विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा—भारत की एकता हमारी शक्ति, अखण्डता हमारी जिम्मेदारी

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा—भारत की एकता हमारी शक्ति, अखण्डता हमारी जिम्मेदारी

लखनऊ, (आरएनएस )। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि वर्ष 1947 की भीषण त्रासदी से सीख लेने का अवसर है। यह त्रासदी विश्व मानवता के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। विभाजन के कारण करोड़ों हिंदुओं को अपनी मातृभूमि और जन्मभूमि से विस्थापित होना पड़ा, जबकि लाखों हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन नागरिकों को इसकी पीड़ा झेलनी पड़ी।मुख्यमंत्री शुक्रवार को लोक भवन में विभाजन विभीषिका त्रासदी पर आधारित प्रदर्शनी, लाइव पेंटिंग और लघु फिल्म का अवलोकन करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभाजन से विस्थापित परिवारों के सदस्यों को सम्मानित किया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने जीपीओ स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल पार्क में सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और प्रतिमा स्थल से लोक भवन तक मौन पदयात्रा में हिस्सा लिया।मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम के सभी क्रांतिकारियों और बलिदानियों को नमन करते हुए कहा कि विभाजन के समय विस्थापित परिवारों की पीड़ा को सुनने वाला कोई नहीं था। यह आत्ममंथन जरूरी है कि विभाजन की स्थिति क्यों उत्पन्न हुई और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि इतिहास केवल परीक्षा का विषय नहीं, बल्कि गौरवशाली क्षणों से प्रेरणा लेने और अतीत की गलतियों का परिमार्जन करने का माध्यम है।योगी ने कहा कि भारत कभी धन-धान्य और वैभव से परिपूर्ण देश था। 16वीं-17वीं शताब्दी में विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 24 से 25 प्रतिशत तक बताई जाती थी। इसके बावजूद भारत गुलाम हुआ। उन्होंने कहा कि आपसी अंतर्विरोध और षड्यंत्र इसके प्रमुख कारण रहे। जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर पैदा किए गए मतभेदों ने देश को कमजोर किया और बाहरी ताकतों को षड्यंत्र करने का अवसर दिया।उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, राजगुरु, राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और वीर सावरकर जैसे अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। इसके बावजूद देश को विभाजन की पीड़ा झेलनी पड़ी और इसकी कीमत आज भी आतंकवाद, नक्सलवाद, माओवाद और उग्रवाद के रूप में चुकानी पड़ रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन घटनाओं की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है, जिन पर लंबे समय तक चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जिन क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया, उन्हें भुला दिया गया, जबकि सत्ता और स्वार्थ के लिए देश के विभाजन में भूमिका निभाने वाले लोग सत्ता में स्थापित हो गए। उन्होंने वर्तमान और भावी पीढ़ी से इतिहास की इन घटनाओं से सीख लेने का आह्वान किया।नागरिकता संशोधन कानून का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया। उन्होंने कहा कि इस कानून में किसी की जमीन या संपत्ति छीनने का प्रावधान नहीं था, इसके बावजूद कई स्थानों पर विरोध और हिंसा के प्रयास हुए। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में लखनऊ, कानपुर, मेरठ, संभल, अलीगढ़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर सहित कई स्थानों पर आगजनी के प्रयास हुए।उन्होंने कहा कि भारत की एकता और अखंडता प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। व्यक्तिगत स्तर पर किसी की पहचान पंजाबी, बंगाली, मराठी, तमिल, कन्नड़ या मलयाली हो सकती है, लेकिन सबसे बड़ी पहचान भारतीय की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आपसी विभाजन उन तत्वों को मजबूत करता है, जो भारत को कमजोर करना चाहते हैं।मुख्यमंत्री ने विभाजन की भयावहता का उल्लेख करते हुए कहा कि लाखों लोगों को अपने घरों से बेघर होना पड़ा। पाकिस्तान के पंजाब में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय ट्रेनों की बोगियां लाशों से भर गई थीं और रेल पटरियों के आसपास भी शव दिखाई देते थे। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की जानकारी वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी की पुनरावृत्ति न हो।उन्होंने उत्तर प्रदेश में विस्थापित परिवारों को नागरिकता और भूमि संबंधी अधिकार उपलब्ध कराने की कार्रवाई का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार बिजनौर में पाकिस्तान से आए हजारों लोगों के दस्तावेज दुरुस्त कर उन्हें नागरिकता और भूमि अधिकार पत्र उपलब्ध कराए गए। पीलीभीत और लखीमपुर खीरी में बांग्लादेश से आए पीड़ित परिवारों को भी नागरिकता और भूमि संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं। रामपुर में पाकिस्तान से आए सिख परिवारों के दस्तावेज दुरुस्त करने की कार्रवाई जारी है।मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत विरोधी तत्व यदि किसी मंच का दुरुपयोग कर देश में अव्यवस्था और अराजकता पैदा करने का प्रयास करते हैं तो प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह सजग रहे। मजबूत, सुरक्षित, समरस, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सेना के जवान देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं, इसलिए उनका सम्मान करना और देश की सुरक्षा के प्रति सजग रहना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।समरस भारत के निर्माण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर पैदा किए गए अंतर्विरोधों को समाप्त करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने छुआछूत और अस्पृश्यता जैसे सामाजिक भेदभाव को खत्म करने का आह्वान किया। संत रविदास के सामाजिक समरसता के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जो भारत माता के प्रति समर्पित है, वह हमारा है।मुख्यमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि जब समाज आत्मनिर्भर होगा, तभी विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि गरीब गरीबी से निकलकर मध्यम वर्ग में आए, कारीगर उद्यमी बने, किसान आत्मनिर्भर हो और माता-पिता बच्चों को स्वावलंबन का मंत्र दें, तभी विकसित भारत की संकल्पना साकार होगी।उन्होंने कहा कि भारत की एकता हमारी शक्ति है, भारत की अखंडता हमारी जिम्मेदारी है और विकसित भारत हमारा संकल्प होना चाहिए। स्वतंत्रता की शताब्दी के अवसर पर विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। विकसित भारत के लिए विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित उत्तर प्रदेश के लिए विकसित लखनऊ आवश्यक है।कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी संबोधित किया। विभाजन विभीषिका से विस्थापित परिवारों के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार अरुण कुमार सक्सेना, सांसद बृज लाल, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, विस्थापित परिवारों के प्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएं भी दीं।

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332 नायब तहसीलदारों को मिली पदोन्नति, अब संभालेंगे तहसीलदार की जिम्मेदारी

लखनऊ, (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश सरकार ने राजस्व परिषद के नायब तहसीलदारों को पदोन्नति का तोहफा देते हुए 332 अधिकारियों को तहसीलदार पद पर पदोन्नत कर दिया है। चयन वर्ष 2026-27 के नियमित चयन के तहत की गई इस पदोन्नति के संबंध में राजस्व परिषद की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है। पदोन्नति का निर्णय 6 और 7 अगस्त 2026 को आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में की गई संस्तुति के आधार पर लिया गया है।जारी आदेश के अनुसार पदोन्नत किए गए सभी अधिकारियों को तहसीलदार पद का कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें पदोन्नति से संबंधित निर्धारित सेवा शर्तों और शासनादेशों का पालन करना होगा। संबंधित अधिकारियों को नए पद का कार्यभार ग्रहण करने के बाद राजस्व प्रशासन से जुड़ी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा।नायब तहसीलदारों की इस सामूहिक पदोन्नति को राजस्व विभाग में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। तहसीलदार के रूप में पदोन्नत अधिकारी तहसील स्तर पर राजस्व प्रशासन, भूमि संबंधी मामलों, राजस्व वसूली तथा शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। तहसील स्तर पर प्रशासनिक कार्यों के सुचारु संचालन में तहसीलदार का पद अहम माना जाता है।

पदोन्नति के बाद अधिकारियों को तहसीलदार पद के अनुरूप वेतन मैट्रिक्स लेवल-10 का लाभ मिलेगा। इस स्तर पर 56,100 रुपये से 1,77,500 रुपये तक वेतनमान निर्धारित है। इससे पदोन्नत अधिकारियों के वेतन एवं सेवा संबंधी लाभों में भी वृद्धि होगी।राजस्व परिषद की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पदोन्नति निर्धारित नियमों एवं शासनादेशों के अधीन होगी। अधिकारियों को पदोन्नत पद पर कार्यभार ग्रहण करने के बाद निर्धारित परिवीक्षा अवधि पूरी करनी होगी। इस दौरान उनकी सेवा शर्तें लागू नियमों के अनुसार रहेंगी।332 नायब तहसीलदारों को एक साथ तहसीलदार पद पर पदोन्नति मिलने से राजस्व प्रशासन में अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे तहसीलों में लंबित राजस्व मामलों के निस्तारण, भूमि संबंधी प्रकरणों और अन्य प्रशासनिक कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों को अब तहसीलदार के रूप में नई जिम्मेदारियां संभालनी होंगी।

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ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचेगी स्वास्थ्य सेवा, डिप्टी सीएम ने हिंदुजा मोबाइल हेल्थ यूनिट्स को दिखाई हरी झंडी

लखनऊ, (आरएनएस )। प्रदेश के ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश शासन और पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को हिंदुजा मोबाइल हेल्थ यूनिट्स की शुरुआत की गई। शहीद पथ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के मातृ एवं शिशु रेफरल अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मोबाइल हेल्थ यूनिट्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने ‘सेविंग लाइव्स एंड बिल्डिंग ए हेल्थियर भारत’ राष्ट्रीय अभियान की भी शुरुआत की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के ऐसे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां लोगों को सामान्य जांच और उपचार के लिए भी दूर स्थित अस्पतालों तक जाना पड़ता है। मोबाइल हेल्थ यूनिट्स के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घर-द्वार के करीब पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

ब्रजेश पाठक ने कहा कि मोबाइल हेल्थ यूनिट्स के जरिए लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य जांच, विभिन्न बीमारियों की पहचान और आवश्यक चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। इन यूनिट्स का उद्देश्य उन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच अपेक्षाकृत कठिन है। इससे ग्रामीण आबादी को समय पर जांच कराने और बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही उपचार प्राप्त करने में मदद मिलेगी।उन्होंने कहा कि इस पहल में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। गर्भवती महिलाओं, माताओं, बच्चों और किशोरों से जुड़ी स्वास्थ्य जरूरतों की पहचान कर उन्हें आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। मोबाइल यूनिट्स के माध्यम से यदि किसी मरीज में गंभीर अथवा जटिल बीमारी के लक्षण पाए जाते हैं तो उसे उच्च स्तरीय स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार के लिए रेफर किया जाएगा।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बड़े शहरों और जिला मुख्यालयों तक सीमित रखने के बजाय अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयां इस दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम बनेंगी। प्राथमिक स्तर पर जांच और बीमारी की पहचान होने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का समय रहते उपचार शुरू किया जा सकेगा।

कार्यक्रम के दौरान स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की ओर से उत्तर प्रदेश में मातृ एवं किशोर स्वास्थ्य कल्याण पहल का भी शुभारंभ किया गया। इस पहल के तहत महिलाओं और किशोरों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्वास्थ्य जागरूकता, समय पर जांच और आवश्यक चिकित्सा सेवाओं से जोड़ने के साथ ही जरूरतमंद मरीजों को उच्च स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत किए बिना स्वस्थ समाज की परिकल्पना पूरी नहीं हो सकती। इसी उद्देश्य से मोबाइल हेल्थ यूनिट्स के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने और जरूरतमंद लोगों को बेहतर चिकित्सा व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।इस अवसर पर सेशेल्स गणराज्य में भारत की उच्चायुक्त हैरीसोया लतियाना, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष, स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनोज कुमार सिंह, हिंदुजा ग्रुप के ग्रुप प्रेसिडेंट डॉ. एसके चड्ढा, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग और हिंदुजा समूह के अधिकारी मौजूद रहे।मोबाइल हेल्थ यूनिट्स की शुरुआत को प्रदेश के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे प्राथमिक जांच, बीमारी की पहचान और चिकित्सा परामर्श जैसी सुविधाएं उन लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी, जिन्हें अस्पताल तक पहुंचने में दूरी और अन्य कारणों से कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

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हर घर तिरंगा अभियान के तीसरे चरण में 13 से 15 अगस्त तक होंगे भव्य आयोजन, स्वतंत्रता दिवस पर शहीदों के परिजनों का होगा सम्मानलखनऊ,(आरएनएस ) । प्रदेश में देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘हर घर तिरंगा-2026’ अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश में 9 से 17 अगस्त तक चल रहे अभियान के दौरान घरों, सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, शहीद स्मारकों और अमृत सरोवरों सहित विभिन्न स्थानों पर तिरंगा फहराने के साथ देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि अभियान का पहला चरण 6 से 8 अगस्त और दूसरा चरण 9 से 12 अगस्त तक आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश की जनता ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। अब अभियान का तीसरा चरण 13 से 15 अगस्त तक चलाया जा रहा है। इस दौरान अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ते हुए राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की तिरंगा रैली निकाली जाएगी। रैली से पहले वंदे मातरम् का सामूहिक गायन होगा। विद्यालयों में सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में आमंत्रित जनप्रतिनिधि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे।मंत्री ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों, वृद्धाश्रमों, निराश्रित आश्रमों, दिव्यांग आश्रमों और बाल सुधार गृहों में भी 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन संस्थानों में कार्यक्रमों के बाद मिष्ठान वितरण भी कराया जाएगा, ताकि समाज के सभी वर्गों की भागीदारी स्वतंत्रता दिवस समारोह में सुनिश्चित हो सके।अभियान के दौरान ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी पंचायत सचिवालयों तथा अमृत सरोवरों पर तिरंगा फहराएंगे। इसके साथ ही सरकारी एवं गैर सरकारी कर्मचारी, शिक्षक तथा औद्यानिक संस्थानों में कार्यरत कर्मचारी अपने-अपने घरों पर अनिवार्य रूप से तिरंगा लगाएंगे। अभियान का उद्देश्य केवल सरकारी स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार और नागरिक को राष्ट्रीय पर्व से जोड़ना है।पर्यटन मंत्री ने बताया कि प्रत्येक जनपद में 15 अगस्त को आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों, युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों और पूर्व सैनिकों को विशेष रूप से आमंत्रित कर सम्मानित किया जाएगा। इससे नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम और देश की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों के योगदान से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े प्रमुख स्थलों और स्मारकों पर भी 15 अगस्त तक विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें शहीद स्मारक मेरठ, चौरी-चौरा गोरखपुर, झांसी का किला, बिठूर कानपुर, रेजीडेंसी लखनऊ, बलिया शहीद स्मारक और सुहेलदेव स्मारक बहराइच प्रमुख हैं।इन कार्यक्रमों के माध्यम से धनसिंह गुर्जर, शहीद बंधु सिंह, नाना साहेब, रानी लक्ष्मीबाई, चित्तू पांडेय, मंगल पांडेय, गुलाब सिंह लोधी, चंद्रशेखर आजाद और रामचंद्र विद्यार्थी जैसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों के योगदान को याद किया जाएगा। स्मारकों और शहीद स्थलों पर पुलिस, पीएसी तथा होमगार्ड बैंड द्वारा सुबह और शाम देशभक्ति गीतों की धुनों का वादन किया जाएगा।तिरंगा रैलियों को व्यापक स्वरूप देने के लिए एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, युवक मंगल दल, महिला मंगल दल, सिविल डिफेंस तथा विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों को भी शामिल किया जा रहा है। इससे युवाओं और स्वयंसेवी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी तथा अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने में मदद मिलेगी पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘हर घर तिरंगा-2026’ अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रमों का उद्देश्य राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने के साथ स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और बलिदानियों की स्मृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। प्रदेश के सभी जिलों में अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।इन सभी कार्यक्रमों के आयोजन के संबंध में अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात की ओर से 5 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश शासन के सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों तथा प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। निर्देशों के अनुसार संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को अभियान के सभी कार्यक्रमों में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

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पनीर में औद्योगिक रसायन और तेल के इस्तेमाल का खुलासा, 7,686 किलो खाद्य सामग्री नष्ट और छह एफआईआर

लखनऊ, (आरएनएस ) । प्रदेश में दुग्ध एवं दुग्ध पदार्थों, विशेष रूप से पनीर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने व्यापक विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया। आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के निर्देश पर गठित 24 विशेष प्रवर्तन टीमों ने गाजियाबाद, मथुरा और सहारनपुर की प्रमुख दुग्ध एवं दुग्ध पदार्थ निर्माण इकाइयों का आकस्मिक निरीक्षण किया।अभियान के दौरान 25 विनिर्माण इकाइयों पर कार्रवाई की गई, जबकि तीन इकाइयां गैर-संचालित मिलीं। जांच के दौरान पनीर निर्माण में औद्योगिक प्रयोगार्थ रसायनों तथा पामोलिन ऑयल और रिफाइंड वनस्पति तेल के इस्तेमाल के मामले सामने आए। कई इकाइयों में खाद्य पदार्थों का निर्माण अस्वास्थ्यकर और अस्वच्छ परिस्थितियों में होता पाया गया। विभाग ने संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू की।विशेष प्रवर्तन अभियान में विभागीय टीमों ने कुल 72 खाद्य नमूने लिए, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित इकाइयों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।निरीक्षण के दौरान अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में निर्मित पाई गई 7,686 किलोग्राम खाद्य सामग्री मौके पर ही नष्ट कराई गई। इसकी अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा 2,131 किलोग्राम खाद्य सामग्री एवं अपमिश्रक जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 4.75 लाख रुपये है। इस प्रकार अभियान में कुल 9,817 किलोग्राम खाद्य सामग्री एवं अपमिश्रकों के खिलाफ कार्रवाई हुई।प्रवर्तन टीमों ने पनीर निर्माण की प्रक्रिया, कच्चे माल, इस्तेमाल किए जा रहे तेल और निर्माण स्थल की स्वच्छता की भी जांच की। विभाग के अनुसार कुछ स्थानों पर पनीर तैयार करने में औद्योगिक प्रयोगार्थ रसायनों तथा पामोलिन ऑयल और रिफाइंड वनस्पति तेल के इस्तेमाल के मामले सामने आए। खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों से संदिग्ध सामग्री जब्त की गई और अनुपयुक्त खाद्य सामग्री को नष्ट कराया गया।गंभीर अनियमितताओं के मामलों में कुल छह एफआईआर दर्ज कराई गईं। इनमें पनीर निर्माण में औद्योगिक रसायनों तथा पामोलिन ऑयल या रिफाइंड वनस्पति तेल के इस्तेमाल और अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में खाद्य पदार्थ तैयार करने से जुड़े पांच मामले शामिल हैं। इसके अलावा सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में एक एफआईआर दर्ज की गई। विभागीय विवरण के अनुसार गाजियाबाद में तीन और मथुरा में दो मामलों में एफआईआर दर्ज हुई है, जबकि सहारनपुर में भी कार्रवाई की गई।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कहा कि दुग्ध एवं दुग्ध पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। विशेष रूप से पनीर जैसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों में मिलावट, अनुचित सामग्री के प्रयोग और अस्वच्छ परिस्थितियों में निर्माण पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। नमूनों की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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स्वतंत्रता दिवस पर बीएसएनएल का बड़ा ऑफर, एक रुपये में 24 दिन की सेवा और 2,399 रुपये के रिचार्ज पर 47 दिन अतिरिक्त वैधता

लखनऊ, (आरएनएस )। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने अपने ग्राहकों के लिए कई विशेष प्रचारात्मक योजनाएं शुरू की हैं। उत्तर प्रदेश (पूर्व) परिमंडल की ओर से जारी जानकारी के अनुसार मोबाइल और फाइबर ब्रॉडबैंड ग्राहकों को किफायती दरों पर अतिरिक्त सुविधाएं और लंबी वैधता का लाभ दिया जा रहा है। बीएसएनएल ने इस अवसर पर कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, स्वदेशी 4जी नेटवर्क के विस्तार और दूरदराज क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।बीएसएनएल के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कुल कलेक्शन 21,462 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 2,324 करोड़ रुपये अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 तथा वित्त वर्ष 2026-27 की अब तक की सभी तिमाहियों में ईबीआईटीडीए लगातार सकारात्मक रहा है। कंपनी की 4जी और एफटीटीएच सेवाओं में औसत राजस्व प्रति ग्राहक में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है।उत्तर प्रदेश (पूर्व) परिमंडल में कोर सेवाओं से प्राप्त राजस्व में 10.44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह पिछले वर्ष के 699 करोड़ रुपये से बढ़कर 772 करोड़ रुपये पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2026-27 में संचालन से प्राप्त राजस्व में तीन प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उद्यम कारोबार में लीज्ड सर्किट के आधार पर 11 प्रतिशत और सीएफए में छह प्रतिशत की वृद्धि हुई है।बीएसएनएल ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ग्राहकों के लिए एफआरसी एक रुपया फ्रीडम 2.0 ऑफर पेश किया है। यह ऑफर 12 अगस्त से 12 सितंबर 2026 तक लागू रहेगा। इसके तह

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