आपदा का कहर

आपदा का कहर नामक कविता की लेखिका देश की बेटी का संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है
ललिता परिहार

कक्षा – 8 वीं

जखेड़ा, गरुड़

बागेश्वर
जब से आई है आपदा,

तब से हरियाली सो गई।

पेड़ों से पूछो क्या हाल हो गया?

पेड़ों को बहा ले गई नदियाँ,

सब कुछ अपने साथ ले चली।

न पेड़ बचे, न चिड़ियाँ रहीं,

न कहीं उनकी आवाज़ गूँजी।

रोते-रोते बोली धरती,

ये कैसी आपदा है आई?

पेड़ों के साथ मुझे भी बहा ले गई।

पेड़ों से मिलती थी ऑक्सीजन,

अब वह भी घटती जाती है।

नदियों के आगे क्या,

नदियों के पीछे क्या,

सबको अपने साथ ले जाती है।

बाढ़ आए, मेरा घर टूटा,

जीवन छोटा हो गया।

आपदा के इस कहर में
पूरा गाँव ही बह गया।
मदद की आस लिए पूरा गाँव बस देखता ही रह गया।
देखता ही रह गया…..।

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