जौनपुर में शिवानंद भाई श्री की भागवत कथा 21 अप्रैल से, बोले— सत्संग है चरित्र निर्माण की पाठशाला

जौनपुर में शिवानंद भाई श्री की भागवत कथा 21 अप्रैल से, बोले— सत्संग है चरित्र निर्माण की पाठशाला

जौनपुर, 21अप्रैल । नैमिषारण्य सीतापुर स्थित सनातन उत्थान फाउंडेशन के संस्थापक शिवानंद भाई श्री महाराज इन दिनों जौनपुर प्रवास पर हैं। नगर के बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में 21 अप्रैल से शोभा यात्रा के साथ सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा प्रवचन कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। कथा प्रतिदिन शाम से रात 9 बजे तक आयोजित होगी, जबकि सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक श्रीकृष्ण नाम महामंत्र यज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए से बातचीत में शिवानंद भाई श्री ने कहा कि सत्संग मानव के चरित्र निर्माण की सच्ची पाठशाला है। कथा के माध्यम से विभिन्न प्रसंगों द्वारा यह समझाया जाता है कि कर्म का फल किस प्रकार बनता है और मनुष्य को अपने प्रत्येक कर्म का परिणाम अवश्य भोगना पड़ता है। उन्होंने शास्त्रों के सिद्धांत “अवश्यमेव भोक्तव्यम” का उल्लेख करते हुए कहा कि अच्छे या बुरे हर कर्म का फल निश्चित है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य हर क्षण कर्म करता रहता है, चाहे वह जाने-अनजाने ही क्यों न हो। धर्माचरण करने वाले लोग अपने पूर्व जन्मों के बुरे कर्मों का फल भी सहज रूप से भोग लेते हैं और उन्हें इसका अहसास भी नहीं होता। उन्होंने बताया कि धर्म के बिना जीवन में सच्चे आनंद की प्राप्ति संभव नहीं है।
सुख और आनंद के अंतर को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि भौतिक साधनों से केवल सुख मिल सकता है, लेकिन वास्तविक आनंद भगवत कृपा से ही प्राप्त होता है। धर्मशील व्यक्ति के जीवन में आनंद स्वतः प्रवाहित होता है, जैसे नदियों का जल बिना प्रयास समुद्र में मिल जाता है।
उन्होंने कहा कि आत्मा परमात्मा का अंश है और अंततः उसे उसी में विलीन होना है। जो व्यक्ति जितना अधिक पुरुषार्थ करता है, वह उतनी ही शीघ्र अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि उनका जीवन सनातन धर्म के उत्थान के लिए समर्पित है। अब तक वे देश-विदेश में 214 कथाएं कर चुके हैं और जौनपुर में यह उनकी 215वीं कथा होगी। उन्होंने कहा कि जौनपुर के लोगों में धर्म और संस्कृति के प्रति गहरा लगाव है, बस उन्हें उचित अवसर की आवश्यकता है।

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