मन के जीते जीत
हम देख सकते है कि दुनिया मृत्यु से ज्यादा भयभीत मृत्यु की आहट से है । वह वर्तमान की समस्या से अधिक चिंतित आने वाले कल से है । हर प्राणी की कमोबेश यही कहानी है,यही हकीकत है । वह हम सच्चाई को सही से आत्मसात कर सकें इसकी बङी जरूरत है। हमारे जीवन में सही से सकारात्मक सोच व आत्मविश्वास ही मनोबल बढ़ाता है । वह नकारात्मक सोच व अस्थिरता ही मनोबल घटाता है । वह जीवन के संग्राम में जिनका मनोबल प्रचंड है उसे जमाना भी नहीं रोक सका है ।भगवान महावीर आदि प्रत्यक्ष उदाहरण है। बल के तीन प्रकार मन, वचन और शरीर है । हमारे मन की गति सबसे तीव्र है ।
वह वचन और शरीर तो उसके सहवर्ती है । हमारा मन नही तो वचन और शरीर भी निरर्थक है क्योंकि मनोबल ही तो हमको सही से आगे बढ़ने को प्रबल बनाते है । अतः हमारा दृढ़ मनोबल ही हमको सफल बनाता है वह ये ही हमारी सफलता का राज है । हम देख सकते है कि जमीन से लेकर आकाश में जितने भी आविष्कार हुए है वह कठिन से कठिन काम में भी आसान बने है । हमारे दृढ़ मनोबल में ही तो असम्भव भी सम्भव बन जाए के सही से राज छिपे हैं । हमारे दृढ़ मनोबल में अद्भुत चमत्कार है । वह सफल बनने के सपने को साकार करता है । वह उसके सफल परिणाम हर समय दिखाई देते है । यह माना कि हमारी ज़िंदगी काँटों से भरा सफर है पर इससे गुज़र जाना ही असली पहचान है । हमारे जीवन में बने बनाये रास्तों पर तो सभी चलते हैं पर स्वयं के लिए रास्ते जो बनाये वही तो इंसान है । हमारे यह हमेशा ध्यान में रहे की हमारा सफल होने का संकल्प किसी भी और संकल्प से महत्त्वपूर्ण है । अतः महान सपने देखने वालों के महान सपने मनोबल दृढ़ ईच्छा शक्ति आदि – आदि से हमेशा पूरे होते हैं। संत कबीर ने क्या खूब कहा है कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।कह कबीर हरि पाइए मन ही के परतीत। वह जब तक हमारा मन चंचल एवं अशांत रहेगा तो हमको सोच व चिन्तन भी मन में भ्रांत करते रहेंगे । वह सही निर्णय तभी लिए जा सकते हैं जब हमारा मन स्थिर और शांत हो और अशांत मन तो उलझनों से क्लांत रहेगा । वह हमारे स्थिर मन को ही हर उलझन आसान लगेगी ।
प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़ )

