मतदाता जागरूकता अभियान की औपचारिकता से बाहर आयें जौनपुर के “”युवा मतदाता””——अखिलेश्वर शुक्ला

विश्व में भारत को एक युवा देश के रूप में जाना जाता है। जिस देश की आधी आबादी लगभग 25 वर्ष आयु प्राप्त युवाओं की है। यदि 35 वर्ष आयु वर्ग को देखें तो यह अनुपात 65% हो जाता है। फिर इतने शक्तिशाली देश के वासी अभावग्रस्त रहें, पराश्रई हों, बेरोजगारी-भुखमरी के शिकार रहें- इसका कारण आसानी से समझा जा सकता है। फिर क्या कारण है- भारत के नौजवान मतदाता केवल विचार हीं नहीं, वरन लोकतंत्र के पर्व मतदान में बढ़-चढ कर भाग लें। साथहीं ऐसे मतदाताओं को भी बुथ तक पहुंचाने में मदद करें-जो आसानी से बुथ तक नहीं पहुंचने की स्थिति में होते हैं। ‌विगत काफी समय से भारतीय निर्वाचन आयोग के आवाहन पर–“”मतदाता जागरूकता अभियान, रैली,शपथ, कार्यक्रम” जोर-शोर से आयोजित किए जाते रहे हैं। अब वह समय आ गया है,जब परिणाम सामने आए और अधिक से अधिक मतदान हो। ‌वास्तव में भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भी है। लोकतंत्र की सफलता का आधार चुनाव में होने वाला मतदान ही है। लोकतंत्र की सफलता के लिए ही शिक्षण संस्थाओं, सामाजिक संस्थाओं, बच्चों से लेकर महिलाओं तक ने अपार भीड़ एवं उत्साह के साथ सड़कों पर उतर कर जो जागरूकता अभियान चलाया है। वह केवल औपचारिकता न रह जाए बल्कि हकीकत में दिखाई दे। अधिक से अधिक मतदाता बुथ तक पहुचें। भारतीय संविधान में “स्वतंत्रता एवं समानता””जैसे मूल्य की प्राप्ति के लिए केवल मतदान ही नहीं वरन एक योग्य, कर्मठ एवं ईमानदार ब्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व प्राप्त हो-इसके लिए “”जाति-धर्म””सहित संकुचित विचारों को त्याग कर राष्ट्रीय हितों का विशेष ध्यान रखना होगा। तब जाकर “मतदाता जागरूकता अभियान” सार्थक सिद्ध हो सकेगा।

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