तंत्र-मंत्र के नाम पर महिला से ठगी का मामला गरमाया

तंत्र-मंत्र के नाम पर महिला से ठगी का मामला गरमाया

-विवेकानंद दास ने अपने ऊपर लगे आरोपों को किया खारिज

-कहा- पुरानी रंजिश के तहत फंसाने की साजिश, होे निष्पक्ष जांच

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में हनुमानगढ़ी से जुड़े तंत्र-मंत्र के नाम पर एक महिला से कथित ठगी और 2 करोड़ 80 लाख रुपये के आरोपों को लेकर विवाद गरमा गया है। मामले में अपना नाम सामने आने के बाद विवेकानंद दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोर्चा संभाला और अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पुरानी रंजिश के तहत फंसाने की साजिश करार दिया। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत है तो उसे सामने लाया जाए और दोषी पाए जाने पर पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में विवेकानंद दास ने दावा किया कि वह संबंधित महिला को न तो जानते हैं और न ही कभी उससे मिले हैं। उन्होंने किसी भी तरह का आर्थिक लेन-देन होने से इनकार किया। महिला की ओर से कथित तौर पर रुपये देने और हवाई यात्रा व होटल के खर्च से जुड़े आरोपों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इन दावों के समर्थन में प्रमाण सामने आने चाहिए। विवेकानंद दास ने हवाई यात्रा के आरोप को खारिज करते हुए दावा किया कि वह आज तक विमान में नहीं बैठे हैं। उन्होंने कहा कि बिना सबूत आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। विवेकानंद दास ने आरोप लगाया कि पूरे प्रकरण के पीछे पुरानी दुश्मनी है। उन्होंने महंत गौरी शंकर दास से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि उनके गुरुजी के साकेतवास के बाद स्थान को लेकर विवाद हुआ था। उनके मुताबिक, उसी रंजिश के चलते उन्हें परेशान करने और कथित मामले में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, पुरानी रंजिश को लेकर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में दूसरे पक्ष का जवाब सामने आने के बाद ही इस विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। मामले में सूरज दास को अपना शिष्य बताए जाने पर विवेकानंद दास ने स्पष्ट इनकार किया। उन्होंने कहा कि सूरज दास उनके शिष्य नहीं हैं। वहीं, रत्नाकर नामक व्यक्ति को भी पहचानने से इनकार करते हुए उसके साथ किसी तरह के संबंध होने की बात नकारी। उन्होंने पूजा-पाठ और कर्मकांड के नाम पर पैसे लेने के आरोपों को भी खारिज किया और कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विवेकानंद दास ने शासन-प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि पुलिस जांच में सच्चाई सामने आनी चाहिए। यदि उनके खिलाफ सबूत मिलते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, लेकिन यदि उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है तो इसकी भी जांच होनी चाहिए। 2.80 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन, तंत्र-मंत्र के नाम पर ठगी के आरोप और संत की ओर से लगाए गए साजिश के दावों के बीच अब पुलिस जांच अहम हो गई है। फिलहाल विवेकानंद दास ने आरोपों को नकारते हुए अपना पक्ष रखा है। महिला की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2.80 करोड़ रुपये के कथित मामले में सच्चाई क्या है? इसका जवाब जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही सामने आए

गा।

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