(नई दिल्ली)समय-सीमा तय करेंÓ, टीएमसी के नाम-चुनाव चिन्ह पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से पूछा- कब सुलझेगा मामला?

(नई दिल्ली)समय-सीमा तय करेंÓ, टीएमसी के नाम-चुनाव चिन्ह पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से पूछा- कब सुलझेगा मामला?
नई दिल्ली ,25  सितंबर ,(आरएनएस)। तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जल्द फैसला लेने को कहा है। ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा कि दोनों गुटों के बीच चल रहे विवाद का अंतिम निपटारा कब तक किया जा सकता है। आयोग को सोमवार तक इसकी समयसीमा बताने को कहा गया है।
दो गुटों के बीच फंसा पार्टी का नाम और चिन्ह
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी कर दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेसÓ नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल और घासÓ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया था। आयोग ने कहा था कि पार्टी के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं और मामले पर अंतिम फैसला चुनाव चिन्ह संबंधी नियमों के तहत किया जाना बाकी है।
इसके बाद आगामी उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए गए।
? ममता बनर्जी गुट: ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेसÓ — फुटबॉल खिलाड़ी
? अरूप रॉय गुट: ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेसÓ — लिफाफा
सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना विवाद का भी दिया हवाला
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों गुटों के बीच विवाद को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने इससे पहले हुए शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह विवाद का भी संदर्भ दिया और चुनाव आयोग से मामले को जल्द निपटाने की समयसीमा बताने को कहा।
ममता बनर्जी ने ईसी के फैसले को दी चुनौती
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी याचिका में मूल पार्टी के नाम और ‘फूल और घासÓ चुनाव चिन्ह पर रोक लगाने के फैसले का विरोध किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई थी।
उपचुनाव से पहले बढ़ा विवाद
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद दोनों गुटों के लिए महत्वपूर्ण है। फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से दिए गए नए नाम और चिन्ह अंतरिम व्यवस्था के तहत आगामी उपचुनावों के लिए हैं; मूल नाम और चिन्ह पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
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