वाशिंगटन)अलास्का में चार्टर विमान दुर्घटनाग्रस्त, 8 लोगों की मौत; दो पायलट और छह यात्री थे सवार

वाशिंगटन)अलास्का में चार्टर विमान दुर्घटनाग्रस्त, 8 लोगों की मौत; दो पायलट और छह यात्री थे सवार

वॉशिंगटन,21 अगस्त। अमेरिका के अलास्का राज्य में शुक्रवार को एक चार्टर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में विमान में सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में दो पायलट और छह यात्री शामिल हैं। दुर्घटना पश्चिमी अलास्का के एक दूरस्थ इलाके में केप न्यूएनहैम लंबी दूरी के रडार केंद्र के पास हुई।

संघीय विमानन प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक, सेसना 441 विमान ने अलास्का के एंकरेज से उड़ान भरी थी। विमान करीब 450 मील दक्षिण-पश्चिम में स्थित केप न्यूएनहैम की ओर जा रहा था। इसी दौरान यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

अलास्का कमांड ने बताया कि विमान एक नागरिक अनुबंधित उड़ान पर था। खोज और बचाव दल ने घटनास्थल पर पहुंचने के बाद पुष्टि की कि विमान में सवार कोई भी व्यक्ति जीवित नहीं बचा।

अधिकारियों के अनुसार, विमान केप न्यूएनहैम हवाई अड्डे के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ। यह हवाई पट्टी वायुसेना की सुविधा का हिस्सा है और लंबी दूरी के रडार केंद्र तक पहुंच उपलब्ध कराती है।

केप न्यूएनहैम की इस सुविधा पर केवल सैन्य विमानों और अधिकृत चार्टर उड़ानों को उतरने की अनुमति है। दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण दुर्घटनास्थल तक पहुंचना भी बचाव दल के लिए चुनौतीपूर्ण रहा।

हादसे की जांच संघीय विमानन प्रशासन और राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड द्वारा की जाएगी। संघीय विमानन प्रशासन के अनुसार, जांच का नेतृत्व राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड करेगा।

बचाव और राहत अभियान में अलास्का बचाव समन्वय केंद्र, अलास्का राज्य पुलिस और अमेरिकी तटरक्षक बल के दल भी शामिल रहे।

अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। विमान की उड़ान से जुड़ी परिस्थितियों और हादसे से पहले उसकी स्थिति की भी जांच की जाएगी।

अधिकारियों ने इससे पहले कहा था कि उन्हें विमान में सवार लोगों के बारे में तत्काल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी। बाद में खोज और बचाव दल ने सभी आठ लोगों की मौत की पुष्टि की।

जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों और विमान के अंतिम क्षणों से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

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(इस्लामाबाद)इमरान खान को चिकित्सा जांच के बाद फिर अडियाला जेल में डाला गया

इस्लामाबाद ,21 अगस्त। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इस्लामाबाद के शिफा अंतरराष्ट्रीय अस्पताल में कुछ देर की चिकित्सा जांच के बाद वापस अडियाला जेल भेज दिया गया है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।

रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों द्वारा खान की स्थिति का आकलन करने और उन्हें हिरासत में रखना सुरक्षित पाए जाने के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया। इस दौरान अस्पताल के बाहर भारी सुरक्षा बल मुस्तैद रहा।

पार्टी के प्रवक्ता ने बताया कि 73 वर्षीय संस्थापक को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आधी रात के आसपास चिकित्सा मूल्यांकन के लिए अस्पताल ले जाया गया और शुक्रवार तड़के जेल वापस ले आए।

सूत्रों ने बताया कि इमरान को अस्पताल लाते समय अडियाला जेल से अस्पताल तक आवाजाही बेहद कड़ी सुरक्षा के बीच की गई।

चिकित्सकीय जांच के बाद, इमरान को वापस जेल ले जाया गया और अब उन्हें उनकी कोठरी में स्थानांतरित कर दिया गया है।

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने इमरान के परिवार की याचिका पर 18 अगस्त को फैसला सुनाया था और उनको शिफा अस्पताल में 16 सितंबर तक चिकित्सीय बोर्ड की निगरानी में रखने को कहा था।

फैसले के खिलाफ पाकिस्तान सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने कुछ खामियों की वजह से खारिज कर दिया।

कोर्ट ने हर हफ्ते मंगलवार और गुरुवार को इमरान की उनके परिवार और वकील से जेल में मुलाकात की अनुमति दी है।

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(सना/मोगादियाू)यमन और सोमालिया के पास समुद्री लुटेरों ने 2 जहाजों को अगवा किया, 22 भारतीय सवार

सना/मोगादिशू ,21 अगस्त। यमन और सोमालिया के तट के पास हथियारबंद समुद्री लुटेरों द्वारा दो वाणिज्यिक जहाजों को अगवा किए जाने से क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। दोनों जहाजों पर कुल 22 भारतीय नागरिक सवार थे। पहला जहाज 17 अगस्त को सोमालिया के पुंटलैंड क्षेत्र में और दूसरा जहाज 20 अगस्त को यमन के अल-मुकल्ला के पास अगवा किया गया।

ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन विभाग के अनुसार, 17 अगस्त को सोमालिया के पुंटलैंड क्षेत्र में मराया के पास करीब आठ हथियारबंद लोगों ने कैमरून के झंडे वाले जहाज एमवी-लुतुफ पर कब्जा कर लिया।

जहाज पर चालक दल के 10 सदस्य सवार थे। इनमें छह भारतीय नागरिक, एक तुर्की नागरिक, एक जॉर्जियाई नागरिक और एक सर्बियाई सुरक्षा गार्ड शामिल था। जहाज पर सैन्य उपयोग से जुड़ी सामग्री लदी हुई थी, जिसे तुर्की में सैन्य प्रशिक्षण के लिए ले जाया जा रहा था।

अधिकारियों के अनुसार, समुद्री लुटेरे जहाज को सोमालिया के डंगोरोयो की ओर ले गए हैं। फिलहाल जहाज और उसके चालक दल के सदस्यों की स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है।

ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन विभाग के मुताबिक, 20 अगस्त को दूसरा जहाज एमटी-सिबु-1 यमन के अल-मुकल्ला से करीब 136 समुद्री मील पूर्व में अगवा किया गया। करीब छह हथियारबंद लोगों ने जहाज पर कब्जा कर लिया और उसे सोमालिया की दिशा में मोड़ दिया।

इरिट्रिया के झंडे वाला यह तेल उत्पाद टैंकर था। जहाज पर कुल 20 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 16 भारतीय नागरिक थे। इसके अलावा सीरिया, सूडान और इराक के नागरिक भी चालक दल में शामिल थे।

अधिकारियों के अनुसार, इस जहाज पर सवार सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं। हालांकि, जहाज को सोमालिया की ओर ले जाए जाने के कारण उसकी स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।

दोनों घटनाओं ने अदन की खाड़ी और सोमालिया के आसपास समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। लंबे समय तक अपेक्षाकृत कम हुई समुद्री डकैती की घटनाओं के बीच दो वाणिज्यिक जहाजों के लगातार अगवा होने से समुद्री परिवहन की सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए हैं।

विशेष रूप से भारतीय चालक दल के बड़ी संख्या में मौजूद होने के कारण भारत के लिए भी इन घटनाओं का महत्व बढ़ गया है।

एमटी-सिबु-1 पर अमेरिका की ओर से प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। जहाज के अगवा होने की घटना के बाद संबंधित एजेंसियां घटनाक्रम पर नजर रख रही हैं और चालक दल की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

दोनों घटनाओं में जहाजों की आवाजाही और चालक दल की स्थिति को लेकर संबंधित समुद्री सुरक्षा एजेंसियां जानकारी जुटा रही हैं। आने वाले दिनों में जहाजों और उनमें सवार भारतीय नागरिकों की स्थिति पर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

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(ओटावा)कनाडा पुलिस ने दो खालिस्तान समर्थकों को भेजे सतर्कता पत्र, आपराधिक गतिविधियों वाली जगहों से दूर रहने की सलाह

ओटावा,21 अगस्त। कनाडा की पुलिस ने खालिस्तान समर्थक इंदरजीत सिंह गोसल और मनजिंदर सिंह को सतर्क रहने संबंधी पत्र भेजे हैं। दोनों को आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी जगहों और संदिग्ध गतिविधियों से दूर रहने की सलाह दी गई है। पुलिस की ओर से जारी इन पत्रों को लेकर कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा फिर तेज हो गई है।

इंदरजीत सिंह गोसल कनाडा में तथाकथित खालिस्तान जनमत संग्रह का आयोजन करने वाले संगठन सिख फॉर जस्टिस का समन्वयक बताया जाता है। गोसल का मानना है कि पुलिस की ओर से भेजी गई चेतावनी का संबंध 18 अक्टूबर को एडमंटन में प्रस्तावित जनमत संग्रह से हो सकता है।

गोसल वर्ष 2023 में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद सिख फॉर जस्टिस का कनाडा समन्वयक बना था। निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया था।

हरदीप सिंह निज्जर की वर्ष 2023 में कनाडा में हत्या कर दी गई थी। उस समय कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस हत्या के मामले में भारत की संभावित भूमिका के आरोप लगाए थे। भारत ने इन आरोपों को खारिज किया था और उन्हें निराधार बताया था।

निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के राजनयिक संबंधों में काफी तनाव देखने को मिला था। हालांकि, बाद के समय में दोनों देशों के बीच संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दिए हैं।

निज्जर हत्याकांड को लेकर अमेरिका में हुई जांच और कानूनी कार्रवाई में अलग दावे सामने आए हैं। संघीय जांच ब्यूरो और अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से दायर आरोपपत्र से जुड़े दावों में हत्या के मामले में लॉरेंस बिश्नोई और सतिंदरजीत सिंह, जिसे गोल्डी बराड़ के नाम से जाना जाता है, का नाम सामने आया था।

इन दावों और कनाडा में निज्जर हत्याकांड को लेकर सामने आए आरोपों ने मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था।

निज्जर हत्याकांड के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव बढ़ा था, लेकिन अब स्थिति में सुधार के संकेत हैं। भारत और कनाडा आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

दोनों देश वर्ष 2026 के अंत तक एक बड़े व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। ऐसे में कनाडा पुलिस की ओर से खालिस्तान समर्थक गतिविधियों से जुड़े लोगों को भेजे गए सतर्कता पत्र सुरक्षा और राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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(नईदिल्ली)दिल्ली-एनसीआर में पिछले साल के मुकाबले 6 गुना बढ़े स्वाइन फ्लू के मरीज, सांस की शिकायत

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नई दिल्ली,21 अगस्त (आरएनएस)। बदलते मौसम के बीच राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में एच1एन1 संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी सामने आई है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 12 अगस्त तक एच1एन1 के 1,449 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। यह संख्या पिछले वर्ष की इसी अवधि में सामने आए 229 मामलों की तुलना में करीब छह गुना अधिक है। अकेले 11 अगस्त को 63 नए मामले सामने आए।

दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में संक्रमण का असर आम लोगों के साथ-साथ चिकित्सकों पर भी दिखाई दे रहा है। कई चिकित्सकों और एक सरकारी अस्पताल के प्रमुख के भी एच1एन1 से संक्रमित होने की जानकारी सामने आई है। अस्पतालों में सर्दी-जुकाम और सांस से जुड़ी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

बढ़ते संक्रमण को देखते हुए दिल्ली के सरकारी अस्पतालों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा है कि दिल्ली सरकार के अस्पताल स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। राम मनोहर लोहिया अस्पताल और सफदरजंग अस्पताल में संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए विशेष एवं अलग वार्ड बनाए गए हैं।

चिकित्सकों के अनुसार, कुछ मरीजों में सांस लेने में परेशानी और रक्त में ऑक्सीजन का स्तर कम होने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। हालांकि, फिलहाल स्थिति गंभीर स्तर तक नहीं पहुंची है। चिकित्सकों ने लक्षणों को नजरअंदाज न करने और समय पर उपचार लेने की सलाह दी है।

चिकित्सकों ने बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

सर्दी-जुकाम, बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श करने की सलाह दी गई है। संक्रमण की आशंका होने पर समय पर जांच और उपचार से जटिलताओं से बचा जा सकता है।

दिल्ली में एच1एन1 का संक्रमण पहले भी गंभीर रूप ले चुका है। वर्ष 2019 में राजधानी में एच1एन1 के 3,637 मामले दर्ज किए गए थे और संक्रमण के कारण 31 लोगों की मौत हुई थी। ऐसे में मौजूदा बढ़ोतरी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों की तैयारियों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

एच1एन1 इन्फ्लुएंजा विषाणु से होने वाला श्वसन संक्रमण है। इसे आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती स्वरूप से जुड़े विषाणु सूअरों में पाए जाते थे। अप्रैल 2009 में इस संक्रमण की पहचान सबसे पहले मेक्सिको में हुई थी और इसके बाद यह दुनिया के कई देशों में फैल गया। भारत में उस समय संक्रमण के कारण 1,500 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

एच1एन1 संक्रमण में सामान्य तौर पर खांसी, गले में दर्द, बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में उल्टी, सांस लेने में परेशानी और सीने में दर्द भी हो सकता है।

चिकित्सकों का कहना है कि सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या रक्त में ऑक्सीजन का स्तर गिरने जैसी शिकायत होने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। बदलते मौसम में भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतना, स्वच्छता का ध्यान रखना और बीमारी के लक्षण होने पर दूसरों से उचित दूरी बनाए रखना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मददगार हो सकता है।

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(नईदिल्ली)चीनी 2 महीने में 40 प्रतिशत महंगी हुई, अब सरकार ने आयात टैक्स मुक्त किया

नईदिल्ली,21 अगस्त (आरएनएस)। देश में चीनी की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दे दी है। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, यह आयात 31 अक्टूबर तक किया जा सकेगा। साथ ही देश में चीनी की कमी रोकने के लिए निर्यात पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। यह रोक 30 सितंबर, 2026 तक लागू रहेगी।

अधिसूचना के मुताबिक, टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) प्रणाली के तहत 31 अक्टूबर, 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी गई है।

सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं द्वारा रखे गए चीनी भंडार पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि जो थोक उपभोक्ता प्रति माह 10 टन से ज्यादा चीनी का उपयोग करते हैं, उन्हें 15 दिनों से अधिक की खपत के लिए चीनी का भंडार रखने की अनुमति नहीं होगी।

सरकार ने कुछ और नियम बदले हैं। टीआरक्यू के तहत आयात की गई कच्ची चीनी से तैयार रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर तक घरेलू बाजार में बेचना जरूरी होगा।

आयात के समय प्राप्त छूट वाले जीएसटी का भी भुगतान करना होगा।

जो थोक खरीदार महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करते हैं, उन्हें 15 दिन से ज्यादा स्टाक रखने की इजाजत नहीं होगी। पहले ये अनुमति 30 दिन के लिए थी।

खुदरा बाजार में चीनी फिलहाल 65 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। एक साल पहले इसी अवधि में यह 46.34 रुपये प्रति किलो थी। देशभर में चीनी के दाम पिछले 2 महीनों में करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।

उद्योग संगठन के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को देश में चीनी की औसत एक्स-मिल कीमत 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल थी। एक साल पहले यह करीब 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी।

चीनी की किल्लत और दाम बढ़ने की बड़ी वजह मौसम की मार रही है। कम बारिश और सूखे के कारण गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। इसका असर आने वाले सीजन में चीनी के उत्पादन पर पड़ सकता है।

मौजूदा सीजन में कुल चीनी उपलब्धता करीब 320 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि घरेलू खपत करीब 285 लाख टन है।

इसके अलावा ईरान युद्ध, एथेनॉल में चीनी का इस्तेमाल और आगामी त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग भी वजह है।

सरकार के कदम के बाद आज शेयर बाजार में चीनी कंपनियों के शेयरों में 5 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।

खबर लिखे जाने तक डालमिया भारत शुगर का शेयर 5.47 प्रतिशत गिरकर 480.30 पर कारोबार कर रहा है। वहीं, द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज के शेयर में 4.32 प्रतिशत, बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयर में 4.15 प्रतिशत और त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज के शेयर में 3.82 प्रतिशत की गिरावट आई है।

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(हैदराबाद)हैदराबाद में तेज रफ्तार एस्टन मार्टिन ने ली 26 वर्षीय महिला की जान, राज्यसभा सांसद के बेटे पर मामला दर्ज

हैदराबाद,21 अगस्त (आरएनएस)। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के मामले में आंध्र प्रदेश के राज्यसभा सांसद लिंगमनेनी रमेश के बेटे लिंगमनेनी संजुश को आरोपी बनाया गया है। संजुश पर आरोप है कि उन्होंने अपनी एस्टन मार्टिन कार से 26 वर्षीय भारती मुखी को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को नोटिस जारी किया है।

भारती मुखी हैदराबाद के माधापुर इलाके में स्थित इनऑर्बिट मॉल के एक परिधान स्टोर में बिक्री कार्यकारी के पद पर कार्यरत थीं। 16 अगस्त को दोपहर करीब 3 बजे वह भोजन करने के लिए पास के एक होटल गई थीं। भोजन के बाद वापस मॉल लौटते समय वह सड़क पार कर रही थीं। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रही एस्टन मार्टिन कार ने उन्हें टक्कर मार दी।

हादसे के बाद भारती को उसी कार से अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद स्टोर प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

लिंगमनेनी रमेश आंध्र प्रदेश के राज्यसभा सांसद हैं और जनसेना पार्टी से जुड़े हुए हैं। 53 वर्षीय रमेश पेशे से व्यवसायी हैं और उनका कारोबार रियल एस्टेट, निर्माण तथा बुनियादी ढांचा क्षेत्रों से जुड़ा है। वह वर्ष 2015 से जनसेना पार्टी के प्रमुख और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के साथ जुड़े हुए हैं। इसी वर्ष वह राज्यसभा पहुंचे हैं।

चुनावी हलफनामे के अनुसार, रमेश की घोषित कुल संपत्ति करीब 213.4 करोड़ रुपये है, जबकि उनकी देनदारियां लगभग 85.6 करोड़ रुपये बताई गई हैं। उनके खिलाफ कुल नौ आपराधिक मामले लंबित हैं, हालांकि किसी मामले में उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है। उनका नाम आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और अमरावती की भूमि से जुड़े विवादों में भी सामने आ चुका है।

सांसद के बेटे लिंगमनेनी संजुश ऊर्जा और बिजली क्षेत्र में काम करने वाली दो कंपनियों के निदेशक हैं। इनमें ब्लैक रिज एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड और कैपिटल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। वह महज 21 वर्ष की उम्र में इन कंपनियों के निदेशक बने थे।

संजुश ने अमेरिका के डलास स्थित टेक्सास विश्वविद्यालय से कंप्यूटर विज्ञान की पढ़ाई की है।

पुलिस के अनुसार, हादसे के समय संजुश नशे में नहीं थे और उनके खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला भी दर्ज नहीं है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया है। यह धारा लापरवाही या उपेक्षा के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु होने से संबंधित है। इसके तहत अधिकतम पांच वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।

पुलिस के मुताबिक यह जमानती अपराध है, इसलिए फिलहाल संजुश को गिरफ्तार नहीं किया गया है। उन्हें जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

पुलिस के अनुसार, जिस एस्टन मार्टिन कार से हादसा हुआ, उसका मालिक प्राइम हाउसिंग एलएलपी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे से जुड़े अन्य तथ्यों तथा परिस्थितियों की भी पड़ताल की जा रही है।

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(नईदिल्ली)भारत-नेपाल सीमा पर अतिक्रमण का ड्रोन से होगा सर्वेक्षण, तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य

नई दिल्ली,21 अगस्त (आरएनएस)। भारत और नेपाल ने अपनी 1,880 किलोमीटर लंबी खुली सीमा से जुड़े अतिक्रमण और सीमा पार कब्जे के मामलों के दस्तावेजीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दोनों देश सीमा पर स्थित 10 गज चौड़ी निर्जन भूमि की पट्टी, जिसे दासगजा या नो-मैन्स लैंड कहा जाता है, से लगे अतिक्रमणों का मानचित्रण करने के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करने पर सहमत हुए हैं। इस प्रक्रिया के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार जमीन पर किए गए कब्जों का भी दस्तावेज तैयार किया जाएगा।

यह फैसला पिछले सप्ताह लखनऊ में हुई सर्वेक्षण अधिकारी समिति की 13वीं बैठक में लिया गया। समिति में नेपाल के सर्वेक्षण विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। बैठक में दोनों देशों के अधिकारियों ने सीमा क्षेत्रों में अतिक्रमण और सीमा पार कब्जे की स्थिति का तकनीकी तरीके से आकलन करने पर सहमति जताई।

इसके तहत उन क्षेत्रों की ड्रोन से तस्वीरें और अन्य आंकड़े जुटाए जाएंगे, जहां अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास अतिक्रमण या सीमा पार कब्जे की शिकायतें हैं। दोनों देशों के अधिकारी मिलकर ऐसे स्थानों की पहचान करेंगे और उनके आधार पर तकनीकी मूल्यांकन तैयार करेंगे।

नेपाल के सर्वेक्षण विभाग के उपनिदेशक सुशील डांगोल के अनुसार, सीमा पार कब्जे के मानचित्रण को तीन वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रक्रिया की शुरुआत मानसून समाप्त होने के बाद की जा सकती है।

सर्वेक्षण के बाद भारत और नेपाल संयुक्त रूप से सत्यापित तकनीकी अभिलेख तैयार करेंगे। इन अभिलेखों का इस्तेमाल भविष्य में अतिक्रमण हटाने, भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने या मुआवजे से जुड़े मामलों पर बातचीत के लिए किया जा सकेगा।

भारत और नेपाल के बीच सीमा से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं। हाल में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में कहा था कि भारत ने नेपाली भूमि पर अतिक्रमण किया है और नेपाल ने भी भारतीय भूमि पर अतिक्रमण किया है। उनके इस बयान को लेकर दोनों देशों में राजनीतिक बहस तेज हो गई थी।

बालेन शाह ने यह टिप्पणी लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्रों से जुड़े सवालों के संदर्भ में की थी। इन क्षेत्रों को लेकर भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं।

भारत-नेपाल सीमा से लगे बिहार के छह जिलों में 108 निगरानी टावर बनाए जाने की भी योजना है। इस संबंध में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल और अररिया के जिलाधिकारियों को पत्र भेजे गए हैं।

इन निगरानी टावरों के निर्माण के लिए प्रत्येक स्थान पर 10 मीटर गुणा 10 मीटर भूमि की आवश्यकता होगी। सीमा की निगरानी मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इन टावरों का निर्माण किया जाएगा।

भारत-नेपाल सीमा के साथ स्थित निर्जन भूमि की पट्टी में हाल के समय में अतिक्रमण और स्थायी निर्माण की गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ी है। कुछ स्थानों पर भारत विरोधी गतिविधियों की भी जानकारी सामने आई है। ऐसे में दोनों देशों के बीच ड्रोन के माध्यम से संयुक्त मानचित्रण और तकनीकी अभिलेख तैयार करने की पहल को सीमा प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संयुक्त सर्वेक्षण से सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों में वास्तविक स्थिति का स्पष्ट और प्रमाणिक रिकॉर्ड तैयार होने की उम्मीद है, जिससे भविष्य में अतिक्रमण और भूमि विवाद से जुड़े मामलों के समाधान में दोनों देशों को मदद मिल सकती है।

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(नईदिल्ली)देश के कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, दिल्ली-एनसीआर में उमस से राहत के आसार

नई दिल्ली,21 अगस्त (आरएनएस)। देश के कई हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय बना हुआ है। इसके चलते जहां कुछ राज्यों में उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली है, वहीं कई इलाकों में भारी बारिश, बाढ़ और जलभराव ने परेशानी बढ़ा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को दिल्ली, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश होने का पूर्वानुमान जताया है।

मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। पूर्वोत्तर राज्यों तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

मौसम में यह बदलाव उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उसके आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र तथा उससे जुड़े चक्रवाती परिसंचरण के कारण हुआ है। इसके अलावा मानसून की द्रोणिका भी इसी क्षेत्र से होकर गुजर रही है। यह द्रोणिका फिरोजपुर और मेरठ से होते हुए पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है।

इन मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से मध्य, उत्तर और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

उत्तराखंड में भारी बारिश का दौर जारी

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