रामचरितमानस के सुन्दर काण्ड में हनुमान जी की वन्दना का एक बहुचर्चित सुप्रसिद्ध श्लोक देखिए
आज जुलाई का प्रथम मंगलवार यानिकि हनुमान जी का साप्ताहिक दिवस है।रामचरितमानस के सुन्दर काण्ड में हनुमान जी की वन्दना का एक बहुचर्चित सुप्रसिद्ध श्लोक है जिसका सम्बन्ध कुछ पाश्चात्य विद्वानों के अनुसार गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की काव्य प्रतिभा के उदय व परिचय के साथ वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध हनुमान जी के मन्दिर संकटमोचन से भी है जिसकी स्थापना बाबा तुलसी ने ही की है इसलिए आपकी सेवा में आज वह श्लोक और उसका मेरे कवि द्वारा हिन्दी में टूटे फ़ूटे शब्दों में काव्यानुवाद-
अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामाग्रगण्यम्!
सकल गुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।
काव्यानुवाद-
अतुलनीय बलधाम कान्ति स्वर्णिम पर्वत तन
अग्नि दैत्यवन के सुविज्ञ सर्वाग्रगण्यजन
सर्वगुणों के सिन्धु यूथपति जो कपियों के
रघुपति के प्रिय भक्त पवनसुत को नत वन्दन।
और इसके साथ आपकी सेवा में आज एक और
मुक्तक
बड़ा है जिसका नाम जगत वही श्रेष्ठ है
सुन्दर जिसका काम जगत में वही श्रेष्ठ है
पशु-पक्षी जैसा भी जीना कैसा जीना
तपे जो सुबहो-शाम जगत में वही श्रेष्ठ है।

