(मुंबई)मेट्रो स्टेशन पर ‘थूकदानÓ देख भड़के लोग, 500 रुपए जुर्माने के बीच लगा ‘थूकदानÓ, सोशल मीडिया पर छिड़ा भारी विवाद

(मुंबई)मेट्रो स्टेशन पर ‘थूकदानÓ देख भड़के लोग, 500 रुपए जुर्माने के बीच लगा ‘थूकदानÓ, सोशल मीडिया पर छिड़ा भारी विवाद
मुंबई ,01 अक्टूबर ,(आरएनएस)।  मुंबई मेट्रो के एक स्टेशन पर लगाए गए अनोखे ‘थूकदानÓकी तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद भारी बहस छिड़ गई है। मेट्रो परिसर में जहां पान-गुटखा खाकर गंदगी फैलाने और थूकने पर सख्त पाबंदी के साथ 500 के जुर्माने का नियम लागू है, वहीं इस तरह के थूकदान लगाए जाने से यात्री और आम नागरिक हैरान हैं। लोग मेट्रो प्रशासन के इस कदम पर सवाल उठा रहे हैं कि एक तरफ थूकने पर आर्थिक दंड का प्रावधान है, तो दूसरी तरफ ऐसा इंतजाम करके क्या प्रशासन इस अवांछित आदत को बढ़ावा दे रहा है।
एक्टिविस्ट की पोस्ट से गरमाया मुद्दा, ‘ईजीस्पिटÓ तकनीक पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद की शुरुआत सामाजिक कार्यकर्ता ज़ोरू भाथेना द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ङ्गÓ (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर की गई एक तस्वीर के बाद हुई। जानकारी के अनुसार, यह खास थूकदान ‘ईजीस्पिटÓ नामक कंपनी द्वारा तैयार किया गया है। यह डस्टबिन पूरी तरह टच-फ्री यानी बिना हाथ लगाए सेंसर से खुलता है और इसमें 10 सेकंड के भीतर वायरस व बैक्टीरिया को नष्ट करने की तकनीक होने का दावा किया गया है। हालांकि, इस डिब्बे पर बाकायदा मुंबई मेट्रो का आधिकारिक लोगो लगा होने और उस पर ‘जिम्मेदार बनेंÓ लिखा होने के कारण लोगों का गुस्सा और ज्यादा भड़क गया है।
नेटिजन्स और मुंबईकर्स का फूटा गुस्सा, सिविक सेंस पर उठाए सवाल
तस्वीर वायरल होते ही स्थानीय निवासियों और सोशल मीडिया यूजर्स ने मेट्रो प्रबंधन को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया। कई यूजर्स ने नाराजगी जताते हुए लिखा कि सार्वजनिक परिवहन में इस तरह के डिब्बे लगाना स्वच्छता नहीं, बल्कि लोगों की गंदी और गैर-जिम्मेदाराना आदतों को बढ़ावा देने जैसा है। लोगों का कहना है कि स्टेशनों पर जहां हैंड ड्रायर और बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं की कमी देखने को मिलती है, वहां थूकदान लगाना सिविक सेंस के पतन को दर्शाता है।
यात्रियों का यह भी तर्क है कि प्रशासन को लोगों की आदतों को सुधारने और नियमों को सख्ती से लागू करने पर जोर देना चाहिए। जब परिसर में पहले से ही थूकने पर ?500 के जुर्माने की चेतावनी चस्पा है, तो ऐसे डस्टबिन लगाने से आम यात्रियों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
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