फसल क्षति का सर्वे कर 12 अक्टूबर तक पोर्टल पर दर्ज करें आंकड़े: राहत आयुक्त
लखनऊ ( आरएनएस )। प्रदेश में हाल में हुई चक्रवात, अतिवृष्टि और बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता राशि उपलब्ध कराने के निर्देश राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने दिए हैं। उन्होंने सोमवार को लाल बहादुर शास्त्री भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों के साथ राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की।राहत आयुक्त ने कहा कि फसल क्षति का आकलन कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट राहत आयुक्त कार्यालय को भेजी जाए और पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता राशि का वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बाढ़ के पानी में डूबी फसलों का डिजिटल क्रॉप सर्वे कराने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे क्षति का सटीक और पारदर्शी आकलन हो सकेगा। डिजिटल सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर पात्र किसानों को उनकी वास्तविक फसल क्षति के अनुरूप सहायता दी जाए।उन्होंने अधिकारियों को केवल लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहने तथा स्वयं क्षेत्र में जाकर सर्वेक्षण की स्थिति देखने के निर्देश दिए। सर्वे की प्रगति और रिपोर्ट प्रतिदिन राहत आयुक्त कार्यालय की गूगल शीट और पोर्टल पर दर्ज करने को कहा गया। बजट की मांग भी पोर्टल पर दर्ज वास्तविक आंकड़ों के आधार पर ही करने के निर्देश दिए गए हैं। आंकड़ों में अंतर मिलने पर संबंधित अधिकारी को उसका कारण स्पष्ट करना होगा।राहत आयुक्त ने कहा कि बाढ़ के अलावा भारी वर्षा और चक्रवात से हुई फसल क्षति के आंकड़े भी निर्धारित गूगल शीट पर दर्ज किए जाएं। क्षति के आकलन में भारत मौसम विज्ञान विभाग तथा एडब्ल्यूएस-एआरजी के आंकड़ों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए, ताकि संबंधित क्षेत्रों में हुई वास्तविक वर्षा के आधार पर वैज्ञानिक और तथ्यपरक आकलन किया जा सके। उप जिलाधिकारियों और तहसीलदारों को डिजिटल क्रॉप सर्वे का क्रॉस-वेरिफिकेशन कराने के लिए भी कहा गया।उन्होंने निर्देश दिया कि सर्वेक्षण से पहले संबंधित खसरा और अन्य अभिलेखों की जांच कर पिछले वर्ष बोई गई फसल की जानकारी प्राप्त की जाए, जिससे वर्तमान फसल और क्षति का सही आकलन हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि 12 अक्टूबर तक राहत पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर फसल क्षति की फीडिंग हर हाल में पूरी कर ली जाए।राहत आयुक्त ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि आमजन के जीवन की आधारशिला हैं। इसलिए अधिकारी किसान हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशीलता और तत्परता से कार्य करें, ताकि फसल क्षति से प्रभावित अधिक से अधिक पात्र किसानों को समयबद्ध और प्रभावी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

