हम लड़कियां हैं

हम लड़कियां हैं

 

कविता बिष्ट

जौना स्टेट, उत्तराखंड

 

हमें कमजोर समझने की भूल मत करना,

हमारे हौसलों को कम आंकने की भूल मत करना।

हम ख़ामोश हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं,

कि हमारे भीतर कोई आवाज़ नहीं।

 

हम आँधियों में भी चलना जानती हैं,

गिरकर फिर संभलना जानती हैं।

मुश्किलें चाहे कितनी भी राह में आए,

हम अपने सपनों से मुंह नहीं मोड़तीं।

 

हमें दया नहीं, अपने हुनर की पहचान चाहिए,

हमारे सपनों को भी खुला आसमान चाहिए।

हम लड़कियां हैं, हममें भी उड़ान भरने का दम है,

अपनी मेहनत से पहचान बनाएँ, यही हमारा संकल्प है।

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