अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के ज़रिए सभी शरणार्थियों के अमेरिका आने पर रोक लगा दी है। इसके अलावा सात मुस्लिम बहुल देशों से आने वाले लोगों पर भी 90 दिनों तक रोक रहेगी।
इस बीच एक अमेरिकी अदालत ने शरणार्थियों को हिरासत में लिए जाने पर रोक लगा दी है। प्रवासियों पर प्रतिबंध लगाने के ट्रंप के फ़ैसले की मानवाधिकार समूहों ने कड़ी आलोचना की है।
कुछ अहम बातें

-अमेरिका में शरणार्थियों को शरण देने पर 120 दिनों की रोक।
-सीरियाई शरणार्थियों पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध।
-सात मुसलमान बहुल देशों- इराक़, सीरिया, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सुडान और यमन से आने वाले लोगों पर 90 दिनों के लिए रोक इस रोक में यूएन वीज़ा और राजनयिक वीज़ा शामिल नहीं।
-अपने देशों में दमन का सामना कर रहे धार्मिक अल्पसंख्यकों को वरीयता दी जाएगी. ट्रंप ने खास तौर पर सीरियाई ईसाइयों का ज़िक्र किया।
-2017 में अधिकतम 50 हज़ार प्रवासी स्वीकार किए जाएंगे।
-पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यह सीमा एक लाख दस हज़ार तय की थी।
-कुछ विशेष मामलों में छूट दी जा सकती है।
क्या बोले ट्रंप

ट्रंप ने कहा है कि शरणार्थी कार्यक्रम पर रोक सुरक्षा एजेंसियों को ज़रूरी सुरक्षा इंतेज़ाम सख़्त करने के लिए समय मुहैया कराने के लिहाज से ज़रूरी है ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बनने वाले लोगों को वीज़ा न दिया जा सके।
हालांकि उन्होंने ये स्पष्ट नहीं किया कि सुरक्षा एजेंसियां क्या नए क़दम उठाएंगी। अमेरिका में प्रवास के लिए आवेदन देने वाले सीरियाई नागरिकों को पहले ही बेहद कठिन जाँच और सुरक्षा स्क्रीनिंग से गुज़रना होता था। इस प्रक्रिया में 18 से 24 महीने तक लग सकते थे।

मानवाधिकार समूहों का कहना है कि ट्रंप के आदेश के निशाने पर मुसलमान अपने धर्म की वजह से हैं। उनका ये भी तर्क है कि अभी तक किसी प्रवासी को चरमपंथ संबंधी अपराध में सज़ा नहीं हुई है।
नए प्रतिबंधों का एलान करते हुए ट्रंप ने 11 सितंबर 2001 को हुए हमलों का ज़िक्र किया था। लेकिन हमले में शामिल रहे 19 लोगों में से एक भी प्रतिबंधों में शामिल देशों से नहीं था।
हमें क्या नहीं पता
अभी ये स्पष्ट नहीं है कि इस आदेश का क़ानून स्थाई रिहाइश का अधिकार रखने वाले या ग्रीन कार्ड वाले लोगों पर क्या असर होगा। अधिकार समूहों ने ऐसे लोगों को अमेरिका से बाहर जाने या लौटने से पहले प्रवासी क़ानून जानकारों से परामर्श करने की सलाह दी है।
वीज़ा साक्षात्कार में छूट के कार्यक्रम को निलंबित किए जाने के बाद दुनियाभर में वीज़ा सेवाओं पर क्या असर होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वीज़ा लेने में अधिक समय लग सकता है।

