(कोलकाता)टीएमसी के फंड पर बरकरार रहेगा ममता का कब्जा, हाई कोर्ट ने बढ़ाई अंतरिम राहत

(कोलकाता)टीएमसी के फंड पर बरकरार रहेगा ममता का कब्जा, हाई कोर्ट ने बढ़ाई अंतरिम राहत
कोलकाता ,22 सितंबर ,(आरएनएस)।  चुनाव आयोग द्वारा ‘जोड़ाफूलÓ चुनाव चिह्न फ्रीज किए जाने के तगड़े झटके के बीच ‘कालीघाट तृणमूलÓ (ममता बनर्जी गुट) को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी व वित्तीय राहत मिली है। हाईकोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग द्वारा सिंबल पर लगाई गई रोक का असर पार्टी के बैंक खातों के संचालन पर कतई नहीं पड़ेगा। अदालत के फैसले के अनुसार, ममता गुट पूर्व में जारी अंतरिम आदेश के तहत ही अपने तीनों प्रमुख बैंक खातों का सामान्य कामकाज और वित्तीय प्रबंधन जारी रखेगा।
सिर्फ उपचुनावों तक सीमित है आयोग का फैसला: अदालत
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की कि चुनाव आयोग द्वारा पार्टी सिंबल में किया गया बदलाव सिर्फ आगामी उपचुनावों की चुनावी प्रक्रिया तक ही सीमित है। इसलिए इसका दायरा पार्टी के वित्तीय ढांचे या बैंक खातों के प्रबंधन तक नहीं बढ़ाया जा सकता। अदालत ने तृणमूल कांग्रेस के तीनों बैंक खातों के संचालन के लिए पूर्व में तय की गई अंतरिम व्यवस्था की मियाद को अब बढ़ाकर 29 जनवरी तक जारी रखने का निर्देश दिया है।
स्पेशल ऑफिसर की निगरानी में निकाले जा सकेंगे पैसे
अदालत द्वारा तय की गई प्रक्रिया के तहत तृणमूल कांग्रेस के फंड से लेन-देन की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है। ममता तृणमूल गुट के कोई भी दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता चेक पर अपने हस्ताक्षर करेंगे। इसके बाद, हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी व पूर्व जज सुब्रत तालुकदार इन चेकों और वित्तीय मांगों की विधिवत स्क्रूटनी (जांच) करेंगे। स्पेशल ऑफिसर की अंतिम संस्तुति और मंजूरी मिलने के बाद ही संबंधित बैंक तय राशि का भुगतान जारी करेंगे।
29 जनवरी तक बढ़ी अंतरिम व्यवस्था, खर्चों में मिलेगी सहूलियत
उल्लेखनीय है कि यह विवाद सबसे पहले जुलाई में सामने आया था, जब पार्टी के तीन अहम खातों के संचालन पर रोक को लेकर कानूनी खींचतान शुरू हुई थी। उस दौरान हाईकोर्ट ने 9 जुलाई को आदेश पारित कर रिटायर्ड जज सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त किया था और यह व्यवस्था 30 सितंबर तक लागू की थी। अब कोर्ट ने इसी व्यवस्था को 29 जनवरी तक विस्तार दे दिया है, जिससे पार्टी को अपने आगामी संगठनात्मक, कानूनी और दैनिक खर्चों को निपटाने में किसी तरह की आर्थिक अड़चन का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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