14 अगस्त- श्रीरामचरितमानसकी भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
बिनु घन निर्मल सोह अकासा ।
हरिजन इन परिहरि सब आसा ।
कहुँ कहुँ बृष्टि सारदी थोरी ।
कोउ एक पाव भगति जिमि मोरी
( किष्किंधाकांड 15/5)
राम राम 🙏🙏
श्री राम जी वर्षा ऋतु में प्रवर्षण पर्वत पर निवास कर रहें हैं। वर्षा ऋतु का वर्णन करते हुए वे श्री लक्ष्मण जी से कहते हैं कि बिना बादलों का निर्मल आकाश ऐसे शोभित हो रहा है जैसे भक्त सभी सांसारिक आशाओं को छोड़कर शोभित होते हैं। कहीं कहीं शरद ऋतु की थोड़ी थोड़ी वर्षा हो रही है जैसे कोई विरले ही मेरी भक्ति पाते हैं ।
हम सभी कामना युक्त हैं इसलिए मलिन है परंतु जब हम आप श्री राम जी की भक्ति से युक्त हो जाएँगे तब हम निर्मल हो जाएँगे और निर्मल होने पर स्वतः शोभित हो जाएँगे। अस्तु शोभित होने हेतु श्री सीताराम नाम जप निरन्तर होना चाहिए। अथ….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

