मजदूर के बेटे राहुल का कनिष्ठ सहायक पद पर चयन, 17 साल बाद गांव में खुशी की लहर
बस्ती। मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के दम पर इंसान किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता है। इस बात को साऊंघाट विकास खण्ड क्षेत्र के महुड़र गांव निवासी राहुल ने सच साबित कर दिखाया है। मजदूर के बेटे राहुल का चयन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में कनिष्ठ सहायक के पद पर हुआ है। उनकी इस सफलता से परिवार सहित पूरे गांव में खुशी की लहर है। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया और मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। राहुल के पिता त्रिलोकी परिवार का भरण-पोषण करने और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए मजदूरी करते हैं, जबकि उनकी माता इस्रावती देवी घर की जिम्मेदारियां संभालती हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद राहुल ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल कर परिवार के साथ-साथ पूरे गांव का नाम रोशन किया है।राहुल के गांव पहुंचने पर समाजसेवी दीप लाल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान फूल-मालाएं पहनाकर उन्हें सम्मानित किया गया और मिठाई वितरित की गई। समाजसेवी दीप लाल ने कहा कि गांव में करीब 17 वर्षों बाद किसी युवक की सरकारी विभाग में नौकरी लगी है। यह पूरे गांव के लिए गर्व और खुशी की बात है। राहुल ने अपनी सफलता से गांव के अन्य युवाओं के सामने एक मिसाल पेश की है।स्वागत समारोह में पहुंचे कल्पनाथ बाबू, जय हिंद गौतम, अनूप कुमार एडवोकेट और विवेक ओबेरॉय ने राहुल की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और ईमानदारी से सफलता हासिल की है। उनकी कामयाबी उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो आर्थिक तंगी के कारण अपने सपनों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए राहुल ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में पढ़ाई छोड़कर कमाने के लिए मुंबई जाना पड़ा। वहां उन्होंने मेहनत-मजदूरी की, लेकिन उन्हें एहसास हुआ कि कठिन परिश्रम के बावजूद उनकी जरूरतों के अनुसार कमाई नहीं हो पा रही थी। ऐसे में परिवार का भरण-पोषण करना और भविष्य संवारना मुश्किल लगने लगा।
राहुल ने बताया कि मुंबई में ही उन्हें दोबारा पढ़ाई शुरू करने की प्रेरणा मिली। इसके बाद वह गांव लौट आए और अपने माता-पिता से फिर से पढ़ाई करने की इच्छा जताई। माता-पिता ने खुशी-खुशी उन्हें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। पिता ने मेहनत-मजदूरी करके उनकी पढ़ाई का खर्च उठाया और माता ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। आखिरकार राहुल ने अपनी मेहनत और परिवार के त्याग के दम पर सफलता हासिल कर ली।राहुल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता के कठिन परिश्रम, माता के त्याग, परिवार के सहयोग और गांव के लोगों के आशीर्वाद को दिया। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने कठिन परिस्थितियों में भी उनका साथ नहीं छोड़ा और पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। आज वह जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, उसमें उनके परिवार की सबसे बड़ी भूमिका है।राहुल की इस उपलब्धि से महुड़र गांव में उत्साह का माहौल है। उनके स्वागत के दौरान विकास राव, दीपक राव, अंकित राव, पूनम, नीलम भारती, मोहित, सौरभ, शैलेश राव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने राहुल को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना किया।
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