कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का

कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का
शिवानन्द भाई श्री महाराज ने
किय भावपूर्ण वर्णन, भक्ति में डूबे श्रद्धालु

जौनपुर ,28 अप्रैल। यूपी के जौनपुर में बी आर पी इंटर कॉलेज के मैदान में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत
कथा के पांचवे दिन सोमवार को रात कथावाचक शिवानन्द भाई श्री महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के पावन विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणादायक वर्णन किया।
महाराज श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह केवल एक पौराणिक घटना नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम, अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण का दिव्य प्रतीक है। उन्होंने बताया कि माता रुक्मिणी बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण को अपने पति के रूप में स्वीकार कर चुकी थीं और उनके प्रति उनकी श्रद्धा अडिग थी।
उन्होंने विस्तार से बताया कि जब रुक्मिणी के भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय किया, तब रुक्मिणी ने अत्यंत व्याकुल होकर श्रीकृष्ण को संदेश भेजा और उन्हें विदर्भ आकर अपने सम्मान की रक्षा करने का निवेदन किया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी भक्त की पुकार को तुरंत स्वीकार किया, विदर्भ पहुंचे और रुक्मिणी का हरण कर विधिपूर्वक उनका विवाह संपन्न किया।
कथावाचक ने इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि सच्चा प्रेम और विश्वास हर कठिनाई को पार कर सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान सदैव अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं और उनकी रक्षा करते हैं। इसलिए जीवन में श्रद्धा और भक्ति को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे समय भक्ति में लीन होकर कथा का श्रवण करते रहे।
कथा के दौरान श्रद्धालु भजनों और कीर्तन में भावविभोर होकर झूम उठे। पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया। अंत में आयोजकों द्वारा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया, जिससे कार्यक्रम का समापन भक्तिमय माहौल में हुआ।

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