(कुशीनगर) अज्ञात कंटेनर के चपेट में आने सब इंस्पेक्टर की मौत

(कुशीनगर) अज्ञात कंटेनर के चपेट में आने सब इंस्पेक्टर की मौत
—- आधी सड़क पर गिट्टी-बालू, संकरे रास्ते ने ली सब इंस्पेक्टर की जान।
—- भारी वाहनों के मार्ग पर निर्माण सामग्री रखने की अनुमति पर उठे सवाल।
कुशीनगर, 07 सितम्बर (आरएनएस)। जनपद के रविंद्रनगर थाना क्षेत्र के सरस्वती चौक बाईपास मार्ग पर सोमवार को हुए भीषण सड़क हादसे में सेवरही थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर भवानी प्रसाद पांडेय की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वह मूल रूप से बस्ती जनपद के निवासी बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार सब इंस्पेक्टर भवानी प्रसाद पांडेय अपनी हीरो स्प्लेंडर बाइक यूपी 51 ए.क्यू. 1669 से जा रहे थे। इसी दौरान एक अज्ञात कंटेनर ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी होते ही पुलिस विभाग में कोहराम मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार हादसे के समय सड़क के करीब आधे हिस्से में गिट्टी और बालू रखी गई है। मकान निर्माण के लिए सड़क पर निर्माण सामग्री रखे जाने से वाहनों के आवागमन के लिए काफी कम जगह बची थी। ऐसे में इस संकरे रास्ते से भारी वाहनों की आवाजाही हादसे का खतरा बढ़ा रही है। सरस्वती चौक बाईपास का यह मार्ग बिहार, कुबेरस्थान और तुर्कपट्टी की ओर जाने वाले भारी वाहनों के आवागमन का प्रमुख रास्ता है। इसके बावजूद सड़क के बड़े हिस्से पर निर्माण सामग्री रखे जाने से यातायात प्रभावित हो रहा है। हादसे के बाद यह सवाल गंभीर हो गया है कि आखिर व्यस्त मार्ग पर निर्माण सामग्री रखकर यातायात बाधित करने की अनुमति किस स्तर से मिली और इसकी निगरानी किसकी जिम्मेदारी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सब इंस्पेक्टर किसी ड्यूटी से वापस लौट रहे थे, हालांकि वह किस ड्यूटी से लौट रहे थे, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
घटना की सूचना मिलते ही रविंद्रनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। पुलिस अज्ञात कंटेनर और उसके चालक की तलाश में जुटी है। हादसे के बाद लोग सबसे बड़ा सवाल उठा रहे है कि क्या किसी की जान जाने का इंतजार किया जा रहा था? व्यस्त मार्ग की आधी सड़क पर निर्माण सामग्री रखे जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस ओर क्यों नहीं गई?।

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