माध्यम से 24,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मिशन के तहत अब तक 200 अंतरराष्ट्रीय सहयोग स्थापित किए गए हैं, जिससे साइबर-फिजिकल सिस्टम के क्षेत्र में भारत की वैश्विक भागीदारी मजबूत हुई है।
स्वास्थ्य से खनन तक तकनीक का इस्तेमाल
एनएम-आईसीपीएस के तहत विकसित तकनीकों का इस्तेमाल अब वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान में किया जा रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल ट्विन
आईआईटी इंदौर के दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन ने ‘चरकडीटीÓ विकसित किया है। यह मानव शरीर का डिजिटल ट्विन है, जिसके माध्यम से फेफड़ों, आंखों और हृदय की कार्यप्रणाली का अनुकरण कर बीमारी के विकास को समझने और उपचार की संभावनाओं का आभासी परीक्षण करने में सहायता मिलती है।
डिजिटल ट्विन किसी वास्तविक वस्तु, प्रक्रिया या प्रणाली की आभासी प्रतिकृति होती है। यह स्मार्ट सेंसर से प्राप्त वास्तविक समय के आंकड़ों के आधार पर वास्तविक प्रणाली के व्यवहार का अध्ययन करने में मदद करती है।
कृषि में स्मार्ट निगरानी
आईआईटी बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने कृषि इंटरनेट ऑफ थिंग्स फार्म प्रबंधन प्रणाली विकसित की है। यह मिट्टी, मौसम और सूक्ष्म जलवायु की स्थितियों की निगरानी कर किसानों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता करती है। इससे पानी और उर्वरक के अधिक प्रभावी इस्तेमाल के साथ कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
खनन क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग
खनन जैसे जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में भी सीपीएस तकनीक सुरक्षा बढ़ाने में मदद कर रही है। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के टेक्समिन केंद्र ने ऐसे ड्रोन विकसित किए हैं जो 50 किलोमीटर तक आंकड़े भेज सकते हैं। इससे खतरनाक क्षेत्रों में मानव प्रवेश की आवश्यकता कम होती है और वास्तविक समय में निगरानी संभव होती है।
उन्नत संचार में स्वदेशी तकनीक
आईआईआईटी बेंगलुरु में विकसित 5जी-एडवांस्ड ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क मैसिव एमआईएमओ रेडियो यूनिट स्वदेशी संचार तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह तेज, भरोसेमंद और किफायती 5जी कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में सक्षम है तथा दूरदराज के क्षेत्रों में उन्नत संचार ढांचा पहुंचाने में उपयोगी हो सकती है।
साइबर सुरक्षा को मजबूती
आईआईटी कानपुर का आईहब एनटीआईएचएसी फाउंडेशन महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और साइबर-फिजिकल सिस्टम की सुरक्षा के लिए समाधान विकसित कर रहा है। इसका सूचना प्रौद्योगिकी-परिचालन प्रौद्योगिकी सुरक्षा संचालन केंद्र लगातार दोनों प्रकार के वातावरण की निगरानी करता है। केंद्र ने क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों की जांच में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सहायता के लिए क्रिप्टो-फोरेंसिक उपकरण भी विकसित किए हैं।
स्वायत्त वाहनों और रोबोटिक्स को बढ़ावा
आईआईटी हैदराबाद के तिहान फाउंडेशन ने स्वायत्त नेविगेशन के लिए भारत का एक विशेष परीक्षण स्थल विकसित किया है। यहां जमीन और हवा में चलने वाले स्वायत्त वाहनों की वास्तविक परिस्थितियों में इस्तेमाल से पहले जांच की जा सकती है।
भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु में रोबोटिक्स और स्वायत्त प्रणालियों के लिए स्थापित आई-हब इंटेलिजेंट मोबिलिटी समाधान विकसित कर रहा है। इसका आईआरएएसटीई अनुप्रयोग दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर चालकों को वास्तविक समय में चेतावनी देता है। इसका परीक्षण फिलहाल नागपुर में किया जा रहा है और भविष्य में इसे अन्य शहरों तक विस्तार देने की योजना है।
आत्मनिर्भर विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
साइबर-फिजिकल सिस्टम स्वास्थ्य, कृषि, खनन, संचार, साइबर सुरक्षा और परिवहन जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा कर रहे हैं। एनएम-आईसीपीएस के माध्यम से भारत वैज्ञानिक अनुसंधान को राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए स्वदेशी तकनीकी समाधान तैयार कर रहा है।
मिशन के प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अनुसंधान पार्क अनुसंधान से लेकर परीक्षण, उपयोग और व्यावसायीकरण तक की प्रक्रिया को गति दे रहे हैं। इसके साथ ही स्टार्टअप, कुशल मानव संसाधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का बढ़ता नेटवर्क भारत की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।
स्वदेशी साइबर-फिजिकल सिस्टम के व्यापक इस्तेमाल से स्मार्ट बुनियादी ढांचे, बेहतर सार्वजनिक सेवाओं, सुरक्षित और अधिक कुशल प्रणालियों तथा नए आर्थिक अवसरों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इस तरह एनएम-आईसीपीएस तकनीक आधारित, नवाचार प्रेरित और आत्मनिर्भर ‘विकसित भारतÓ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहा है।
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