(इस्लामाबाद)शहबाज शरीफ की सिंधु जल संधि पर भारत को नई धमकी, कहा-पानी हमारी लक्ष्मण रेखा
इस्लामाबाद,14 अगस्त। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने को लेकर पाकिस्तान फिर से तिलमिला उठा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम में भारत को चेतावनी देते हुए कहा कि निलंबित समझौते के तहत इस्लामाबाद के जल अधिकारों को प्रभावित करने वाले किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि पाकिस्तान के पानी की हर बूंद उनके लिए अंतिम सीमा है।
शाहबाज ने खुद को शांति दूत बताते हुए कहा कि उनकी शांति की इच्छा को कमजोरी न समझे और संप्रभुता को चुनौती मिलने पर वह करारा जवाब देगा।
उन्होंने कहा, मैं स्पष्ट शब्दों में घोषणा करता हूं कि पाकिस्तान के पानी की एक-एक बूंद हमारी अंतिम सीमा (रेड लाइन) है। अगर भारत होश में नहीं आया, तो उसे इसका सीधा जवाब दिया जाएगा। भारत ने संधि को अवैध रूप से निलंबित कर खुद को शांति का दुश्मन साबित किया है।
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद दंडात्मक कदम के रूप में इस संधि को निलंबित कर दिया था।
इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी और भारत ने इसके लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया था।
इस निलंबन के बाद भारत ने तीनों प्रमुख नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) के जल स्तर का डाटा पाकिस्तान के साथ साझा करना पूरी तरह बंद कर दिया है।
मानसून में भारत द्वारा जारी किए जाने वाली पूर्व चेतावनी डाटा से पाकिस्तान को पंजाब और सिंध प्रांतों के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर भेजने में मदद मिलती थी।
डाटा न मिलने के कारण पाकिस्तान में बाढ़ का खतरा काफी बढ़ गया है।
यही वजह है कि पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठा रहा है और दावा कर रहा है कि यह संधि कानूनी रूप से अभी भी लागू है।
पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान के बीच 19 सितंबर, 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता से सिंधु जल संधि हुई थी।
इसके तहत सिंधु घाटी में बहने वाली तीन पूर्वी नदियों (रवि, सतलज, व्यास) पर भारत का, जबकि तीन पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) पर पाकिस्तान का अधिकार है।
नदियां भारत से होकर बहती हैं, इसलिए पश्चिमी नदियों के 20 प्रतिशत पानी का इस्तेमाल भारत सिंचाई और अन्य सीमित कार्यों के लिए कर सकता है।
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(बीजिंग)चीन की ट्रेन ने 5 सेकंड में पकड़ी 800 किमी/घंटा की रफ्तार, बनाया नया विश्व रिकॉर्ड
बीजिंग,14 अगस्त। चीन में एक प्रयोगात्मक मैग्लेव ट्रेन ने अपनी रफ्तार बढ़ाने का नया रिकॉर्ड बनाया है। हुबेई प्रांत की डोंगफू प्रयोगशाला में हुए परीक्षण के दौरान करीब 1.1 टन वजन वाली ट्रेन ने सिर्फ 5.3 सेकंड में शून्य से 800 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पकड़ ली। यह परीक्षण करीब एक किलोमीटर लंबे ट्रैक पर किया गया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह उपलब्धि भविष्य में बेहद तेज परिवहन तकनीक विकसित करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।
मैग्लेव ट्रेनें चुंबकीय शक्ति का इस्तेमाल करके ट्रैक से थोड़ी ऊपर उठती हैं। इससे ट्रेन और ट्रैक के बीच सीधा घर्षण लगभग खत्म हो जाता है।
इसके बाद ट्रैक के आसपास लगी कॉइल से बनने वाली चुंबकीय तरंगें ट्रेन को आगे बढ़ाती हैं। चीन के परीक्षण में ट्रेन ने 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल करने के बाद नियंत्रित तरीके से ब्रेक लगाया।
करीब 200 मीटर की दूरी में ट्रेन धीरे-धीरे रुक गई और सिस्टम ने कामयाबी दिखाई।
यह पिछले छह महीनों में तीसरी बार है जब इसी प्रयोगात्मक ट्रेन ने कम दूरी के मैग्लेव परीक्षण में अपना रिकॉर्ड सुधारा है।
जून, 2025 में ट्रेन ने करीब सात सेकंड में 650 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की थी। इसके बाद अलग-अलग परीक्षणों में गति बढ़ाकर करीब 700 और फिर 798 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचाई गई।
वैज्ञानिकों ने ऊर्जा आपूर्ति, चुंबकीय गति, तेज लेविटेशन नियंत्रण और आपातकालीन ब्रेकिंग जैसी तकनीकों को भी परखा।
चीन और जापान में चलने वाली मौजूदा मैग्लेव ट्रेनें करीब 320 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलती हैं, जबकि चीन की फक्सिंग मैग्लेव ट्रेन करीब 350 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचती है।
हालांकि, नया प्रयोग अभी यात्रियों के लिए नहीं है। वैज्ञानिक भविष्य में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल रॉकेट और लड़ाकू विमानों के लॉन्च सिस्टम में करने की संभावना देख रहे हैं।
कम दबाव वाली ट्यूब, सुरक्षा, महंगा ढांचा और लंबी दूरी के सटीक ट्रैक बड़ी चुनौतियां हैं।
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(वाशिंगटन)अमेरिका का आरोप, भारत समेत 40 देशों ने चीन को टैरिफ से बचने में मदद की
वाशिंगटन,14 अगस्त। अमेरिका ने गुरुवार को भारत समेत 40 देशों को एक अदृश्य माल ढुलाई नेटवर्क का हिस्सा बताते हुए चीन की मदद करने का आरोप लगाया है। यह खुलासा द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम नामक रिपोर्ट में हुआ है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने जारी किया है। रिपोर्ट में बताया गया कि इन देशों ने कम अमेरिकी आयात शुल्क वाले देशों के जरिए निर्यात करके चीन को अमेरिकी टैरिफ से बचने में मदद की है।
रिपोर्ट जारी करते हुए नवारो का कहना कि 2018 के बाद यह प्रथा अधिक आम हो गई, जब ट्रंप प्रशासन ने पहली बार चीन पर उसकी अनुचित व्यापारिक प्रथाओं के लिए धारा 301 के तहत टैरिफ लगाया था।
उन्होंने अवैध ट्रांसशिपमेंट के मूल्य का अनुमान लगभग 60 अरब डॉलर (करीब 5.70 लाख करोड़ रुपये) लगाया है, जिससे अमेरिकी सरकार को टैरिफ राजस्व में अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है।
ऐसे शिपमेंट का पता लगाने के लिए एआई का उपयोग होगा।
नवारो ने जिन देशों को चीन के शैडो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क के रूप में बताया है, उसमें अमेरिका के कई सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार शामिल हैं।
इनमें मेक्सिको और कनाडा से लेकर यूरोपीय संघ, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया भी हैं। दावा है कि इन्होंने चीन को अरबों डॉलर के टैरिफ से बचने में मदद की।
नवारो ने कहा कि इस व्यवस्था ने कम्युनिस्ट चीन को 40 से अधिक देशों के जरिए अपने निर्यात को वैध बनाने की अनुमति दी थी।
व्हाइट हाउस की रिपोर्ट ने अवैध माल-ढुलाई नेटवर्क की उत्पत्ति 2018 से बताई है। तब ट्रंप प्रशासन ने चीन के साथ अमेरिका के बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने के लिए चुनिंदा चीनी वस्तुओं पर टैरिफ लगाया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, टैरिफ के बाद, चीनी निर्यातकों ने तीसरे देशों के जरिए माल भेजा। जो उत्पाद पहले चीन से सीधे अमेरिका आते थे, उन्हें ऐसे देशों के जरिए भेजने लगे, जहां मामूली बदलाव करके दूसरे देश का उत्पाद बताना आसान था।
चीनी माल को मामूली प्रसंस्करण, दोबारा लेबलिंग, पैकेजिंग, बिलिंग या शिपिंग मार्ग में परिवर्तन के लिए अन्य देशों से गुजारा गया, जिससे माल के मूल-देश से अलग होने का आभास हुआ, जबकि मूलरूप से माल चीनी ही रहा।
चीनी निर्माता और व्यापारिक कंपनियां कम श्रम लागत, सीमित सीमा शुल्क निरीक्षण, शिथिल मुक्त व्यापार क्षेत्रों या अमेरिकी बाजार तक अनुकूल पहुंच वाले स्थानों से माल का परिवहन करती हैं।
रिपोर्ट में भारत के पुणे -गुजरात- चेन्नई विनिर्माण क्षेत्र का जिक्र है।
चीनी सामानों को कम टैरिफ दरों पर अमेरिका पहुंचाने में कौन देश कितना सक्षम है, इस आधार पर 40 देशों को 3 श्रेणियों में बांटा गया।
भारत, कनाडा, जापान, यूरोपीय संघ, इजरायल और मेक्सिको को पहली श्रेणी में रखा गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कथित नेटवर्क से भारत के कुछ विशिष्ट गलियारों को लाभ और अमेरिकी गलियारों को नुकसान हुआ।
पुणे-गुजरात-चेन्नई गलियारे को इलेक्ट्रिक पंपों और कंप्रेसर के चीनी माल ढुलाई से लाभ, जबकि अमेरिकी शहरों को नुकसान हुआ।
वाशिंगटन संदिग्ध माल हस्तांतरण की पहचान करने के लिए एआई का उपयोग करने की भी योजना बना रहा है। इससे इन सभी 40 देशों पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी।
अमेरिका तीसरे देशों के जरिए अमेरिकी बाजारों में पहुंचने वाले सामानों का पता लगाने में मदद करने के लिए एआई -सक्षम डिटेक्टिव बॉर्डर प्रणाली तैनात करेगा।
प्रणाली से शिपमेंट डेटा, रूटिंग इतिहास, उत्पाद वर्गीकरण, स्वामित्व संबंध, उत्पादन क्षमता और अन्य संकेतकों का विश्लेषण करने की उम्मीद है।
वाशिंगटन संदिग्ध माल हस्तांतरण की पहचान करने के लिए एआई का उपयोग करने की भी योजना बना रहा है। इससे इन सभी 40 देशों पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी।
अमेरिका तीसरे देशों के जरिए अमेरिकी बाजारों में पहुंचने वाले सामानों का पता लगाने में मदद करने के लिए एआई -सक्षम डिटेक्टिव बॉर्डर प्रणाली तैनात करेगा।
प्रणाली से शिपमेंट डेटा, रूटिंग इतिहास, उत्पाद वर्गीकरण, स्वामित्व संबंध, उत्पादन क्षमता और अन्य संकेतकों का विश्लेषण करने की उम्मीद है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बना हुआ है।
पिछले दिनों अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल निर्यात करने वाले भारत समेत 5 देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान किया है।
प्रावधान से अमेरिका को चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मिलती है।
पिछले साल अगस्त में अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया था, जिसे हटा दिया गया।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भी अंतिम रूप में है।
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(वाशिंगटन)अमेरिका में महंगे होंगे विदेशी ड्रोन, ट्रंप ने लगाया 100 प्रतिशत तक टैरिफ
वाशिंगटन,14 अगस्त। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बिना पायलट वाले ड्रोन और उनके कुछ हिस्सों के आयात पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का बड़ा ऐलान किया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संवेदनशील माने जाने वाले ड्रोन पर सबसे ज्यादा शुल्क लगाया जाएगा। इनमें 25 किलोग्राम से ज्यादा वजन वाले या थर्मल इमेजिंग क्षमता वाले ड्रोन शामिल हैं। वहीं, 25 किलोग्राम तक वजन वाले ड्रोन पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा।
अमेरिका ने यह फैसला अपनी ड्रोन इंडस्ट्री को मजबूत करने और विदेशी सप्लाई पर निर्भरता घटाने के लिए लिया है।
ट्रंप प्रशासन खासतौर पर चीन की ड्रोन तकनीक को लेकर चिंतित है। यूक्रेन युद्ध में ड्रोन के बड़े इस्तेमाल ने भी इनकी रणनीतिक अहमियत बढ़ाई है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि ड्रोन अब राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी बन चुके हैं।
इसलिए घरेलू कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना इस कदम का प्रमुख उद्देश्य है।
अमेरिका ने कई दूसरे देशों से आने वाले ड्रोन और उनके हिस्सों पर भी शुल्क लगाया है।
यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और ताइवान से आने वाले उत्पादों पर 15 फीसदी टैरिफ लगाया गया है। ब्रिटेन से आने वाले कुछ ड्रोन पर 10 फीसदी शुल्क होगा, लेकिन इसके लिए उनके ज्यादातर हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और तकनीक का उत्पादन अमेरिका या ब्रिटेन में होना जरूरी है।
अलग-अलग उत्पादों पर शुल्क लागू होने की समयसीमा भी अलग रखी गई है।
नए टैरिफ का असर चीन के ड्रोन उद्योग पर पड़ सकता है, क्योंकि चीन दुनिया में रिमोट कंट्रोल वाले विमान बनाने वाले प्रमुख देशों में है।
चीनी कंपनी डीजेआई का अमेरिकी व्यावसायिक ड्रोन बाजार में बड़ा हिस्सा रहा है। अमेरिकी खरीदारों को अब घरेलू या सहयोगी देशों के महंगे विकल्प अपनाने पड़ सकते हैं।
इससे अमेरिका और चीन के बीच पहले से जारी तकनीकी और व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है और ड्रोन बाजार में बदलाव देखने को मिल सकता है।
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(ढाका)’बांग्लादेशी मुसलमान जब भारत में घुसेंगे तो हिंदुओं की कमर टूट जाएगीÓ, मौलाना ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ भी उगला जहर
ढाका,14 अगस्त। बांग्लादेश में पिछले कुछ वक्त से कट्टरपंथी मुसलमानों का वर्चस्व बढ़ गया है. वे आए दिन हिंदुओं और भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं. इस बीच एक बार फिर से बांग्लादेश के एक कट्टरपंथी द्वारा भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान दिया गया है. बांग्लादेशी मौलाना इनायतुल्ला अब्बासी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला है. दरअसल, अब्बासी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमे वह कह रहा है कि मुसलमान हिंदुओं की कमर तोड़ देंगे. उसने साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को धमकी दे दी है. खास बात है कि ये मौलाना भले ही आज बांग्लादेश में छिपा बैठा हो लेकिन इसकी पढ़ाई-लिखाई भारत में ही हुई है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वॉयस ऑफ बांग्लादेश नाम के एक अकाउंट से मौलाना अब्बासी का वीडियो शेयर किया गया है, जिसमें वह साफ-साफ भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलता दिखाई दे रहा है. अब्बासी का कहना है कि हम हिंदुत्ववादियों की कमर तोड़ देंगे. हमें बांग्लादेश की सेना की कोई जरूरत नहीं है. जब हम मुसलमान भारत में घुसेंगे, तो मोदी अपनी धोती उठाकर भाग जाएंगे.
अब्बासी की नफरत यहीं खत्म नहीं हुई. उसने हिंदू देवी-देवताओं पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की. उसने कहा कि हम बांग्लादेश में एक भी मूर्ति नहीं रहने देंगे. सभी मूर्तियों को हिंदुस्तान में फेंक देंगे. अब्बासी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, अब्बासी के वीडियो पर लोग भड़के हुए हैं. एक्स पर कई यूजर इसे बांग्लादेश में कट्टरपंथियों को मिली खुली छूट के रूप में देख रहे हैं.
अब्बासी ने इससे पहले साल 2023 में दिल्ली के लाल किले पर इस्लामिक झंडा फहराने की धमकी दी थी. एक सभा में उसने कहा था कि बांग्लादेश के मुसलमानों के पास इतनी ताकत है कि वह दिल्ली में भी इस्लाम का झंडा लहरा देंगे. इंशा अल्लाह भविष्य में ऐसा ही होगा.
अब सवाल है कि आखिर ये अब्बासी है कौन? दरअसल, अब्बासी बांग्लादेश का एक इस्लामिक विद्वान है, जो अपनी कट्टरपंथी विचारों के लिए जाना जाता है. रिपोर्ट के अनुसार, अब्बासी ने भारत के उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है. वह भारत के खिलाफ पहले भी भड़काऊ बयान दे चुका है.
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(तेहरान)अमेरिका के साथ युद्ध के बीच ईरानी राष्ट्रपति ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे
तेहरान,14 अगस्त। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव तथा पश्चिम एशिया की अस्थिर परिस्थितियों के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन सितंबर में भारत दौरे पर आ सकते हैं। वे नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
भारत ने एक जनवरी 2026 से ब्रिक्स की घूर्णन अध्यक्षता ब्राजील से ग्रहण की है। इस वर्ष भारत की अध्यक्षता का मुख्य विषय लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण रखा गया है। भारत ने इस अध्यक्षता के तहत जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण पर जोर दिया है।
पेजेश्कियन की प्रस्तावित भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों नेताओं की इससे पहले अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी। उस समय दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों को मजबूत करने के साथ क्षेत्रीय परिस्थितियों पर भी चर्चा की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने चाबहार बंदरगाह को दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बताया था।
सितंबर में होने वाली संभावित बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के साथ भारत-ईरान आर्थिक एवं सामरिक सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति भारत के लिए विशेष महत्व रखती है। भारत के ऊर्जा आयात और पश्चिम एशिया के साथ समुद्री व्यापार के लिहाज से यह मार्ग महत्वपूर्ण है। ऐसे में पेजेश्कियन और प्रधानमंत्री मोदी की बैठक में क्षेत्रीय तनाव कम करने तथा समुद्री मार्गों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठ सकता है।
इसके साथ ही चाबहार बंदरगाह भी दोनों देशों के बीच बातचीत का अहम विषय बन सकता है। भारत चाबहार बंदरगाह के विकास में निवेश कर रहा है और इसे अफगानिस्तान तथा मध्य एशिया तक पहुंच के महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में देखता है। हालांकि ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण परियोजना से जुड़े आर्थिक और कारोबारी हितों के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इससे पहले भारत में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए थे। उन्होंने पश्चिम एशिया में तनाव कम करने में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया था। अराघची ने कहा था कि तेहरान सशस्त्र संघर्ष में कोई भविष्य नहीं देखता और मौजूदा संकट का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत के जरिए तलाशा जाना चाहिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने अपने ऐतिहासिक दायित्व और सुरक्षा संबंधी भूमिका पर भी जोर दिया है। ऐसे में पेजेश्कियन की भारत यात्रा को केवल ब्रिक्स बैठक तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत-ईरान संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ ब्रिक के रूप में हुई थी। दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद 2011 से इसका नाम ब्रिक्स हो गया। बाद के वर्षों में समूह का विस्तार हुआ। 2024 में ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात इसके पूर्ण सदस्य बने, जबकि इंडोनेशिया 2025 में शामिल हुआ। वर्तमान में ब्रिक्स के 11 पूर्ण सदस्य देश हैं।
भारत की अध्यक्षता में इस वर्ष समूह का जोर लचीलेपन, नवाचार, आपसी सहयोग और टिकाऊ विकास के साथ आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग को मजबूत करने पर है। ब्रिक्स देशों के बीच सीमा-पार भुगतान व्यवस्था और केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्राओं को आपस में जोड़ने जैसे विषयों पर भी चर्चा चल रही है।
अमेरिका के साथ तनाव और पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच ईरानी राष्ट्रपति का भारत दौरा तेहरान के लिए भी महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर होगा। ब्रिक्स मंच के जरिए ईरान आर्थिक सहयोग बढ़ाने के साथ भारत जैसे महत्वपूर्ण साझेदार के साथ राजनीतिक संवाद को भी आगे बढ़ाना चाहता है।
भारत के लिए भी यह यात्रा संतुलित कूटनीति का अवसर होगी। नई दिल्ली एक ओर ईरान के साथ चाबहार और व्यापारिक संपर्क को मजबूत करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में शांति, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की निर्बाध आवाजाही को लेकर अपने हितों को सुरक्षित रखना चाहती है। ऐसे में सितंबर में होने वाला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत-ईरान संबंधों के साथ-साथ पश्चिम एशिया की कूटनीति के लिए भी अहम मंच साबित हो सकता है।
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(वाशिंगटन)अमेरिका में एक दिन में 3 अपराधियों को मौत की सजा, दिया गया जहरीला इंजेक्शन
वाशिंगटन,14 अगस्त। अमेरिका के ओक्लाहोमा, टेनेसी और अलबामा राज्य में गुरुवार को 3 कैदियों को मौत की सजा दी गई। अमेरिकी इतिहास में साल 2010 के बाद यह पहला मौका है जब एक दिन में 3 अपराधियों को जहरीले इंजेक्शन देकर मृत्युदंड दिया गया है। यह तिहरा मृत्युदंड किसी योजना के कारण नहीं, बल्कि तीनों राज्यों में मामलों के एक ही समय पर अपने अंतिम चरण में पहुंचने के कारण हुआ है। आइए जानतें हैं किन्हें मृत्युदंड दिया गया है।
ओक्लाहोमा में कार्लोस कुएस्ता-रोड्रिगेज को 2003 में अपनी पत्नी ओलंपिया फिशर (43) की नृशंस हत्या के लिए ओक्लाहोमा में मृत्युदंड दिया गया।
कार्लोस को अपनी पत्नी पर बेवफाई का शक था। 31 मई, 2003 को फिशर और उसकी 18 वर्षीय गर्भवती बेटी घर छोड़कर जाने के दौरान कार्लोस ने फिशर की दाहिनी आंख में गोली मार दी।
इस दौरान फिशर के बचने का प्रयास करने पर कार्लोस ने दूसरी आंख में भी गोली दाग दी, जिससे उसकी मौत हो गई।
क्षमा याचिका पर सुनवाई में कार्लोस ने स्वीकार किया था कि उसने अपनी पत्नी की बड़ी बेरहमी से हत्या की थी और वह इस सजा का पूरी तरह से हकदार है। इसके साथ ही उसने कहा था कि उसे अपने किए का पछतावा भी है।
टेनेसी में एंथनी डैरेल हाइंस (66) को वर्ष 1985 में कैथरीन जीन जेनकिंस नाम की एक होटल कर्मचारी की हत्या के आरोप में मौत की सजा दी गई है।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, 3 मार्च 1985 को हाइन्स ने होटल के कमरे की सफाई कर रही कैथरीन पर चाकू से हमला किया, उनसे 100 डॉलर लूटे और उनकी कार लेकर फरार हो गया।
हाइंस ने कार चुराने की बात स्वीकार की थी, लेकिन हत्या के आरोप से इनकार किया था।
जेनकिंस के परिवार ने एंथनी की मौत की सजा की पूरी प्रक्रिया देखी है।
उनके बेटे डेनिस जेनकिंस ने अपनी मां की हत्या के स्थायी आघात का वर्णन किया, जबकि उनकी बेटी मेलिसा जेनकिंस ने कहा कि परिवार 4 दशकों से इस क्षति के साथ जी रहा है।
उन्होंने कहा कि आरोपी के मृत्युदंड से उनकी मां को खोने का दर्द तो मिट नहीं सकता, लेकिन अंतत: परिवार को न्याय मिल गया। आरोपियों को सजा मिलना बहुत ही जरूरी है।
तीसरा मृत्युदंड अलबामा में जेरेमी विलियम्स (42) को दिया गया, जिसने 2021 में जॉर्जिया की 5 वर्षीय मासूम बच्ची कामारी हॉलैंड का अपहरण करने के बाद दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी थी।
पुलिस के अनुसार, विलियम्स ने बच्ची की ड्रग्स-व्यसनी मां को पैसे देकर बच्ची को यौन शोषण के लिए लिया था और बाद में गंभीर यातनाएं देकर उसकी हत्या कर दी।
बच्ची की मां को भी मानव तस्करी के लिए 20 साल की जेल हुई है।
आरोपी विलियम्स ने अपने वकीलों को निर्देश दिया था कि वे अदालत में उसका बचाव न करें और न ही मौत की सजा के खिलाफ कोई अपील दायर करें, जिसके कारण उसका मामला बहुत तेजी से अंतिम अंजाम तक पहुंच गया।
इससे पहले अमेरिका में साल 2010 में एक ही दिन में 3 अपराधियों को मिला था मृत्युदंड दिया गया था।
उस दौरान ओहियो, टेक्सास और लुइसियाना राज्य में अपराधियों को सजा दी गई थी।
केंद्र की कार्यकारी निदेशक रॉबिन माहेर ने इस नवीनतम तिहरे मृत्युदंड को बेहद ही असामान्य बताया है।
विश्लेषण में पाया गया कि 2024 से अब तक दिए गए 94 मृत्युदंड के मामलों में शामिल पीड़ितों में से 64 प्रतिशत महिलाएं या लड़कियां थीं।
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(नईदिल्ली)फुकेत-दिल्ली एयर इंडिया उड़ान पर एयरबस की अंतरिम रिपोर्ट, कहा-4 सेकेंड के लिए नियंत्रण खोया
नईदिल्ली,14 अगस्त (आरएनएस)। थाईलैंड के फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान के दौरान 4 अगस्त को जो भयानक हलचल मची थी, उस पर विमान निर्माता कंपनी एयरबस की अंतरिम रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि घटना के दिन एआई-2379 उड़ान ने लगभग 4 सेकंड के लिए विमान का नियंत्रण खो गया था, जिसके कारण विमान की ऊंचाई अचानक लगभग 300 फीट कम हो गई थी।
एयरबस ने डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (डीएफडीआर) के विश्लेषण के बाद खुलासा किया कि विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में खराबी आई थी, जिससे विमान ने नियंत्रण खोया था।
एयरबस ने प्रारंभिक जांच में यह भी बताया कि विमान की ऊंचाई घटने के दौरान उसे अगला भाग नीचे करने का निर्देश मिला था, जिसके कारण विमान नीचे की ओर झुक गया।
तकनीकी खामियों को स्वीकारते हुए, एयरबस ने एयर इंडिया को विमान का विस्तृत निरीक्षण करने का सुझाव दिया है।
फुकेत-दिल्ली एयर इंडिया उड़ान 4 अगस्त को रवाना होकर मंगलवार सुबह 11:15 बजे दिल्ली पहुंचना था।
यात्रा शुरू होने के 90 मिनट बाद अचानक विमान 300 फीट नीचे गिर गया, जिससे उसमें सवार 145 यात्रियों को तगड़े झटके लगे और इधर-उधर टकराने से 17 घायल हो गए।
जांच में पायलट नशे में मिला था।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) मामले की जांच कर रहा है, जिसमें एयरबस और फ्रांसीसी विमानन दुर्घटना जांच प्राधिकरण का सहयोग है।
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(हैदराबाद)बार काउंसिल ने सीजेआई के बहिष्कार पर एनएएलएसएआर छात्रों पर लगाया था प्रतिबंध, आदेश वापस लिया
हैदराबाद ,14 अगस्त (आरएनएस)। भारतीय बार काउंसिल ने तेलंगाना के हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय विधि अध्ययन एवं अनुसंधान अकादमी (नालसार) विश्वविद्यालय के 2026 बैच के विधि स्नातक छात्रों के किसी भी राज्य बार काउंसिल में नामांकन पर लगाई गई रोक वापस ले ली है। बार काउंसिल के इस फैसले से अंतिम वर्ष के सभी छात्रों को बड़ी राहत मिली है।
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