गुड़िया की शादी

गुड़िया की शादी

 

हिमानी

मैगड़ी स्टेट, उत्तराखंड

 

गुड़िया से खेलने की उम्र थी अभी,

कि खुद गुड़िया बनाकर विदा कर दी गई।

जिस उम्र में किताबों से दोस्ती करनी थी,

उसी उम्र में शादी के बंधन में बांध दी गई।

 

बस्ता रह गया पीछे, छूट गई पढ़ाई,

जिस उम्र में साइकिल चलानी थी, डोली में बिठाई।

मंडप छोटा था, सपने उससे भी छोटे,

उम्र थी नन्ही-सी, फैसले बहुत बड़े।

 

जिसे चाँद-सितारे गिनने थे रात भर,

उस पर डाल दिया गया गृहस्थी का बोझ।

जो खुद अभी दुनिया को समझ रही है,

उसे माँ बनने की जिम्मेदारी सौंप दी गई।

 

यह कैसी रीत है, जो लड़की का बचपन छीन लेती है?

उससे पढ़ने और जीने का अधिकार छीन लेती है।

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