सैन्य अफसर बनने के लिए एसएसबी का महत्व, सॉर्ट कैप्सूल या लगातार तैयारी : ब्रिगेडियर यशपाल सिंह

ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय

लखनऊ। जी एस एम डिफेंस एकेडमी के मैनेजिंग डायरेक्टर ब्रिगेडियर यशपाल सिंह ने कहा कि बच्चों की पर्सनैलिटी पर अभिभावक एवं शिक्षण संस्थान प्रारंभ से ध्यान दें, बच्चों की पर्सनैलिटी डिवेलप करने में कई साल लगते हैं। कई वर्षों की मेहनत के बाद पर्सनैलिटी डिवेलप हो पाती है जबकि लिखित परीक्षा मात्र 6 महीने से 2 साल के अंदर तैयारी की जा सकती है। अमूमन ऐसा देखा गया है कि बच्चे लिखित परीक्षा के लिए लगभग 2 साल देते हैं लेकिन पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और एसएसबी की तैयारी के लिए अधिकतम 15 दिन देते हैं। शिक्षण संस्थानों की ओर संकेत करते हुए कहा उन्होंने कहा कि कर्तव्य बोध के साथ बच्चों की पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर ध्यान शिक्षक एवं अभिभावक दें। बच्चे अपने माता-पिता और शिक्षकों से ही ज्यादा सीखते हैं इन्हीं के अधिकतर करीब रहते हैं इसलिए बाल्यकाल में पड़े हुए संस्कार अमिट होते हैं। झूठ बोलना भी बच्चा घर से ही सीखता है सबसे बड़ी कमी यही होती है।साइकोलॉजी के शिक्षक झूठ को पकड़ लेते हैं और बच्चे फेल हो जाते हैं।उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बच्चे कहते हैं मैं सुबह 5:00 बजे उठ जाता हूं लेकिन अमूमन ऐसा होता नहीं है।बच्चे का हाव-भाव ही बता देता है कि वह सही बोला या झूठ इसलिए लिखित परीक्षा से ज्यादा पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर जोर देना चाहिए। उन्होंने युवाओं को सलाह देते हुए कहा कि युवा वर्ग अन्य गतिविधियों में अधिक समय लगाते हैं जबकि पढ़ाई पर कम। सपने देखना और इच्छाशक्ति होना दोनों अलग-अलग है। निश्चित रूप से अगर सेना में जाना चाहते हैं तो प्रतिदिन न्यूजपेपर पढ़ें, जी के की तैयारी करें।सेना के बारे में जाने, लिखित परीक्षा और एसएसबी, फिजिकल की एक साथ तैयारी करें। गेम खेलें, फिजिकली फिट हो, किताबें पढ़ें और अपनी हॉबीज बनाएं। जितना मौका मिले पब्लिक फोरम में बातचीत करें,अपनी पब्लिक स्पीकिंग को सुधारें। बोलने , लिखने की क्षमता में हर वक्त सुधार लाएं।

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