सेहत के लिए वरदान मोटे अनाज-उप परियोजना निदेशक ’आत्मा’डा0 रमेश चंद्र यादव
जौनपुर 15 सितम्बर, 2025 (सू0वि0)- कृषि विभाग द्वारा विकास खण्ड खुटहन स्थित बीआरसी सभागार में उत्तर प्रदेश श्री अन्न (मिलेट्स) पुनरुद्धार योजना अंतर्गत ब्लॉक स्तरीय स्कूल अध्यापकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें श्री अन्न (मिलेट्स) के महत्व एवं उपयोगिता से अध्यापकों को प्रशिक्षित किया गया।
प्रशिक्षक उप परियोजना निदेशक ’आत्मा’ डा0 रमेश चंद्र यादव ने अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि कुपोषण की मुश्किल चुनौती जो एक बड़ी आबादी को घेरे हुए हैं उससे छुटकारा पाने के लिए सबसे कारगर तरीका है मिलेट्स का सेवन। कभी हमारे जीवन में आहार का महत्वपूर्ण अंग होने वाले मोटे अनाज आज हमारे जीवन आधार से काफी दूर हो चुके हैं। हरित क्रांति से पहले यही मोटे अनाज हमारी जीवनशैली में शामिल थे, हमारे पुरखों की लंबी उम्र और सेहत का असली राज मोटे अनाज हुआ करते थे, जो उन्हें सर्दी, गर्मी और बरसात से बेपरवाह रखते थे। पौष्टिकता से भरपूर इन अनाजों को कम लागत पर उत्पादन किया जा सकता है। महंगाई के दौर में मोटे अनाज गरीबों की पौष्टिक भोजन की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं। मोटे अनाज अधिक रेशेदार होने की वजह से आंतों में रुकता नहीं है व कब्ज से बचाता है। माताएं अपने शिशु को भी पुराने समय में ज्वार व मक्के के आटे का घोल पिलाती थीं जो उनके लिए सुपोषक होता था। आजादी के बाद बाजारीकरण के कारण आम जनता का मोटे अनाजों की तरफ से मोहभंग हो गया। इस दौरान एक फसली खेती को बढ़ावा मिला उसमें धान एवं गेहूं की केंद्रीय भूमिका हो गई नतीजा कृषि योग्य भूमि से मोटे अनाजों की पैदावार उत्तरोत्तर कम हो गई। देहाती भोजन समझकर जिस मोटे अनाज जई, बाजरा, ज्वार, जौ, सावा, कोदो, रागी को रसोई से बाहर कर दिया गया था आज उसी अनाज को डॉक्टरों एवं वैज्ञानिकों द्वारा प्रमाणित किए जाने के बाद बड़ी-बड़ी कंपनियां इन अनाजों के पैकेट बाजार में उतार रही है जो अब हर वर्ग शौक से खरीदता है अगर आज की मानव पोषण की जरूरतों को समझा जाए तो मोटा अनाज हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि अध्यापक अपने विद्यालय के छात्र-छात्राओं को श्री अन्न की उपयोगिता से जागरूक करें ताकि उनके परिजन श्री अन्न की खेती करें, श्री अन्न को एमडीएम में भी शामिल किया जाएगा जिससे जनपद में मिलेट्स के उत्पादन को बल मिलेगा, मानव स्वास्थ्य बेहतर होगा तथा किसानों की आमदनी बढ़ेगी। मोटे अनाज की उपयोगिता को देखते हुए सरकार ने श्री अन्न योजना का नाम दिया है।
कृषि वैज्ञानिक डा. राजीव सिंह ने कहा कि दूसरे अनाजों की तरह श्री अन्न खीर, खिचड़ी, मिठाई, इडली, विस्कुट, स्नैक्स, चिक्की आदि रूपों में खाया जा सकता है, मिलेट्स कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षक संघ के राजकुमार यादव तथा संचालन एडीओ एजी. विकास सिंह ने किया। इस मौके पर 50 शिक्षक एवं शिक्षिकाएं बेसिक शिक्षा विभाग से मौजूद रहे।

