कांति सिंह की जीत के लिए एमएलसी चुनाव में जुटे राकेश वर्मा

कांति सिंह की जीत के लिए एमएलसी चुनाव में जुटे राकेश वर्मा

सपा कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने का दिया मंत्र, बूथों पर ताकत झोंकने का किया आह्वान

पाटेश्वरी प्रसाद

बाराबंकी। एमएलसी चुनाव में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी कांति सिंह के समर्थन में पूर्व कारागार मंत्री राकेश वर्मा ने सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और अपने समर्थकों को एकजुट कर उन्होंने चुनाव में पूरी ताकत से जुटने का आह्वान किया। उनकी इस सक्रियता को एमएलसी चुनाव के साथ वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पूर्व मंत्री ने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने और मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव में संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं की सक्रियता अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में प्रत्येक कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में जुटना चाहिए। मतदाताओं तक पहुंच बनाने, उनके साथ संवाद कायम रखने और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। राकेश वर्मा ने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को सक्रिय रखने की अपील की। उन्होंने बूथ स्तर पर बेहतर समन्वय बनाने और मतदाताओं के बीच निरंतर संपर्क बनाए रखने को चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनका जोर इस बात पर रहा कि संगठन की ताकत केवल बड़े आयोजनों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की निरंतर सक्रियता से बढ़ती है। कांति सिंह के समर्थन में कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की यह कवायद ऐसे समय हो रही है, जब एमएलसी चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता और संगठनात्मक बैठकों पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है। एमएलसी चुनाव के साथ राकेश वर्मा ने कार्यकर्ताओं को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में भी जुटने का संदेश दिया। उन्होंने गांवों, कस्बों और बूथों तक संगठन की पहुंच मजबूत करने, जनसमस्याओं को समझने और लोगों के बीच नियमित संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया। राजनीतिक दृष्टि से उनकी सक्रियता को सपा के संगठनात्मक आधार को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। एमएलसी चुनाव में प्रत्याशी के समर्थन में कार्यकर्ताओं को लामबंद करने के साथ विधानसभा चुनाव के लिए अभी से सक्रिय रहने का संदेश देकर उन्होंने संगठन को लगातार गतिशील बनाए रखने पर जोर दिया है। हालांकि, इस सक्रियता का चुनावी परिणामों पर कितना असर पड़ेगा, यह मतदाताओं के रुख और नतीजों से ही स्पष्ट होगा।

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