श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

2 अक्तूबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

सुनहु राम अब कहउँ निकेता ।
जहाँ बसहु सिय लखन समेता ।।
जिन्ह के श्रवन समुद्र समाना ।
कथा तुम्हारि सुभग सरि नाना ।।
भरहिं निरंतर होहिं न पूरे ।
तिन्ह के हिय तुम्ह कहुँ गृह रूरे।।
( अयोध्याकाण्ड 127/2-3)
राम राम🙏🙏
वन जाते हुए श्री राम जी महर्षि बाल्मीकि आश्रम पहुँचे हैं, वे श्री बाल्मीकि जी से अपने रहने का स्थान पूछते हैं । महर्षि बाल्मीकि जी कहते हैं कि जिनके कान सागर की भाँति आपकी सुंदर कथारूपी अनेकों सुंदर नदियों से निरंतर भरते रहते हैं परंतु कभी तृप्त नहीं होते हैं , उनके हृदय आपके लिए सुंदर घर हैं ।
हमारे आपके कान तो सदा अपनी ही कथा सुनने को लालायित रहते हैं ,अतृप्त रहते हैं, फिर श्री राम कथा सुनने के लिए अवसर कहाँ ? श्री राम जी का संग चाहते हैं तो अपनी छोड़ श्री राम जी की कथा सुनने की आदत डालें । अस्तु….. श्री राम जय राम जय जय राम,
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

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