उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का शुभारंभ, पारदर्शी और जवाबदेह होगी आउटसोर्सिंग व्यवस्था

उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का शुभारंभ, पारदर्शी और जवाबदेह होगी आउटसोर्सिंग व्यवस्था
लखनऊ, (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवाओं से जुड़ी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीसीओएस) का शुभारंभ किया है। शासनादेश संख्या 3/2025/205/बीस-13-वि-2025 के तहत तैयार परिचालन व्यवस्था का उद्देश्य आउटसोर्सिंग प्रणाली में लंबे समय से सामने आ रही अनियमितताओं को दूर करना और कर्मचारियों को निर्धारित सुविधाएं सुनिश्चित करना है।नई व्यवस्था के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर पारिश्रमिक का भुगतान सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। निगम की व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक माह की 1 से 5 तारीख के बीच कर्मचारियों को निर्धारित पारिश्रमिक का भुगतान किया जाएगा। भुगतान सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में किए जाने की व्यवस्था होगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका और भुगतान में होने वाली अनावश्यक देरी को कम किया जा सकेगा।नई आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारियों के भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा से संबंधित प्रावधानों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। ईपीएफ और ईएसआई की धनराशि निर्धारित नियमों के अनुसार जमा कराई जाएगी तथा पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जाएगा।अब तक आउटसोर्स व्यवस्था में समय पर पारिश्रमिक नहीं मिलने, ईपीएफ और ईएसआई की धनराशि जमा न होने तथा कमीशन की दरों में असमानता जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था में इन समस्याओं के समाधान के लिए केंद्रीकृत नियंत्रण व्यवस्था विकसित की गई है।उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के माध्यम से आउटसोर्सिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर केंद्रीकृत निगरानी की व्यवस्था की जाएगी। कमीशन की दरों में एकरूपता सुनिश्चित करने के साथ मनमानी पर रोक लगाने का प्रयास किया गया है। इससे विभागों और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के बीच व्यवस्था अधिक स्पष्ट और जवाबदेह होने की उम्मीद है।नई व्यवस्था में आरक्षण के प्रावधानों को भी प्रभावी रूप से लागू करने पर जोर दिया गया है। निर्धारित नियमों के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, महिलाओं और दिव्यांगजन के लिए लागू आरक्षण प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।सरकार की नई व्यवस्था का उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों को सेवा से जुड़ी प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता उपलब्ध कराने के साथ उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके तहत विभागाध्यक्षों, जिलाधिकारियों और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के लिए एक स्पष्ट परिचालन ढांचा तैयार किया गया है।उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के माध्यम से सरकार ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था को केवल कर्मचारियों की नियुक्ति तक सीमित रखने के बजाय भुगतान, सामाजिक सुरक्षा, आरक्षण, कमीशन और निगरानी से जुड़े सभी पहलुओं को एक केंद्रीकृत एवं जवाबदेह प्रणाली के अंतर्गत लाने की पहल की है। इससे प्रदेश में आउटसोर्स सेवाओं के संचालन में पारदर्शिता और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *