*विनोबा सेवा आश्रम बरतारा उत्तरप्रदेश से प्रारंभ पवनार आश्रम वर्धा महाराष्ट्र की एक पखवाड़ा की स्वाध्याय यात्रा वाया राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एवं अहमदाबाद भावनगर होती हुई 25 जुलाई को पवनार पहुंचकर वापस शाहजहांपुर विनोबा आश्रम में 02 अगस्त को विराम लेगी।
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ। विनोबा विचार प्रवाह के सूत्रधार रमेश भइया आज 9 बजे शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से अवध आसाम ट्रेन जो डिब्रूगढ़ से सर्वाधिक दूरी चलकर जैसे ही रुकी । मोहित कुमार जी ने डिब्बे में चढ़कर सामान सीट पर रख दिया और विमला बहन जो आज ट्रेन पर विदा करने आई थीं,ने पानी की बोतल पड़ोस से लेकर पकड़ा दी। पुरानी दिल्ली स्टेशन पहुंचने पर दिल्ली विश्विद्यालय के प्रोफेसर दिनेश कुमार और डा भारती देवी दंपति मिलेंगे (क्योंकि रमेश भइया जो विनोबा विचार कांचन मुक्ति का गत 28 वर्ष से निर्वाह कर रहे हैं अर्थात पैसे का स्पर्श नहीं कर रहे हैं ) जो शाम को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर विनोबा विचार प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक संजय भाई के साथ कल सुबह गुजरात अहमदाबाद साबरमती स्टेशन पर विनय त्रिवेदी एवं प्रिया मौर्य (दोनों गांधी विनोबा विचार के लिए समर्पित) रिसीव करेंगें। कल 18 (जिसका योग 9) अगस्त से 22 अगस्त (जो बाबा की शुभ संख्या 11 का गुणांक)तक पांच दिन तक जयेश भाई ने अपने अमर भाई शाह जैसे तमाम मित्रों के सहयोग द्वारा गुजरात में हरिजन बच्चों के लिए गांधी जी और परीक्षित भाई ,ईश्वर भाई जी के समय पर बने छात्रावासों का जो सुंदर कायाकल्प किया गया है।उनकी तपस्या का अवलोकन करते हुए भावनगर में ठक्करवापा जी की शैशव भूमि के दर्शन कर ,लोकभारती विश्विद्यालय जो पूर्ण रूप से गांधी विचार को समर्पित है।आजकल उसके कुलपति डा राजेंद्र खिमाणी जी हैं। वहां चल रहे प्रयोगों का दर्शन श्री जयेश भाई पटेल जी के साथ करते हुए पूज्य मोरारी बापू के महुआ तडगाजड़गा चित्रकूट धाम आश्रम में बापू को भी प्रणाम करेंगें। यह पावन यात्रा गुजरात के लगभग 11 जिलों को स्पर्श करेगी। 25 जुलाई को यात्रा विनोबा जी के आश्रम पवनार पहुंचेगी। जहां पर स्वाध्याय को लेकर एक विशेष प्रयोग ब्रह्मविद्या मंदिर की दीदी लोगों द्वारा संभव है। परमधाम आश्रम पवनार जिस नदी के तट पर बाबा का आश्रम है उस धाम नदी के प्रवाह के दर्शन गुजरात की हेमा बहन ने आज कराए। आदरणीय ज्योत्सना दीदी और शीतल बहन ने धाम नदी के प्रवाह के विराट स्वर को सुनाया। साबरमती के तट पर बसा गांधीजी का आश्रम और धाम नदी के तट पर पवनार में स्थापित बाबा विनोबा जी का आश्रम है। जो देश दुनिया में ब्रह्म विद्या मंदिर (बहनों के लिए मजदूरी के क्षेत्र में ब्रह्मविद्या के अदभुत प्रयोग का सुंदर आश्रम जिसकी स्थापना विनोबा जी ने वर्ष 1959 में की थी) यहां पर अभी तीन दहाई से ज्यादा समर्पित ब्रह्मचारिणी बहनें संपूर्ण देश और दुनिया के कई देशों की निवास करती हैं) स्वाबलंबन का ऐसा आश्रम दुनिया में शायद ही दूसरा कोई हो। अपने हांथ से खेती वहां की जो ऋषि खेती के नाम से जानी जाती है। वहां से एक अद्भुत ज्ञान देने वाली *मैत्री* मासिक पत्रिका बाबा के समय से अनवरत प्रकाशित होती है। जिसका लागत मूल्य 250 रुपए वार्षिक है। जिसका पाठक गांव के किसान से लेकर देश का माननीय राष्ट्रपति तक है। 65 वर्ष से गोबर गैस का प्रयोग भी अत्यंत अदभुत है।अभी तक रसोई गैस आश्रम में नहीं पहुंची। प्रति वर्ष नवंबर में मित्र मिलन आयोजित किया जाता है।जिसमें देश दुनिया के लोग भाग लेकर वर्तमान मुद्दों पर चर्चा करके हल सुझाते हैं। स्वाध्याय यात्रा वापस शाहजहांपुर आश्रम में 02 अगस्त को विराम लेगी।

