(बालाघाट)बालाघाट में बच्चों की मौत पर अभिजीत दिपके का तंज, खुद को मुख्यमंत्री बताकर इस्तीफा देने की घोषणा
0-प्रभावित गांवों का दौरा करने पहुंचे थे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक, स्थानीय लोगों और मीडिया के तीखे सवालों का करना पड़ा सामना
बालाघाट,13 सितंबर (आरएनएस)। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में पिछले कुछ दिनों में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी मुद्दे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके शनिवार को बालाघाट के प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। उन्होंने अडोरी, कोरका और बोंडारी गांवों का दौरा कर मृत बच्चों के परिजनों और स्थानीय लोगों से मुलाकात की।
दौरे के दौरान स्थानीय लोगों और मीडिया प्रतिनिधियों ने दिपके से कई तीखे सवाल किए। कुछ लोगों ने उन पर बच्चों की मौत जैसे संवेदनशील मामले को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उनसे पूछा गया कि घटना के कई दिन बाद वे प्रभावित क्षेत्रों में क्यों पहुंचे और क्या उनका दौरा केवल राजनीतिक फायदे के लिए है।
घटना के बाद दिपके ने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा किया। इस पत्र में उन्होंने खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। राज्यपाल मंगूभाई पटेल को संबोधित यह पत्र 13 अगस्त 2026 को लिखा गया है।
पत्र में दिपके ने लिखा कि बालाघाट में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत के बाद उनकी अंतरात्मा उन्हें मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने की अनुमति नहीं देती। उन्होंने मुख्यमंत्री होने के नाते प्रभावित परिवारों को समय पर आवश्यक सहायता नहीं मिल पाने की जिम्मेदारी लेने की बात कही।
दिपके ने पत्र में कहा कि इनमें से कई बच्चों की जान संभवत: बचाई जा सकती थी और वह इस विफलता की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
दिपके ने अपने पत्र में केंद्र और राज्य की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हर घर नल योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में घर-घर नल का पानी पहुंचाने की उपलब्धि का दावा किया जा रहा है, लेकिन बालाघाट के कुछ हिस्सों में आदिवासी परिवार अब भी पीने के पानी के लिए नदी पर निर्भर हैं।
उन्होंने ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई गांवों में विद्यालयों की स्थिति बेहद खराब है। दिपके के अनुसार, बालाघाट के एक गांव में आंगनवाड़ी से लेकर पांचवीं कक्षा तक के करीब 75 बच्चे एक ही कक्षा में पढ़ रहे हैं।
प्रभावित गांवों के दौरे के दौरान दिपके ने कहा था कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके प्रति वह पूरी सहानुभूति रखते हैं और उन्हें न्याय दिलाने के लिए आगे आएंगे।
उन्होंने अधिकारियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा था कि बच्चों की मौत को स्वीकार किए जाने के बावजूद अब तक जिम्मेदारी तय नहीं की गई है और किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है।
दिपके के बालाघाट दौरे का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें स्थानीय लोगों और मीडिया की ओर से उनसे सवाल किए जाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में एक महिला दिपके के पास जाकर उनके सामने माइक लगाकर सवाल करती नजर आ रही है। महिला ने उनसे पूछा कि क्या वह यहां बच्चों की मौत के बाद उनकी लाशों पर राजनीति करने आए हैं।
इस घटनाक्रम के बाद दिपके ने पूरे मामले पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर अपना इस्तीफा पत्र साझा किया। उनके पत्र में बालाघाट में हुई बच्चों की मौत के साथ-साथ पेयजल, शिक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।
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