विगत चार महीनों से किया जा रहा एक पूरे परिवार का मानसिक उत्पीड़न, ब्लैकमेलिंग, और परिवार के लिए आत्महत्या जैसी स्तिथि। वरिष्ठ नागरिक महिलाओं व युवती और किशोरियों को पुरुष के नग्न फोटो का भेजा जाना और पुलिस द्वारा 4 महीने में नग्न AI फोटो और मानहानिकारक अश्लील सामग्री हटवाने में घोर असफलता (पुलिस द्वारा न हटवा सकना)। पीड़ित परिवार से पुलिस द्वारा व्हाट्सप्प कॉल लगाकर अभद्रता करना
क्या बेहूदगी है। कल प्रणव सक्सैना वाली फेक फेसबुक आईडी ने मेरे एक जीजाजी (मेरी बुआजी की बेटी के पति) को ये सब उल्टा सीधा लिखा है। यदि इसमें सत्यता है तो सामने आकर कानूनी कार्यवाही करने के स्थान पर फ़र्ज़ी फेसबुक खातों से लिखकर महीनों से पूरे परिवार को मानसिक प्रताड़ित करने का क्या मतलब है? IO आर पी सिंह जी का कहना है कि उनके थाना के पास तकनीकी साक्ष्य है जिसके चलते उन्होंने 17 जुलाई को ही chargesheet लगा दी है लेकिन इसकी सूचना पीड़ित परिवार को नहीं दी गई, ये नहीं बताया कि कब और किस न्यायलय में लगाई गई है। साथ ही क्या FIR में फ़र्ज़ी खाता बंद करवाने और ये नग्न AI फोटो और अश्लील मैसेज डिलीट करवाने का अनुरोध नहीं था? उसपे तो कुछ नहीं किया आगरा पुलिस ने, सब आज भी पब्लिक है।
इस प्रणव सक्सैना वाले फ़र्ज़ी खाते की जानकारी तत्कालीन IO श्री राजबीर जी को और तकनीकी IO सुश्री शैली गुप्ता जी को 1/जून/2026 को ही दी जा चुकी थी। इसके द्वारा मानहानि करने वाले साक्ष्य 1/जून/2026 को सुश्री शैली जी को उपलब्ध करवा दिए थे। इसके बाद व्हाट्सप्प कॉल पर ज्योति जी ने बदतमीज़ी भरी भाषा में अकाउंट बंद न करवाने को कह कर लिखित प्रार्थना पत्र माँगा था जो उन्हें तत्काल साइबर थाना और साइबर सेल की आधिकारिक ईमेल आईडी पर सहसाक्षय 16/june/2026 को उपलब्ध करवा दिया था। हस्तलिखित प्रार्थना पत्र साइबर थाना को 25/june/2026 को सहसाक्ष्य उपलब्ध करवा दिया था। साइबर थाना के कहने पर 12/जुलाई/2026 को प्रणव सक्सैना खाता बंद करवाने को हस्तलिखित प्रार्थना पत्र साइबर सेल में प्रशांत सिद्धू जी को दिया। 24 जुलाई को फॉलो अप पर प्रशांत सिद्धू ने मना कर दिया कि उन्हें नहीं पता कि ये काम किसको करना है, इंचार्ज ने किसे दिया है, यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि मेटा को कोई नोटिस गया भी है अथवा नहीं। साथ ही प्रशांत जी ने अपराधी के साथ आपने सामने बैठ कर केस स्वयं से सोल्वे करने को कह दिया। कल जब साइबर थाना बात की गई तो साइबर थाना का कहना है 24 जुलाई को उन्होंने भी प्रशांत जी से बात की तो वो बोले मेटा को नोटिस भेज दिया है। अब दोनों एक दुसरे की तरफ बात डाल रहे हैं। सच्चाई क्या है, मेटा को नोटिस गया भी है या नहीं, ये पीड़ित या उसके परिवार को नहीं पता। साइबर सेल इंचार्ज विमल जी को पिछले एक महीने में दर्जनों कॉल किये, दर्जनों मैसेज किये। न तो विमल जी कॉल उठाते हैं, न कॉल बैक करते हैं, और न ही मैसेज का जबाव देते हैं। ये हैं सरकारी जनअधिकारी। कोई जबावदेही नहीं, कोई ज़िम्मेदारी नहीं। जनता मर रही है तो मरती रहे इन लोगों के लिए और वही दूसरी तरफ ये फेक अकाउंट रोज़ाना दर्जनों नए परिचितों को निशाना बना रहे हैं।

