परिवहन निगम इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी में

सिटी बस की तर्ज पर परिवहन निगम भी अपने बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करेगा। बसों को फिलहाल दो सौ किलोमीटर के दायरे में चलाने की तैयारी है। इनके संचालन की तैयारियों के लिए रोडवेज के एक अफसर पुणे भेजे गए हैं, जहां इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को लेकर सर्वे कर वे रिपोर्ट तैयार करेंगे।

परिवहन निगम के अफसर बताते हैं कि पुणे में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा सबसे बड़ा है और वहां सधे हुए ढंग से बसों का संचालन किया जाता है। ऐसे में रोडवेज प्रशासन वहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उस मॉडल को लखनऊ में भी लागू करना चाहता है। इस काम के लिए प्रधान प्रबंधक (प्राविधिक) अजीत सिंह को पुणे भेजा गया है। उन्होंने बताया कि वे वहां इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को लेकर आने वाली चुनौतियों के बाबत रिपोर्ट तैयार करेंगे। उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम के बेड़े में 12 हजार के आसपास बसें हैं, जो डीजल से चलती हैं। रोडवेज प्रशासन सिटी बसों की तर्ज पर इलेक्ट्रिक बसें भी चलाना चाह रहा है। इससे डीजल पर प्रतिवर्ष खर्च होने वाले करोड़ों रुपये की बचत होगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जा सकेगा।

पांच शहर इलेक्ट्रिक बसों से जुड़ेंगे
इलेक्ट्रिक बसों को एक बार चार्ज करने पर दो सौ किलोमीटर तक चलाया जा सकता है। ऐसे में अधिकारी पहले चरण में इलेक्ट्रिक बसों को इस रेंज में चलाने की तैयारी कर रहे हैं। इसमें सीतापुर, अयोध्या, लखीमपुर, हरदोई, कानपुर शामिल हैं। इतना ही नहीं साधारण बसों से इनका किराया भी कम हो सकता है।
इन चुनौतियों का करना होगा सामना
अफसरों के अनुसार अंतरजनपदीय इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इसमें चार्जिंग प्वॉइंट एक बड़ी समस्या है। एक चार्जिंग प्वॉइंट पर 1500 केवी का कनेक्शन लेना होगा, जिसके लिए ढाई करोड़ रुपये तक खर्च होंगे। वहीं इलेक्ट्रिक बसें भी महंगी हैं। एक बस 85 लाख की है। ऐसे में 40 बसों के एक डिपो पर करीब 34 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।

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